डोकलाम जैसी फजीहत से बचने के लिए चीन सिक्किम के पास तिब्बत में बना रहा ब्रिगेड हेडक्वार्टर

डोकलाम जैसी फजीहत से बचने के लिए चीन सिक्किम के पास तिब्बत में बना रहा ब्रिगेड हेडक्वार्टर
सिक्किम के दूसरी ओर चीन एक ब्रिगेड हेडक्वाटर के निर्माण में भी जुटा है.

2017 में डोकलाम (Doklam) में हुई फजीहत से बचने के लिए चीन (China) सीमा पर अपनी सेना के जमावड़े को बढ़ा रहा है. यही नहीं सिक्किम (Sikkim) के दूसरी ओर चीन एक ब्रिगेड हेडक्वाटर के निर्माण में भी जुटा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 27, 2020, 12:01 PM IST
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नई दिल्ली. पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी (Galwan Valley) में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद भारत (India) के रुख को देखते हुए चीन (China) एक बार फिर डोकलाम (Doklam) जैसी गलती नहीं करना चाहता है. यही कारण है कि भारत के साथ चल रहे तनाव के बीच चीन भारत से लगी 3500 किलोमीटर से ज़्यादा की LAC पर लगातार अपनी सेना को मजबूत करने में लगा हुआ है. 2017 में डोकलाम में हुई फजीहत से बचने के लिए चीन सीमा पर अपनी सेना के जमावड़े को बढ़ा रहा है. यही नहीं सिक्किम (Sikkim) के दूसरी ओर चीन एक ब्रिगेड हेडक्वार्टर के निर्माण में भी जुटा है.

भारत से मुक़ाबला करने के लिए चीन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. भारत की तैयारी को देखते हुए चीन भी 3500 किलोमीटर से ज़्यादा की सीमा पर अपने हथियारों का ज़ख़ीरा तैनात कर दिया है. चीन जानता है कि इस बार भारत पीछे नहीं हटेगा यही कारण है कि भाविष्य में भारत से मिलने वाली चुनौती को देखते हुए उसने सीमा पर सैनिकों की संख्या भी बढ़ा दी है.

बता दें कि पूरे एलएसी पर सिक्किम ही एक ऐसा इलाका है जहां भारतीय सेना से चीन ख़ौफ खाता है. इसका नजारा 1967 की जंग और डोकलाम में पनपे विवाद के बाद चीन देख चुका है. एसे में चीन ने अपनी ताक़त को वहां बढ़ाना शुरू कर दिया है. डोकलाम के बाद और मौजूदा हालात को देखते हुए चीन सिक्किम के पास तिब्बत में अपनी सेना को स्थायी तौर पर तैनात करने जा रहा है. खबर है कि एलएसी के पास चीन नया फ़ैज़ी ठिकाना तैयार कर रहा है.



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सिक्किम के दूसरी ओर ग्यांत्से में चीन बना रहा ब्रिगेड हेडक्वार्टर
खुफिया रिपोर्ट में इस बात ख़ुलासा हुआ है कि सिक्किम के दूसरी ओर ग्यांत्से में चीन की सरकार नया ब्रिगेड हेडक्वार्टर तैयार कर रहा है. हालांकि इसका काम जनवरी 2020 में ही शुरू किया जा चुका है लेकिन पिछले कुछ दिनों से इस काम में तेजी लाई गई है. अभी तक इस इलाके में चीनी पीएलए की एक बटालियन तैनात थी लेकिन अब यहां पर एक बड़े चीनी सेना के अधिकारी को तैनात किया जाएगा. कुछ तस्वीरों में दिखाई दे रहा है कि यहां पर 6 बटालियन के ठहरने का बंदोबस्त होगा. इस सैन्य ठिकाने में सेना का हेडक्वाटर, ऐडमिनिस्ट्रेशन एरिया और तकरीबन 600 गाड़ियों के रखे जाने की व्यवस्था की जा रही है.

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73 दिनों तक चला था डोकलाम का विवाद
सूत्रों की मानें तो जनवरी 2020 में शुरू हुआ निर्माण 2021 की गर्मियों तक पूरा भी हो जाएगा. चीनी सेना के एक आर्टेलरी बटालियन को ग्यांत्से से 14 किलोमीटर दूर तौनात किया है जो कि ल्हासा में तैनात 54 कम्बाइंड आर्मड ब्रिगेड का हिस्सा है. सूत्रों की मानें तो डोकलाम में जिस तरह से चीन को शर्मिंदगी झेलनी पड़ी थी उसके बाद से ही उसने अपनी सेना की एक बड़ी तादाद सिक्किम के दूसरी ओर तैनात करने का फ़ैसला किया था. डोकलाम में 73 दिन तक चले फेसऑफ की शुरुआत तब हुई जब चीन ने धीरे—धीरे कर चुंबी वैली के सिंचला पास से सड़क बनानी शुरू की और चीन की पीएलए सेना इस सड़क को धीरे—धीरे कर डोकलाम में तोरसा नाले के आगे बढ़ने लगी तभी भारतीय सेना ने ऑपरेशन जुनिपर चलाया और सड़क के निर्माण को रोका. भारत भी यही चाहता था कि तोरसा नाले के आगे चीन सड़क ना बना पाए. पिछले साल न्यूज 18 इंडिया की टीम जब नाथुला में एलएसी के बीपीएम प्वाइंट (बॉर्डर पर्सनल मीटिंग) पर चीन के नेशनल डे के समारोह को कवर करने पहुंची थी तो उस कुछ तस्वीरें और वीडियो को देखा था, जिसमें साफ दिख रहा था कि किस तरह से चीन की सेना डोकलाम से वापस लौटते वक़्त मायूस दिख रही थी.

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भारत की तरह ही चीन भी रख रहा नजर
डोकलम विवाद के बाद से भारतीय सेना ने सिक्किम से डोकलम में दाखिल होने वाले डोकाला दर्रे के करीब अपनी पूरी एक ब्रिगेड तैनात कर दी है ताकि भविष्य में चीन की तरफ से कोई चाल चली जाए तो उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके. मौजूदा हालात को देखते हुए भारतीय सेना ने अपनी सेना की संख्या को इस इलाके में बढ़ाया भी है. भारतीय सेना की हर एक मूवमेंट पर नजर रखने के लिए चीन ने अपने सर्विलांस उपकरणों को इस इलाके में लगाया है साथ ही हाई रेज्यूलेशन कैमरे भी तैनात कर दिए है.बहरहाल चीन को लगता है कि इस इलाके में भारत से लड़ना उसके लिए तब तक फ़ायदेमंद नहीं होगा जब तक की उसकी सेना संख्या ज़्यादा न हो.
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