लद्दाख में पीछे हटी चीनी सेना, गलवान से तंबू हटाए, सैनिकों की संख्या भी हुई कम

लद्दाख में पीछे हटी चीनी सेना, गलवान से तंबू हटाए, सैनिकों की संख्या भी हुई कम
साल 2017 में चीन सीमा पर भारतीय सैनिकों द्वारा लगाए गए बैनर की फाइल फोटो (AP Photo/Manish Swarup, File)

India ChinaBorder Rift: लद्दाख स्थित वास्तविक नियंत्रण रेखा पर (LAC) तनाव कम होने के पहले संकेत के रूप में चीनी सेना ने सोमवार को पूर्वी लद्दाख में कुछ इलाकों से अपनी सीमित वापसी शुरू कर दी.

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नई दिल्ली. पूर्वी लद्दाख (East Ladakh) में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत और चीन के बीच तनातनी के बीच दोनों देशों के सैनिक अब पीछे हट रहे हैं. सूत्रों ने जानकारी दी कि चीन के सैनिक गलवान नदी घाटी (Galwan Valley) में कम से कम एक किलोमीटर पीछे हट गए हैं. खबर है कि 15 जून को झड़प वाली जगह से चीनी सैनिक 2 किलोमीटर पीछे चले गए हैं. इसके साथ ही भारतीय सैनिक भी उस जगह से पीछे हट गए हैं और दोनों सेनाओं ने अपने बीच एक बफर जोन बना लिया है.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चीनी सैनिकों ने गलवान नदी के मोड़ से हटना शुरू कर दिया है. इस इलाके में लगाए गए टेंट और अस्थायी ढांचों को भी हटा दिया गया है. चीनी सैनिकों के पीछे हटने पर एक सूत्र ने कहा कि 'अभी यह देखना बाकी है कि क्या मौजूदा प्रक्रिया वास्तविक और स्थायी है या नहीं.'

सूत्रों का दावा है कि दोनों ओर से सैनिकों और अस्थायी ढांचों के हटाए जाने का फिजिकल कंफर्मेशन फिलहाल नहीं हुआ है. इसके 14 जुलाई तक पूरा होने की संभावना है. सूत्रों ने कहा गलवान घाटी में भारतीय क्षेत्र पर अब चीनी सैनिक नहीं हैं. जानकारी दी कि चीनी सैनिकों द्वारा बनाए गए अस्थायी ढांचे हटाए गए हैं. नदी के मोड़ पर चीनी सैनिकों द्वारा अवैध तरीके से कब्जा की गई जमीन से भी वे पीछे हट रहे हैं.



गोग्रा हॉट स्प्रिंग में भी चीनी सैनिक और वाहन पीछे हटते दिखाई दिए
वहीं सरकारी सूत्रों ने कहा कि चीनी सैनिकों ने सोमवार को गलवान घाटी से अपने तंबुओं को हटा लिया और वे गलवान घाटी में गश्ती बिंदु ‘प्वाइंट 14’ के आसपास से 1.5 किलोमीटर तक पीछे चले गए हैं. उन्होंने कहा कि गोग्रा हॉट स्प्रिंग में भी चीनी सैनिक और वाहन पीछे हटते दिखाई दिए.

खबरें ये भी हैं कि चीनी सैनिकों ने पैंगोंग सो में ‘फिंगर 4’ के आसपास से भी कुछ तंबू हटा लिए हैं. हालांकि, सूत्रों ने कहा कि स्पष्ट तस्वीर इसकी गहरी पड़ताल के बाद ही सामने आएगी.

फैसले के अनुसार हो रहा डिएस्केलेशन
सूत्रों ने कहा कि सैनिकों के पीछे हटने की कवायद 30 जून को सैन्य स्तर की वार्ता में हुए निर्णय के मुताबिक हो रही है जिसमें इस बात पर भी सहमति बनी थी कि दोनों पक्ष गलवान नदी के आसपास कम से कम तीन किलोमीटर के क्षेत्र में एक बफर जोन बनाएंगे और भारतीय सैनिक भी उसी के अनुसार चल रहे हैं.

बता दें दोनों देशों के बीच यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शुक्रवार को लद्दाख दौरे के बाद सामने आया. वहां उन्होंने सैनिकों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा था कि विस्तारवाद के दिन अब लद गए हैं. इतिहास गवाह है कि ‘विस्तारवादी’ ताकतें मिट गई हैं. उनके इस संबोधन को चीन के लिए यह स्पष्ट संदेश माना गया था कि भारत पीछे नहीं हटने वाला है और वह स्थिति से सख्ती से निपटेगा. (भाषा इनपुट के साथ)
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