CIC ने सरकार को अनिल गोस्वामी के इस्तीफे से जुड़ी जानकारी न देने की इजाजत दी

पूर्व मंत्री की सीबीआई द्वारा गिरफ्तारी के मामले में बाधा डालने के आरोपों के बाद गोस्वामी से इस्तीफा देने को कहा गया था. (File Photo)
पूर्व मंत्री की सीबीआई द्वारा गिरफ्तारी के मामले में बाधा डालने के आरोपों के बाद गोस्वामी से इस्तीफा देने को कहा गया था. (File Photo)

Central Information Commission: सीबीआई द्वारा एक पूर्व केंद्रीय मंत्री को गिरफ्तार किये जाने में कथित तौर पर बाधा खड़ी करने पर गोस्वामी से फरवरी 2015 में जबरन इस्तीफा लिया गया था.

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  • Last Updated: November 8, 2020, 5:06 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्रीय सूचना आयोग (Central Information Commission) ने कैबिनेट सचिवालय (Cabinet Secretary) को पूर्व केंद्रीय गृह सचिव अनिल गोस्वामी (Anil Goswami) के इस्तीफे से संबंधित विचार-विमर्श और फाइल नोट सार्वजनिक न करने की इजाजत दे दी है. एक पूर्व मंत्री की सीबीआई (CBI) द्वारा गिरफ्तारी के मामले में बाधा डालने के आरोपों के बाद गोस्वामी से इस्तीफा देने को कहा गया था. सीआईसी का यह फैसला एक अन्य मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) के फैसले पर आधारित है, जिसमें उसने कहा था कि अधिकारियों के एक समूह या अनुशासनात्मक प्राधिकार की चर्चा या फाइल नोटिंग को उजागर नहीं किया जा सकता. अदालत ने हालांकि किसी अधिकारी के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में मांगी गई जानकारी आवेदक को उपलब्ध कराने की इजाजत दी थी.

मुख्य सूचना आयुक्त वाई के सिन्हा ने मांगी गई जानकारी को रोकने के अपने फैसले के पीछे उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के एक आदेश को भी उद्धृत किया, जिसने कहा था, “पेशेवर रिकॉर्ड्स जैसे योग्यता, प्रदर्शन, आकलन रिपोर्ट, एसीआर, अनुशासनिक कार्यवाही आदि, व्यक्तिगत जानकारी हैं…ऐसी निजी जानकारी निजता में अनावश्यक दखल से संरक्षण की हकदार है और जब व्यापक जनहित संतुष्ट होता हो तब इन तक सशर्त पहुंच उपलब्ध है.”

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सीबीआई द्वारा एक पूर्व केंद्रीय मंत्री को गिरफ्तार किये जाने में कथित तौर पर बाधा खड़ी करने पर गोस्वामी से फरवरी 2015 में जबरन इस्तीफा लिया गया था.
आरटीआई आवेदक और आईपीएस अधिकारी अनुराग ठाकुर ने गोस्वामी के खिलाफ शिकायत पर की गई कार्रवाई का विवरण कैबिनेट सचिवालय से मांगा था, जिनमें विभिन्न प्राधिकारियों के बीच हुए संवाद और फाइल की नोटिंग शामिल थी.

संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर ठाकुर ने सीआईसी के समक्ष अपील की थी.

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सुनवाई के दौरान दी ये दलील
सुनवाई के दौरान उन्होंने दलील दी कि वह जनहित में फाइल नोटिंग समेत अन्य जानकारियां चाहते हैं “जिससे पता चले कि किन घटनाक्रम की वजह से अनिल गोस्वामी को जबरन इस्तीफा देना पड़ा.”

सिन्हा ने कहा कि ठाकुर द्वारा व्यक्त की गई मंशा व्यापक जनहित को व्यक्त नहीं करती, जो नोटिंग शीट या फाइल में उपलब्ध जानकारी के खुलासे से पूरी होती हो. उन्होंने कहा, “इन परिस्थिति में प्रतिवादी द्वारा उपलब्ध कराया गया जवाब न्यायोचित पाया गया और इसमें किसी प्रकार की कमी नहीं है. ऐसे में, इसमें दखल करने की कोई जरूरत नहीं है.”
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