स्मार्ट स्वार्म वेपन बनाने में जुटा हुआ है चीन, रडार की पकड़ में भी आना मुश्किल

ड्रोन को चीन की गुआंग्सी यूनिवर्सिटी ने निजी फर्म बी-ईटर टेक्नोलॉजी के इंजीनियरों के साथ मिलकर तैयार किया है.

ड्रोन को चीन की गुआंग्सी यूनिवर्सिटी ने निजी फर्म बी-ईटर टेक्नोलॉजी के इंजीनियरों के साथ मिलकर तैयार किया है.

India-China : चीन जिस तरह से अपने तकनीक को बढ़ाने में जुटा है और वो हाइपरसोनिक मिसाइल के नेटवर्क के जरिए अपने को ताक़तवर बना रहा है ये भारत के लिए तो चिंता वाली बात हो सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 15, 2021, 4:37 PM IST
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नई दिल्ली. भविष्य की लड़ाई सिर्फ तकनीक पर लड़ी जाएग. इसकी शुरुआत उस दिन से हो गई थी जब पहली बार मानवरहित ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था. अमेरिका ने तो अलक़ायदा और तालीबान जैसे आतंकी गुटों की कमर तकीनीक के सहारे तोड़ दी. हज़ारों किलोमीटर दूर बैठकर एक क्लिक पर पूरे आतंक का ख़ात्मा करने का काम किया और अब ड्रोन पर नए शोध करते-करते ऐसे हथियारों की खोज शुरू हो गई है की एक नेटवर्क में कई सारे ड्रोन को कनेक्ट कर के एक साथा हमाला बोला जा सके.

इस तकनीक को स्वारम कहा जाता है भारत भी इस तकनीक को विकसित कर रहा है, लेकिन हैरानी वाली बात तो ये है कि चीन तो हाइपरसोनिक मिसाइल जो कि एटमॉसफेयर के भीतर आवाज़ की गति से 5 गुना तेज चलते है. उन्हें नेटवर्क में जोड़कर एक स्मार्ट स्वारम बनाने में जुटा है. ये स्मार्ट स्वारम अकेले मिसाइल से ज्यादा ख़तरनाक है.

इन्हें पकड़ना होगा और मुश्किल

हालांकि ये हाइपरसोनिक मिसाइल बैलेस्टिक मिसाइल से तो रफ़्तार में धीमे है, लेकिन कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता के चलते इन्हें रडार या किसी और माध्यम से पकड़ पाना मुश्किल होगा. यही नहीं इन मिसाइलों के जरिए परमाणु हथियारों को भी दागा जा सकता है. बीजिंग इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी की एक नई स्टडी में इस स्मार्ट स्वारम का ज़िक्र है और चीनी वैज्ञानिक इसी तरह के स्मार्ट स्वारम पर काम कर रहे है. अमेरिका ने भी इसी तरह का एक प्रोग्राम साल 2017 में शुरू किया था, जिसका नाम दिया गया था MSET यानी मिसाइल मलेटीपल सिमुलटेनिस एंगेजमेंट टेक्नॉलॉजी.
कई मिसाइलों का एक साथ मिलाकर अलग-अलग टार्गेट

जिसमें कई मिसाइल को एक साथ मिलकर अलग-अलग टार्गेट को निशाना बनाया जा सकता है. जानकारों की मानें तो MSET कोई हाइपरसोनिक मिलाइल वाला कोई स्ट्रैटेजिक सिस्टम नहीं है, बल्कि ये एक छोटे स्तर का टैक्टिकल सिस्टम है. चीनी वैज्ञानिक इसी की तरह का स्वारम बनाने की तैयारी में है, लेकिन हाइपरसोनिक मिसाइलों के साथ.

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भारत भी तकनीक तौर पर अपने को भविष्य की लड़ाई के लिए तैयार कर रहा है. इसी साल थलसेना दिवस के समय भारतीय सेना ने एक स्वॉर्मिंग अटैक का नजारा पेश किया था, जिसमें 70 ड्रोन ने एक साथ मिलकर दुश्मन के ठिकाने को खत्म करने की ड्रिल दिखाई थी और भविष्य के युद्ध के लिए बेहद अहम बताया जा रहा है. एचएएल भी उसी तर्ज़ पर और भी आधुनिक व लंबी मार करने के लिए एक सिस्टम तैयार कर रहा है. इस सिस्टम का नाम है कैट्स यानी कॉम्बेट एयर टीम सिस्टम. पहली बार इसकी झलक बैंगलोर में एरोइंडिया में भी दिखाई दी थी. ये सिस्टम तीन अलग-अलग ड्रोन के साथ एक ही फाइटर से ऑपरेट किया जा सकता है.



पहला ड्रोन सिस्टम है कैट्स वॉरियर, दूसरा है कैट्स हंटर और तीसरा है कैट्स अल्फ़ा. हालांकि चीन जिस तरह से अपने तकनीक को बढ़ाने में जुटा है और वो हाइपरसोनिक मिसाइल के नेटवर्क के जरिए अपने को ताक़तवर बना रहा है ये भारत के लिए तो चिंता वाली बात हो सकती है.
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