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गलवान घाटी में भारत के साथ खूनी झड़प में मारे गए थे चीन के 45 सैनिक, रूसी एजेंसी TASS का दावा

गलवान घाटी में भारत-चीन के बीच खूनी झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे. (पीटीआई फाइल फोटो)
गलवान घाटी में भारत-चीन के बीच खूनी झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे. (पीटीआई फाइल फोटो)

India China LAC Tension: भारत और चीन का सीमा विवाद 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 11, 2021, 1:35 PM IST
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नई दिल्ली. पूर्वी लद्दाख में पैंगोग झील के उत्तरी और दक्षिणी छोर पर तैनात भारत और चीन के अग्रिम पंक्ति के सैनिकों ने बुधवार से व्यवस्थित तरीके से पीछे हटना शुरू कर दिया. यह जानकारी चीन के रक्षा मंत्रालय ने दी है, लेकिन भारत की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकरिक टिप्पणी नहीं आई है, लेकिन घटनाक्रम से अवगत लोगों ने कहा कि दोनों पक्ष टैंक और बख्तरबंद वाहनों जैसी इकाइयों को पीछे हटाने की प्रक्रिया में हैं. घटनाक्रम से अवगत लोगों ने कहा कि टकराव वाले स्थलों से बख्तरबंद इकाइयों की वापसी जैसे विशिष्ट कदमों पर 24 जनवरी को 16 घंटे तक चली नौवें दौर की कोर कमांडर स्तर की वार्ता में गहन चर्चा हुई थी.

इस बीच रूस की न्यूज एजेंसी तास ने दावा किया है कि पिछले साल 15 जून को भारत-चीन सेनाओं के बीच गतिरोध कम करने के प्रयासों के दौरान पूर्वी लद्दाख के गलवान में दोनों सेनाओं के बीच चले खूनी संघर्ष में चीन के करीब 45 सैनिक मारे गए थे. वहीं, भारतीय सेना के एक कमांडिग अधिकारी (कर्नल) समेत 20 जवान भी इस झड़प में शहीद हुए थे. हालांकि, चीन ने कभी भी आधिकारिक तौर पर इस बात की जानकारी साझा नहीं की कि इस झड़प में कितने चीनी जवान मारे गए थे.





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चीन द्वारा हताहत हुए सैनिकों की संख्या सावर्जनिक नहीं किए जाने की बाबत शुरू से ही यह कहा जा रहा था कि बीजिंग की तरफ से गुडविल के तौर पर ऐसा किया जा रहा है ताकि दोनों देशों की जनता के बीच सैनिकों की मौतों को लेकर तुलना न हो. हालांकि जिस दिन यह घटना हुई उसी दिन घायल सैनिकों की तलाश में चीनी हैलीकॉप्टर दिन भर एलएसी के करीब देखे गए थे. इसके बाद से ही अटकलें लगाई जा रही थीं कि इस झगड़े चीन के सैनिक भी काफी संख्या में हताहत हुए हैं.

1967 के बाद पहली बार PLA के साथ झड़प में भारतीय सैनिक की मौत
15 जून 2020 को हुआ संघर्ष नाथू ला में 1967 में हुई उस झड़प के बाद सबसे बड़ा संघर्ष है जिसमें चीन के 300 से अधिक सैनिक मारे गए थे और भारत के लगभग 80 जवान शहीद हो गए थे. इसके बाद 1975 में चीन की सेना के साथ हिंसक झड़प में भारतीय सैनिक की मौत हुई थी. 1975 में अरुणाचल प्रदेश के तुलुंग ला में दोनों देशों के बीच अस्थाई सीमा के पास घात लगाकर किए गए हमले में चार भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे.

पूर्वी लद्दाख के इलाकों में चल रहा है विवाद
भारत और चीन की सेना के बीच पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग सो, गलवान घाटी, डेमचोक और दौलत बेग ओल्डी में गतिरोध चल रहा है. काफी संख्या में चीनी सैनिक अस्थायी सीमा के अंदर भारतीय क्षेत्र में पैंगोंग सो सहित कई स्थानों पर घुस आए हैं. भारतीय सेना ने घुसपैठ पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है और क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए उनकी तुरंत वापसी की मांग की है. गतिरोध दूर करने के लिए दोनों पक्षों के बीच पिछले कुछ दिनों में कई वार्ताएं हुई हैं. भारत और चीन का सीमा विवाद 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर है. चीन, तिब्बत के दक्षिणी हिस्से के रूप में अरुणाचल प्रदेश पर दावा करता है, जबकि भारत इसे अपना अभिन्न अंग बताता है.

5 मई 2020 को भारत और चीन की सेना में झड़प
पूर्वी लद्दाख में स्थिति तब खराब हुई जब पिछले साल बीते पांच मई को पेगोंग झील क्षेत्र में भारत और चीन के लगभग 250 सैनिकों के बीच लोहे की छड़ों और लाठी-डंडों से झड़प हो गई. दोनों ओर से पथराव भी हुआ था, जिसमें दोनों देशों के सैनिक घायल हुए थे. यह घटना अगले दिन भी जारी रही थी. इसके बाद दोनों पक्ष 'अलग' हुए, लेकिन गतिरोध जारी रहा. इसी तरह की एक अन्य घटना में नौ मई को सिक्किम सेक्टर में नाकू ला दर्रे के पास दोनों देशों के लगभग 150 सैनिकों के बीच झड़प हो गई थी. सूत्रों के अनुसार, इस घटना में दोनों पक्षों के कम से कम 10 सैनिक घायल हुए थे.
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