अंतरिक्ष में भी चीन भारत को बना रहा था निशाना, सामने आई ये बड़ी बात

लद्दाख में भारत और चीन के बीच तनाव की स्थिति है.
लद्दाख में भारत और चीन के बीच तनाव की स्थिति है.

सामने आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन (China) भारतीय सैटेलाइट कम्‍यूनिकेशंस पर 2012 से लेकर 2018 के बीच कई बार साइबर अटैक (Cyber attack) कर चुका है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 23, 2020, 3:12 PM IST
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नई दिल्‍ली. धरती और पानी के अलावा चीन (China) अंतरिक्ष (Space) में भी भारत पर हमले का प्रयास कर रहा था. सामने आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन भारतीय सैटेलाइट कम्‍यूनिकेशंस पर 2012 से लेकर 2018 के बीच कई बार साइबर अटैक (Cyber attack) कर चुका है. हालांकि इस पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने किसी भी प्रणाली में समझौते या खतरे से इनकार किया है.

टाइम्स ऑफ इंडिया ने अमेरिका स्थित चाइना एयरोस्पेस स्टडीज इंस्टीट्यूट (CASI) की 142 पन्नों की एक रिपोर्ट के हवाले से बताया कि 2012 के हमलों के नतीजों में से यह एक है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL) पर एक चीनी नेटवर्क आधारित कंप्यूटर हमला हुआ था. इस साइबर अटैक में JPL नेटवर्क पर फुल फंक्‍शनल कंट्रोल का प्रयास हो रहा था. इनमें से कुछ हमलों को सूचीबद्ध करते हुए रिपोर्ट कई स्रोतों के बारे में बताती है.

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि भारत ने अपनी काउंटर-स्पेस क्षमताओं के हिस्से के रूप में, 27 मार्च, 2019 को एंटी-सैटेलाइट (A-Sat) मिसाइल तकनीक का प्रदर्शन किया, जिसने भारत को दुश्मन के उपग्रहों को नष्ट करने के लिए 'काइनेटिक किल' विकल्प से लैस किया. लेकिन CASI की रिपोर्ट बताती है कि चीन के पास कई अन्य काउंटर-स्पेस तकनीक हैं, जो जमीन से जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट (GEO) के लिए प्रतिकूल अंतरिक्ष प्रणालियों के लिए खतरा साबित हो सकती हैं. इनमें डायरेक्ट-एसेंट कैनेटिक-किल व्हीकल (एंटी-सैटेलाइट मिसाइल), को-ऑर्बिटल सैटेलाइट, डायरेक्ट-एनर्जी वीपंस, जैमर और साइबर क्षमताएं शामिल हैं.



CASI एक थिंक-टैंक है, जिसे अमेरिकी वायु सेना के कर्मचारियों के प्रमुख, अंतरिक्ष अभियानों के अमेरिकी प्रमुख और अन्य वरिष्ठ वायु और अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े नेताओं का समर्थन है. यह अमेरिकी रक्षा विभाग और अमेरिकी सरकार में एक्‍सपर्ट रिसर्च और विश्लेषण सहायक निर्णय व नीति निर्धारण प्रदान करता है.

कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस द्वारा जारी की गई 2019 की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के पास ग्राउंड, एयर और स्पेस बेस्ड रेडियो फ्रिक्वेंसी जैमर हैं, जो स्पेस सिस्टम या डेटा ट्रांसमिशन के कंट्रोल में शामिल अपलिंक, डाउनलिंक और क्रॉसलिंक्स को निशाना बनाते हैं.
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