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सीमा विवाद के बीच चीन ने बढ़ाई भारत की चिंता! ब्रह्मपुत्र नदी पर करने जा रहा है बांध की निर्माण

ब्रह्मपुत्र नदी भारत और बांग्लादेश से होकर गुजरती है.
ब्रह्मपुत्र नदी भारत और बांग्लादेश से होकर गुजरती है.

पावर कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन ऑफ चाइना के अध्यक्ष यांग जियोंग ने कहा कि कि चीन यारलुंग ज़ंग्बो नदी (ब्रह्मपुत्र का तिब्बती नाम) के निचले हिस्से में जलविद्युत उपयोग परियोजना शुरू करेगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 30, 2020, 5:26 AM IST
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बीजिंग. चीन (China), तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी (Brahmaputra River) पर एक प्रमुख बांध का निर्माण करेगा और अगले साल से लागू होने वाली 14वीं पंचवर्षीय योजना में इससे संबंधित प्रस्ताव पर विचार किया जा चुका है' चीन की आधिकारिक मीडिया ने बांध बनाने का जिम्मा प्राप्त कर चुकी एक चीनी कंपनी के प्रमुख के हवाले से यह जानकारी दी है' 'ग्लोबल टाइम्स' की खबर के अनुसार, पावर कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन ऑफ चाइना के अध्यक्ष यांग जियोंग ने कहा कि कि चीन यारलुंग ज़ंग्बो नदी (ब्रह्मपुत्र का तिब्बती नाम) के निचले हिस्से में जलविद्युत उपयोग परियोजना शुरू करेगा और यह परियोजना जल संसाधनों और घरेलू सुरक्षा को मजबूत करने में मददगार हो सकती है'

'ग्लोबल टाइम्स' ने रविवार को 'कम्युनिस्ट यूथ लीग ऑफ चाइना' की केन्द्रीय समिति के वी-चैट अकाउंट पर डाले गए एक लेख का हवाला देते हुए जानकारी दी कि यांग ने कहा है कि सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) देश की 14वीं पंचवर्षीय योजना (2021-25) तैयार करने के प्रस्तावों में इस परियोजना को शामिल करने और 2035 तक इसके जरिये दीर्घकालिक लक्ष्य हासिल करने पर विचार कर चुकी है'

भारत और बांग्लादेश से होकर गुजरती है ब्रह्मपुत्र नदी
इस योजना के बारे में विस्तृत जानकारी अगले साल नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) द्वारा औपचारिक अनुसमर्थन किये जाने के बाद सामने आने की उम्मीद है' ब्रह्मपुत्र नदी भारत और बांग्लादेश से होकर गुजरती है' ऐसे में बांध निर्माण के प्रस्ताव से दोनों देशों की चिंताएं बढ़ गई हैं' हालांकि चीन ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए कहा है कि वह उनके हितों को भी ध्यान में रखेगा'
भारत सरकार नियमित रूप से अपने विचारों और चिंताओं से चीनी अधिकारियों को अवगत कराती रही है और भारत ने चीन से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि नदी के ऊपरी हिस्सों में होने वाली गतिविधियों से निचली हिस्से से जुड़े देशों के हितों को नुकसान न हो.'
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