संबंध बेहतर बनाने के लिए एस. जयशंकर के सुझावों की चीन ने की प्रशंसा

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दोनों देशों के संबंध बेहतर बनाने को कुछ सुझाव दिए हैं. (S Jaishankar)

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दोनों देशों के संबंध बेहतर बनाने को कुछ सुझाव दिए हैं. (S Jaishankar)

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान (Zhao Lijian) ने शुक्रवार को कहा-'हमने एस. जयशंकर के सुझाव का संज्ञान लिया है.' यह बात उन्होंने 13वीं ऑल इंडिया कॉन्फ्रेंस ऑफ चाइना स्टडीज को ऑनलाइन संबोधित करते हुए मीडिया द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में कही.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 29, 2021, 5:41 PM IST
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नई दिल्ली. चीन ने संबंध बेहतर बनाने के लिए भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) के सुझावों का स्वागत किया है. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान (Zhao Lijian) ने शुक्रवार को कहा, 'हमने एस. जयशंकर के सुझावों का संज्ञान लिया है. यह बात उन्होंने 13वीं ऑल इंडिया कॉन्फ्रेंस ऑफ चाइना स्टडीज को ऑन लाइन संबोधित करते हुए मीडिया द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में कही.

क्या बोले चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता

लिजियान ने कहा, 'उन्होंने (एस. जयशंकर) भारत-चीन संबंधों के महत्व पर जोर दिया है. ये दिखाता है कि चीन के साथ भारत अपने संबंधों को महत्व देता है. हम इस बात की प्रशंसा करते हैं. लेकिन हम कहना चाहेंगे कि सीमाई विवाद को संपूर्ण संबंधों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. इस महत्वपूर्ण बात का अनुभव हमने वर्षों में किया है. हम यह आशा करते हैं कि भारतीय पक्ष विवादों को सुलझाने में हमारे साथ मिलकर काम करेगा. प्रैक्टिकल कोऑपरेशन के साथ काम होगा जिससे द्विपक्षीय संबंधों में सुधार आ सके.'

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एस. जयशंकर ने आठ मूल मंत्र दिए

गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच संबंधों को दोबारा पटरी पर लाने के लिए एस. जयशंकर ने आठ मूल मंत्र दिए हैं. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि पूर्वी लद्दाख में बीते साल हुई घटनाओं के चलते भारत और चीन के द्विपक्षीय संबंध बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं. विदेश मंत्री ने चीन के साथ जारी सीमा गतिरोध से जुड़े सवाल के जवाब में कहा कि उन्होंने (लद्दाख में घटनाओं ने) न सिर्फ सैनिकों की संख्या को कम करने की प्रतिबद्धता का अनादर किया, बल्कि शांति भंग करने की इच्छा भी दर्शायी.

विदेश मंत्री ने कहा कि हमें चीन के रुख में बदलाव और सीमाई इलाकों में बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती पर अब भी कोई विश्वसनीय स्पष्टीकरण नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि हमारे सामने मुद्दा यह है कि चीन का रुख क्या संकेत देना चाहता है, ये कैसे आगे बढ़ता है और भविष्य के संबंधों के लिए इसके क्या निहितार्थ हैं.
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