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    आक्रामकता दिखाकर अब 'स्वीट डील' करना चाहता चीन लेकिन भारत झुकेगा नहीं

    लद्दाख में कई महीने से भारत और चीन की सेनाएं आमने-सामने हैं. (फाइल फोटो)
    लद्दाख में कई महीने से भारत और चीन की सेनाएं आमने-सामने हैं. (फाइल फोटो)

    दिल्ली की तरफ से साफ किया जा चुका है कि सेनाएं पहले चीन (China Troops) की तरफ से हटाई जाएंगी क्योंकि आक्रामकता की शुरुआत भी उसी की तरफ से की गई.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 30, 2020, 6:15 PM IST
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    नई दिल्ली. अप्रैल महीने में भारत और चीन के बीच शुरू हुआ सीमा विवाद (India-China Border Dispute) अब भी जारी है. दोनों तरफ के राजनयिकों (Diplomats) से लेकर सैन्य कमांडरों (Military Commanders) और विदेश मंत्रियों (Foreign Ministers) के बीच बातचीत हो चुकी है. कुछ ही दिन पहले सैन्य कमांडर स्तर लेवल की सातवें दौर की वार्ता खत्म हुई. दोनों देशों ने माना कि हम बातचीत के जरिए मसला सुलझाने को प्रतिबद्ध हैं. अब दोनों देशों में 8वें दौर की वार्ता का इंतजार किया जा रहा है. माना जा रहा है कि ये नवंबर के पहले सप्ताह में हो सकती है. लेकिन इतनी लंबी बातचीत के बाद भी मसला सुलझता क्यों नहीं दिख रहा है?

    कई दौर की हो चुकी है वार्ता
    दरअसल अप्रैल-मई महीने में जब चीन की तरफ से लद्दाख बॉर्डर पर अतिक्रमण की घटना हुई तो भारत ने विरोध दर्ज कराया. लेकिन जून महीने के मध्य में गलवान घाटी की घटना में अपने 20 सैनिकों की शहादत के बाद भारत ने इस विवाद को लेकर बेहद सख्त रुख अख्तियार किया.

    हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक हर बातचीत में भारत की तरफ से साफ किया गया कि आक्रामकता की शुरुआत चीन की तरफ से की गई. पहले फिंगर 4, गलवान वैली और फिर गोगरा हॉट स्प्रिंग इलाकों में. फिर भारतीय सेना ने पैंगोंग इलाके में अगस्त के आखिरी में जवाब दिया. अब दिल्ली की तरफ से साफ किया जा चुका है कि सेनाएं पहले चीन की तरफ से हटाई जाएंगी क्योंकि आक्रामकता की शुरुआत भी उसी की तरफ से की गई.
    वास्तविक नियंत्रण रेखा के दावे को भी नकारा


    इस बीच भारत ने चीन के वास्तविक नियंत्रण रेखा के दावे को भी नकारा. भारत ने साफ कर दिया कि 1959 में एकतरफा रूप से निर्धारित की गई वास्तविक नियंत्रण रेखा को नहीं मानता. भारत ने देश की अखंडता और संप्रभुता का हवाला देते हुए 200 से ज्यादा चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया.



    भारत ने अख्तियार किया बेहद सख्त रुख
    भारत की तरफ से इमरजेंसी फंड जारी कर हथियार मंगाए गए साथ ही राफेल विमान भी भारत लाए गए. एक्सपर्ट्स का ये भी मानना है कि भारत ने अपनी सीमाओं की संप्रभुता के लेकर बिल्कुल असाधारण स्टैंड लिया जो पहले से बिल्कुल अलग है. अब अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच चीन भी चाहता है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा से सेनाएं वापस की जाएं. दरअसल सीमाओं पर अतिक्रमण का आदी रहा चीन भी इस बार लंबे संघर्ष में फंस गया है. अब सीमा विवाद से धीरे से किनारा करने की कोशिश है. लेकिन भारत साफ कर चुका है कि आक्रामकता की शुरुआत चीन की ओर से हुई थी तो सेनाएं हटाने का काम भी पहले वही करेगा.
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