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अमेरिकी कंपनी का दावा- चीनी हैकरों के निशाने पर भारतीय बंदरगाह, एक्टिव है कनेक्शन

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय के प्रवक्ता ने मामले पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. फाइल फोटो

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय के प्रवक्ता ने मामले पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. फाइल फोटो

Chinese Hackers Indian Port: रिकॉर्डेड फ्यूचर के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर स्टुअर्ट सोलोमन ने कहा कि मंगलवार तक हम एक 'हैंडशेक' का निशान देख रहे थे, मतलब चीन से जुड़े हैकरों के ग्रुप और भारतीय मैरिटाइम पोर्ट के बीच ट्रैफिक का आदान प्रदान हुआ है.

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नई दिल्ली. पूर्वी लद्दाख में घुटने टेकने के बाद चीन (China) ने भारत के खिलाफ 'साइबर वार' छेड़ा हुआ है, और इसका सबूत दिया है अमेरिकी कंपनी रिकॉर्डेड फ्यूचर (Recorded Future) ने, जो राज्य प्रायोजित हैकरों की अवैध गतिविधियों पर निगाह रखती है. कंपनी ने कहा है कि एक भारतीय बंदरगाह के नेटवर्क सिस्टम में चीन द्वारा प्रायोजित हैकरों ने जो कनेक्शन खोला है, वह अभी भी एक्टिव है. बावजूद इसके कि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा दक्षिण एशियाई देशों के इलेक्ट्रिक सेक्टर में हैकरों के सेंध लगाने की कोशिश को ब्लॉक कर दिया गया है. अमेरिकी कंपनी ने इस बारे में अधिकारियों को अलर्ट भी किया है. रिकॉर्डेड फ्यूचर के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर स्टुअर्ट सोलोमन (Stuart Solomon) ने कहा कि मंगलवार तक हम एक 'हैंडशेक' का निशान देख रहे थे, इसका मतलब है कि चीन से जुड़े हैकरों के ग्रुप और भारतीय मैरिटाइम पोर्ट के बीच ट्रैफिक का आदान प्रदान हुआ है.

'28 फरवरी तक एक्टिव थे कनेक्शन'
रिकॉर्डेड फ्यूचर ने चीनी हैकरों के समूह को रेडएको नाम दिया है और कहा है कि 10 फरवरी को भारत के कंप्यूटर इमरजेंसी रेस्पांस टीम को सूचित किए जाने तक रेडएको हैकरों ने भारतीय पावर ग्रिड से जुड़े कम से कम 10 प्रतिष्ठानों और दो मैरिटाइम पोर्ट को टारगेट किया है. सोलोमन ने कहा कि भारतीय प्रतिष्ठानों और हैकरों के बीच 28 फरवरी तक ये कनेक्शन एक्टिव थे. पोर्ट के संदर्भ में सोलोमन ने कहा कि ये अभी भी सक्रिय है. भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय के प्रवक्ता ने मामले पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. वहीं, बुधवार को चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा कि बिना किसी सबूत के किसी एक पक्ष पर आरोप लगाना गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार है.

मुंबई में कई घंटों तक गुम रही बिजली
रिकॉर्डेड फ्यूचर के मुताबिक 2020 के मध्य से ही भारत के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर पर चीनी हैकर लगातार हमले कर रहे हैं. कंपनी के मुताबिक पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन की सेनाओं के बीच तनाव के समय से ही ये साइबर हमले हो रहे हैं. बता दें कि पिछले साल मुंबई में पावर ग्रिड के बंद होने के मामले में केंद्र और राज्य सरकार लगातार इस बात पर मंथन कर रही हैं कि क्या साइबर अटैक की वजह से ऐसा हुआ. पावर ग्रिड बंद होने के चलते मुंबई में कई घंटों तक बिजली गुल रही और इसके चलते स्टॉक मार्केट, ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और हजारों घरों में काम ठप रहा.



अमेरिका के बोस्टन स्थित रिकॉर्डेड फ्यूचर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सरकार प्रायोजित हैकरों की संदिग्ध गतिविधियों को ट्रैक करती है, कंपनी ने मुंबई पावर ग्रिड केस और चीनी हैकरों के समूह रेडएको के बीच कोई कनेक्शन नहीं पाया है, लेकिन सोलोमन ने कहा कि ऐसी तकनीक का प्रयोग किया जाना कोई बड़ी बात नहीं है. वैश्विक स्तर पर सरकारें अपनी ताकत का प्रदर्शन करने के लिए इनका इस्तेमाल करती हैं. उन्होंने कहा कि ये बहुत सरल है, जिसका प्रयोग सरकारें यह दिखाने के लिए करती हैं कि हम ऐसा कर सकते हैं, हमारे पास क्षमता है.

भारत सरकार ने माना- मालवेयर मिला
भारत सरकार के अधिकारियों ने साइबर अटैक की बात से इनकार किया है, लेकिन ये स्वीकार किया है कि मालवेयर पाया गया है. नेशनल क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन सेंटर ने 12 फरवरी को रेडएको से खतरे को भांपते हुए सेंट्रल पावर सिस्टम ऑपरेशन कॉरपोरेशन को मेल किया था. बिजली मंत्रालय ने मंगलवार को इस बारे में एक बयान जारी कर जानकारी दी. बयान में कहा गया कि डिस्पैच केंद्र के कर्मचारियों ने कंट्रोल फंक्शन को बंद कर सर्किट ब्रेकर्स को रिमोट पर ले लिया. साथ ही यूजर नेम और पासवर्ड चेंज किया और संवेदनशील उपकरणों को आइसोलेट कर दिया गया. मुंबई स्थित महाराष्ट्र सरकार के जांचकर्ता बुधवार की शाम तक अपनी रिपोर्ट स्थानीय मंत्री को सौंपेंगे.

महाराष्ट्र सरकार के गृहमंत्री ने सोमवार को अपनी ब्रीफ्रिंग में कहा कि 12 अक्टूबर को मुंबई में बड़े पैमाने पर बिजली गुल होने के मामले में प्राथमिक रिपोर्ट के मुताबिक 12 ट्रोजन हॉर्स का संदिग्ध कोड और 8 गीगाबाइट अज्ञात डेटा इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के मुख्य सर्किट में भेजा गया है. उन्होंने कहा कि ब्लैक लिस्ट आईपी एड्रेस से बोर्ड के सर्वर में लॉग इन करने की कोशिश हुई है.

हालांकि उन्होंने इसके लिए किसी देश या प्रतिष्ठान का नाम नहीं लिया.
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