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राफेल को काउंटर करने वाला रडार सिस्टम पाकिस्तान को देने से चीन का इनकार, ये हैं 3 कारण

पाकिस्तान सेना के चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा और प्रधानमंत्री इमरान खान ने राफेल को काउंटर करने के लिए चीन से अपग्रेडेड रडार प्रणाली और आधुनिक एयरक्राफ्ट की मांग की है.
पाकिस्तान सेना के चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा और प्रधानमंत्री इमरान खान ने राफेल को काउंटर करने के लिए चीन से अपग्रेडेड रडार प्रणाली और आधुनिक एयरक्राफ्ट की मांग की है.

पाकिस्तान सेना के चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा (General Qamar Javed Bajwa) और प्रधानमंत्री इमरान खान ने राफेल को काउंटर करने के लिए चीन से अपग्रेडेड रडार प्रणाली और आधुनिक एयरक्राफ्ट की मांग की है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 11, 2019, 5:36 PM IST
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नई दिल्ली. फ्रांसीसी राफेल लड़ाकू विमान (Rafale Fighter Jet) के भारत को मिलने के बाद से पाकिस्तान (Pakistan) का डर सामने आ रहा है. राफेल से परेशान पाकिस्तान ने अपने दोस्त चीन से उधार विमान मांगा. लेकिन चीन ने विमान को उधार देने से इनकार कर दिया. बावजूद इसके एक बार फिर पाकिस्तान ने चीन के सामने अपग्रेडेड रडार और एयरक्राफ्ट की मांग रखी है. इस बार भी चीन ने पाकिस्तान की मांग को मानने से इनकार कर दिया है.

पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा और प्रधानमंत्री इमरान खान ने राफेल को काउंटर करने के लिए चीन से अपग्रेडेड रडार प्रणाली और आधुनिक एयरक्राफ्ट की मांग की है. साथ ही पाकिस्तान को दिए गए JF-17 थंडर फाइटर जेट को भी अपग्रेड करने की बात रखी है. हालांकि चीन ने अपने सदाबहार दोस्त की इस मांग को पूरा करने से मना कर दिया है. चीन द्वारा पाकिस्तान की हालिया मांग को मानने से इनकार करने के तीन कारण हैं-

1.  चीन को लगता है कि पाकिस्तान खस्ताहाल अर्थव्यवस्था की वजह से कर्ज चुकाने में असमर्थ है. इसलिए दुनिया भर में चल रही मंदी के बीच पाकिस्तान को क्रेडिट पर हथियार बेचना फायदे का सौदा नही है. इसके अलावा चीन ने कश्मीर में आतंकियों के पास से मिल रहे चीनी ग्रेनेड और दूसरे चीनी हथियारों के बारे में भी इमरान और बाजवा से नाराजगी जताई है.



2. खुफिया सूत्रों के मुताबिक चीन ने कहा कि जो हथियार पाकिस्तान की सेना के लिए दिए जा गए थे, वो आतंकियों के हाथ में कैसे पहुंचे. चीन को लगता है कि चीनी हथियारों के आतंकियों के हाथ में पहुंचने से उसकी अंतर्राष्ट्रीय छवि खराब हो रही है. इसके साथ ये संदेश भी जा रहा है कि चीन कश्मीर में आतंकियों की मदद कर रहा है. लेकिन चीन की मजबूरी है कि वो पहले ही पाकिस्तान में काफी निवेश कर चुका है.
3. चीन अकेले पाकिस्तान इकनोमिक कॉरिडोर में 46 बिलियन डॉलर का निवेश कर चुका है. उसके इस प्रोजेक्ट में भी लगातार देरी होती जा रही है. इन सबके बावजूद भारत चीनी सामान के लिए एक बड़ा बाजार है. ऐसे में चीन भारत को नजरअंदाज नही कर सकता है. चीन के शिंजियांग प्रान्त में उइगर मुसलमानों को पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के समर्थन दिए जाने को लेकर भी चीन ने नाराजगी जताई.

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