'अनुच्छेद 370 हटाने से चीन का परेशान होना गलत, चीनी बॉर्डर पर नहीं होगा कोई असर'

चीन (China) में भारत के राजदूत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 (Article 370) के अधिकतर प्रावधानों को हटाने पर चीन की चिंता अनुचित है और इसका वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

भाषा
Updated: August 28, 2019, 6:00 PM IST
'अनुच्छेद 370 हटाने से चीन का परेशान होना गलत, चीनी बॉर्डर पर नहीं होगा कोई असर'
चीन में भारतीय राजदूत विक्रम मिस्त्री ने कहा है कि कश्मीर को लेकर चीन का परेशान होना गलत है (राजदूत विक्रम मिस्त्री- फाइल फोटो)
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Updated: August 28, 2019, 6:00 PM IST
चीन (China) में भारत के राजदूत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 (Article 370) के अधिकतर प्रावधानों को हटाने पर चीन की चिंता अनुचित है और इसका वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

भारत सरकार (Indian Government) द्वारा गत पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान हटाए जाने के बाद अपने पहले संवाददाता सम्मेलन में भारतीय राजदूत विक्रम मिस्री ने मंगलवार को भारत के इस रुख को दोहराया कि संविधान संशोधन (Constitution Amendment) पूरी तरह से आंतरिक मामला है और यह पूरी तरह भारत का विशेषाधिकार है.

नहीं होगा चीन की नियंत्रण रेखा पर कोई असर
राजदूत ने यह भी रेखांकित किया कि संबंधित बदलाव आंतरिक प्रशासनिक पुनर्गठन है और इसका कोई ‘‘बाह्य’’ असर नहीं होगा तथा यह जम्मू-कश्मीर के लोगों को सुशासन और सामाजिक-आर्थिक न्याय (Socio-Economic Justice) उपलब्ध कराने तथा उन्हें भारत के अन्य हिस्सों के लोगों की तरह ही समान अधिकार प्रदान करने पर केंद्रित है.

उन्होंने कहा, ‘‘इसका न तो भारत की बाह्य सीमाओं और न ही चीन से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर कोई असर होगा.’’ राजदूत ने कहा कि भारत कोई अतिरिक्त क्षेत्रीय दावा नहीं कर रहा है और इसलिए ‘‘इस संबंध में चीन की चिंताएं अनुचित हैं.’’

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर चीन ने जारी किए थे अलग-अलग बयान
जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को हटाने तथा राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों ‘जम्मू-कश्मीर और लद्दाख’ में बांटने के भारत के फैसले के बाद चीन ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए दो अलग-अलग बयान जारी किए थे.
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चीन के विदेश मंत्रालय ने अपने पहले बयान में लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश (Union Territory) बनाए जाने पर आपत्ति व्यक्त की थी और क्षेत्र पर अपना दावा किया था. वहीं, जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा हटाए जाने पर इसने कहा था कि चीन कश्मीर में वर्तमान स्थिति को लेकर ‘‘काफी चिंतित’’ है और ‘‘संबंधित पक्षों’’ को संयम बरतना चाहिए तथा बुद्धिमानी से काम लेना चाहिए.

भारत और सीमा विवाद के निपटारे के लिए कर चुके हैं 21 दौर की बात
भारतीय राजदूत विक्रम मिस्री ने कहा, ‘‘जहां तक भारत-चीन सीमा का सवाल है तो दोनों पक्ष 2005 में राजनीतिक मानकों और निर्देशक सिद्धांतों के आधार पर मुद्दे के एक उचित, तार्किक और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान पर सहमत हुए थे.’’

उन्होंने कहा कि सीमा मुद्दे पर भारत का रुख हाल में विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar) ने अपनी बीजिंग यात्रा के दौरान व्यक्त कर दिया था. भारत और चीन 3,488 किलोमीटर लंबी एलएसी पर मतभेदों के समाधान के लिए अब तक 21 दौर की बात कर चुके हैं.

भारत ने किया साफ, कश्मीर भारत-पाक का द्विपक्षीय मुद्दा
भारतीय राजदूत विक्रम मिस्री ने हाल में फ्रांस में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) द्वारा स्पष्ट किए गए इस रुख को भी रेखांकित किया, ‘‘भारत और पाकिस्तान (Pakistan) के बीच मुद्दे पूरी तरह द्विपक्षीय हैं, न कि अंतरराष्ट्रीय प्रकृति के.’’ उन्होंने चीनी मीडिया से कहा, ‘‘हाल में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हुई अनौपचारिक चर्चा में भी संकेत दिया गया कि भारत-पाकिस्तान के बीच मुद्दे द्विपक्षीय हैं और इनका समाधान द्विपक्षीय तरीके से ही हो सकता है.’’

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान के करीबी सहयोगी चीन के आग्रह पर ही सुरक्षा परिषद में जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर बंद कमरे में चर्चा हुई थी.

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First published: August 28, 2019, 5:06 PM IST
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