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सागर में चीन को मिलेगा करारा जवाब, जल्द भारतीय नौसेना में शामिल होगा स्वदेशी कैरियर एयरक्राफ्ट

इस एयरक्राफ़्ट कैरियर कुल 14 डेक होंगे और 2300 कंपार्टमैंट होंगे जो कि कुल 1700 नाविकों के रहने के लिए पर्याप्त हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर; Shutterstock)

इस एयरक्राफ़्ट कैरियर कुल 14 डेक होंगे और 2300 कंपार्टमैंट होंगे जो कि कुल 1700 नाविकों के रहने के लिए पर्याप्त हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर; Shutterstock)

आईएसी विक्रांत अपने पहले समुद्री परिक्षण पर निकल गया. इससे पहले पिछले साल ही कोच्चि शिपिंग यार्ड में इस एयरक्राफ़्ट कैरियर हार्बर ट्रायल और बेसिन ट्रायल को पूरा कर लिया गया था यानी की समुद्री ट्रायल से पहले शिप में लगे सारे उपकरण की जांच की जाती है कि वो सही तरह से काम कर रहे है या नहीं.

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नई दिल्ली. हिंद महासागर में चीन की बढ़ती दखलअंदाजी पर लगाम लगाने के लिए भारत ठोस कदम उठाने जा रहा है. जल्द ही भारतीय स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर नौसेना में शामिल होने जा रहा है. पाकिस्तान से निपटने के लिए अरब सागर में भारतीय नौसेना के कैरियर बैटल ग्रुप तो तैनात है, लेकिन बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के इलाके पर अपनी ताकत को बरकरार रखने के लिए जल्द एक और कैरियर बैटल ग्रुप तैनात होगा. स्वदेशी विमान वाहक IAC(P71) ‘विक्रांत’ के समुद्री परीक्षणों की शुरुआत भी जा चुकी है.

बुधवार को आईएसी विक्रांत अपने पहले समुद्री परिक्षण पर निकल गया. इससे पहले पिछले साल ही कोच्चि शिपिंग यार्ड में इस एयरक्राफ़्ट कैरियर हार्बर ट्रायल और बेसिन ट्रायल को पूरा कर लिया गया था यानी की समुद्री ट्रायल से पहले शिप में लगे सारे उपकरण की जांच की जाती है कि वो सही तरह से काम कर रहे है या नहीं. कोरोना के चलते इसके समुद्री ट्रायल में थोड़ी देरी जरूर हुई. स्वदेशी विमानवाहक पोत का नाम भारतीय नौसेना से रिटायर हो चुके एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत के नाम पर दिया जाएगा. इस एयरक्राफ़्ट कैरियर की खूबी की बात करें तो इसकी कुल लंबाई 262 मीटर है जिसके निर्माण का काम फरवरी 2009 में कोचीन शिपयार्ड में शुरू हुआ था.

76 प्रतिशत स्वदेगी कंटेंट से तैयार होगा कैरियर
इस एयरक्राफ़्ट कैरियर कुल 14 डेक होंगे और 2300 कंपार्टमेंट होंगे जो कि कुल 1700 नाविकों के रहने के लिए पर्याप्त हैं. इस कैरियर की अधिकतम रफ़्तार 28 नॉटिकल माल प्रति घंटा है और क़रीब 76 प्रतिशत इसमें स्वदेशी कंटेंट है. इस कैरियर में 26 फाइटर एयरक्राफ्ट और 10 हेलीकॉप्टर रखे जा सकते हैं. भारतीय नौसेना के पास फिलहाल मिग-29 K ही ऐसे फाइटर हैं जो कि एयरक्राफ़्ट कैरियर से उड़ान भर सकते हैं. इसके अलावा स्वदेश तेजस के नेवी वर्जन को भी इसके लिए तैयार किया जा रहा है. हेलीकॉप्टरों की बात करें तो अमेरिका से लिए जाने वाले रोमियो हेलीकॉप्टर के अलावा सी किंग और स्वदेशी एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर ध्रुव भी इस कैरियर पर तैनात किए जा सकते है.

उम्मीद की जा रही है कि 2023 तक ये भारतीय वायुसेना में शामिल हो जाएगा. फिलहाल भारतीय नौसेना के पास एक एयरक्राफ़्ट कैरियर आईएनएस विक्रामादित्य है जो कि 2014 में भारतीय नौसेना मे शामिल किया गया है और ये पश्चिमी समुद्र तट पर कारवार में तैनात हैं जबकि भारत को एक और एयरक्राफ़्ट कैरियर की जरूरत है जिसे पूर्वी समुद्र तट पर विशाखापट्टनम में रखा जा सके. चूंकि भारत को कम से कम तीन एयरक्राफ़्ट कैरियर की जरूरत है क्योंकि जब भी एक कैरियर रिपेयर के लिए गया हो तो कम से कम दो एयरक्राफ़्ट कैरियर अपनी सेवाए दे रहे हों. पिछले दिनों ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत के पहले स्वदेशी विमान वाहक पोत IAC-1 के निर्माण की प्रगति की समीक्षा की थी.

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने स्वदेशी विमान वाहक विक्रांत को नौसेना के आत्मनिर्भरता प्रयासों का ज़बरदस्त उदाहरण बताया है. इस एयरक्राफ़्ट कैरियर के नौसेना में शामिल होने के बाद भारत दुनिया के कुछ चुनिन्दा देशों में शामिल हो जाएगा जिनके पास एयरक्रफ्ट कैरियर बनाने की तकनीक है.

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