गलवान, गोगरा, हॉटस्प्रिंग इलाकों से पीछे हटी चीनी सेना, पैंगोंग में कम हुई संख्या

गलवान, गोगरा, हॉटस्प्रिंग इलाकों से पीछे हटी चीनी सेना, पैंगोंग में कम हुई संख्या
पूर्वी लद्दाख के कई इलाकों से चीनी सेनाएं पीछे हट गई हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

INDIA-CHINA FACEOFF: लद्दाख के गलवान (Galwan), गोगरा (Gogra) और हॉटस्प्रिंग (Hot Spring) इलाके से चीन ने अपनी सेनाएं पीछे कर ली हैं. पैंगोंग लेक के इलाके में भी चीनी सैनिकों की संख्या कम हुई है. लेकिन भारत के सामने अभी सबसे बड़े चुनौती चीन को फिंगर 8 के पीछे लेकर जाना है, जहां उसकी सेनाएं अप्रैल के पहले तक थीं.

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नई दिल्ली. भारत-चीन (India-China) के बीच वास्तविक निंयत्रण रेखा (LAC) पर तनाव अब लगातार कम होता जा रहा है. दोनों देशों के बीच कमांडर स्तर की बातचीत के दौरान बनी सहमति जमीन पर कुछ इलाकों में दिखाई देने भी लगी है लेकिन चीन अब भी LAC पर अपने लाव-लश्कर के साथ मौजूद है. हालांकि चीनी सेनाएं थोड़ी पीछे जरूर हुई हैं लेकिन पूरी तरह से पीछे नहीं हटी हैं.

चरणबद्ध तरीके से पीछे की जा रही हैं सेनाएं
चरणबद्ध तरीके से सेना को पीछे हटाने की कार्रवाई का पहला चरण गलवान, गोगरा और हॉटस्प्रिंग इलाके से पूरा हो चुका है. हालांकि सेना की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. सेना के सूत्रों की मानें तो चीन की सेना LAC से डेढ़ से दो किलोमीटर तक पीछे हटी है. पहले भारतीय सेना ने इसकी पुष्टि की और उसके बाद ही अपनी सेना को वहां से पीछे किया.

चीन की हर हरकत पर भारतीय सेना की नजर
फिलहाल LAC से लेकर जितनी दूर दोनों सेना पीछे गई हैं, उस इलाके को बफर जोन बनाया गया है. इस इलाके में तय समय तक कोई भी सेना नहीं आएगी. वहीं चीन की हर हरकत पर भारतीय सेना ने अपनी पैनी नजर बनाई हुई है और लगातार इस बात को मॉनिटर कर रही है कि चीन आखिर और क्या हरकत कर सकता है. मसलन गलवान इलाके में चीन की तरफ से जो रास्ता बनाया गया है वो अभी पत्थरों वाला कच्चा रास्ता है और अगर इस रास्ते को वो पक्का करता है तो समझा जाएगा कि वो लंबे समय के लिए वहां डटने आया है.



पैंगोंग में कम हुई संख्या
साथ ही चीन ने डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया को पैंगोंग पर भी आंशिक रूप से शुरू किया है. कुछ सेना को कम कर फिंगर 4 से फिंगर 5 तक ले गए हैं लेकिन चीन को फिंगर 8 के पीछे सिरजाप प्लेन तक भेजना है, जहां वो अप्रैल में था. भारत के लिए ये सबसे चुनौती वाला काम होगा. फिलहाल पहले चरण की लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी. क्योंकि चीन पर भरोसा करना अब आसान नहीं होगा.

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क्या होगा दूसरा स्टेप, भारत के सामने क्या चुनौती?
दूसरे स्टेप के लिेए बाकायदा दोनों देशों के कमांडर स्तर की आने वाले दिनों में बातचीत भी होगी. खुद चीन के विदेश मंत्री ने इस बात की जानकारी दी है. दरअसल देपसांग प्लेन सहित कई इलाके में चीन की तरफ से भारी संख्या में आर्म्ड व्हीकल, टैंक, आर्टिलरी और रॉकेट फोर्स की भी तैनाती है. उसे कम करना इस डिसेएजमेंट के दूसरे चरण के तौर पर देखा जा रहा है. यानी डीएस्किलेशन. सूत्रों की मानें तो चीन डिसएंगेजमेंट के लिए तो राजी है लेकिन डीएस्किलेशन को वो कतई तैयार नही.
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