India-China Trade: भारत की इन कंपनियों में चीन ने निवेश किये हैं अरबों रुपये

India-China Trade: भारत की इन कंपनियों में चीन ने निवेश किये हैं अरबों रुपये
भारत के कुल निर्यात का सिर्फ 3.2 फीसदी हिस्सा चीन का है.

India-China Trade: एफडीआई इंटेलिजेंस द्वारा प्रकाशित एक 22 अप्रैल की रिपोर्ट के अनुसार साल 2019 में '19 इन्बाउन्ड प्रोजेक्ट्स थे जो रूस में निवेश की गई आठ परियोजनाओं के दोगुने से अधिक हैं.'

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 19, 2020, 12:51 PM IST
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नई दिल्ली. पूर्वी लद्दाख (East Ladakh) की गलवान वैली (Galwan Valley) में भारतीय और चीनी सैनिकों (India China Rift) के बीच हुए हिंसक संघर्ष के बाद अब हर ओर से यह आवाज उठने लगी हैं कि चीन के साथ व्यापार (Trade of India With China) के दायरे को घटाया जाए. इतना ही नहीं बीते कुछ दिनों में कई मंत्रालयों ने चीनी कंपनियों को दिये टेंडर रद्द कर दिये तो वहीं कहीं यह सलाह जारी की गई है कि जहां तक संभव हो प्रोजेक्ट्स में चीनी सामान के इस्तेमाल से बचें.

तो आइए हम आपको बताते हैं कि चीन ने किन भारतीय कंपनियों में बड़ा निवेश किया है और भारतीय व्यापार क्षेत्र में उसके कदम कहां-कहां पड़ चुके हैं.

चीनी फर्मों ने देश के कुछ प्रतिष्ठित ब्रांड्स जैसे ओला, पेटीएम, फूड-डिलीवरी ऐप जोमैटो और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट में भारी निवेश किया है.



चीन कस्टम डिपार्टमेंट आधार पर वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार चीन के साथ भारत का द्विपक्षीय व्यापार 2019 में लगभग 80 बिलियन डॉलर  (6 खरब से ज्यादा) का था. भारत के बीजिंग दूतावास की वेबसाइट पर पोस्ट किए गए डेटा के अनुसार जनवरी और नवंबर 2019 के बीच 84.3 बिलियन डॉलर (64 खरब रुपये से ज्यादा) का कुल द्विपक्षीय व्यापार हुआ. जिसमें पिछले वर्ष के 95.7 बिलियन डॉलर ( 72 खरब रुपये से ज्यादा) से लगभग 3.2% की गिरावट दर्ज की गई.
चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है लेकिन बड़ा व्यापार घाटा भी है. इसका मतलब है कि भारत, जितना सामान चीन को बेचता है उससे कहीं अधिक चीन से खरीदता है. भारत के कुल आयात में औसतन 16 फीसदी हिस्सा चीन का है. वहीं दूसरी ओर भारत के कुल निर्यात में चीन का हिस्सा सिर्फ 3.2% है. ऐसे में यह भारत के लिए घाटे का सौदा है.

इसके अलावा विश्लेषकों का कहना है कि भारत के तकनीकी क्षेत्र में चीन ने भारी निवेश किया है. द फाइनेंशियल टाइम्स लिमिटेड के स्वामित्व वाली एक वैश्विक निवेश सलाहकार कंपनी एफडीआई इंटेलिजेंस के आंकड़ों के अनुसार साल 2019-20 में चीनी टेक फर्मों ने भारत में सबसे अधिक निवेश किया.

एफडीआई इंटेलिजेंस द्वारा प्रकाशित एक 22 अप्रैल की रिपोर्ट के अनुसार साल 2019 में '19 इन्बाउन्ड प्रोजेक्ट्स थे जो रूस में निवेश की गई आठ परियोजनाओं के दोगुने से अधिक है.' थिंक-टैंक गेटवे हाउस के आंकड़ों के अनुसार भारत में 1 बिलियन डॉलर  (76 अरब रुपये से ज्यादा) के निवेश भारतीय स्टार्ट-अप्स में किये गये हैं.

अलीबाबा, पेटीएम में भी एक बड़ा निवेशक
साल 2018 में अलीबाबा ने ऑनलाइन मार्केट BigBasket में 216 मिलियन डॉलर  (16 अरब रुपये से ज्यादा) का निवेश किया. इसने फूड डिलीवरी ऐप Zomato में भी 210 मिलियन अमेरिकी डॉलर (16 अरब से ज्यादा) का निवेश किया. ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Flipkart में 700 मिलियन अमेरिकी डॉलर (53 अरब रुपये से ज्यादा) के अलावा, Tencent ने ओला में 400 मिलियन डॉलर का निवेश (30 अरब रुपये से ज्यादा) किया. इस निवेश ने भारत की टेक फर्म द्वारा सबसे अधिक विदेशी निवेश पाने का रिकॉर्ड बनाया. अलीबाबा, पेटीएम में भी एक बड़ा निवेशक है, जबकि Tencent ने bjyu के एजुकेशन स्टार्ट-अप में निवेश किया है.

भारत चीन को कपास, धागा, जैविक रसायन, अयस्क, प्राकृतिक मोती, कीमती पत्थरों और कपड़ों का निर्यात करता है. भारत में चीनी से आने वाले सामान में इलेक्ट्रिक मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, परमाणु रिएक्टर, बॉयलर, सौर ऊर्जा से जुड़े सामान और पीपीई शामिल हैं.

हिन्दुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार  इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की ट्रेड इकॉनॉमिस्ट गीतांजलि नटराज ने कहा, 'भारत में अब बहुत सारी चीजों पर निगाह जाएगी हालांकि मैं माल के व्यापार पर रातों रात कोई असर नहीं देख रही हूं.' भारतीय वाणिज्य मंत्रालय द्वारा अप्रैल में विदेशी निवेश नियमों को कड़ा किए जाने का जिक्र करते हुए नटराज ने कहा कि दोनों देशों के बीच 'विश्वास की कमी' स्पष्ट थी. नए नियम के अनुसार कोई भी देश 'जो भारत के साथ सीमा साझा करता है' उसके व्यवसाय को भारतीय फर्म में निवेश करने से पहले सरकार की अनुमति लेनी होगी.



जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में प्राध्यापक और ट्रेड एक्सपर्ट बिस्वाजीत धर ने कहा 'यह चीन द्वारा अवसरवादी अधिग्रहण की संभावना को रोकने के लिए किया गया.'
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