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सूचना आयोग का PMO से सवालः कोहिनूर-टीपू की तलवार वापस लाने के लिए क्या किया?

भाषा
Updated: June 3, 2018, 7:37 PM IST
सूचना आयोग का PMO से सवालः कोहिनूर-टीपू की तलवार वापस लाने के लिए क्या किया?
फाइल फोटो

आरटीआई आवेदक विदेश मंत्रालय एवं प्रधानमंत्री कार्यालय से संपर्क किया तब उसका आवेदन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पास भेज दिया. एएसआई ने कहा कि सामानों को वापस लाने का प्रयास करना उसके अधिकारक्षेत्र में नहीं है.

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केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय को  निर्देश दिए हैं कि प्राचीन वस्तुओं को वापस लाने के लिए किये गये प्रयासों की जानकारी दें.

सीआईसी ने कोहिनूर हीरा, महाराजा रणजीत सिंह का सोने का सिंहासन, शाहजहां का हरिताश्म का शराब का प्याला और टीपू सुल्तान की तलवार जैसी बेशकीमती वस्तुओं को वापस लाने के लिए किये गये प्रयासों का खुलासा करने का निर्देश पीएमओ और विदेश मंत्रालय को दिया है. ये सारी प्राचीन वस्तुएं भारतीय शानोशौकत की लोककथाओं का हिस्सा हैं जिन्हें औपनिवेशिक आका और आक्रमणकर्ता भारत से ले गए थे. अब ये चीजें दुनियाभर के संग्रहालयों की शोभा बढ़ा रही हैं.

जब एक आरटीआई आवेदक ने विदेश मंत्रालय एवं प्रधानमंत्री कार्यालय से इस जानकारी के लिए संपर्क किया तब उसका आवेदन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पास भेज दिया गया. एएसआई ने कहा कि सामानों को वापस लाने का प्रयास करना उसके अधिकारक्षेत्र में नहीं है. एएसआई ने कहा कि वह केवल उन्हीं प्राचीन वस्तुओं को फिर से हासिल करने का प्रयास करती है जो प्राचीन वस्तु एवं कला संपदा अधिनियम , 1972 का उल्लंघन कर अवैध रुप से विदेश निर्यात की गयी है.

आरटीआई में इन चीजों के बारे में मांगी थी जानकारी

आवेदक बीकेएसआर आयंगर ने कोहिनूर हीरा, सुलतानगंज बुद्धा , नस्साक हीरा , टीपू सुलतान की तलवार और अंगूठी , महाराजा रणजीत सिंह का सोने का सिंहासन , शाहजहां का हरिताश्म का शराब का प्याला , अमरावती रेलिंग और बुद्धपाडे , सरस्वती की संगमरमर की मूर्ति - वाग्देवी तथा टीपू के मेकैनिकल बाघ को वापस लाने के लिए सरकार द्वारा किये गये प्रयास से जुड़े रिकार्ड मांगे थे.

जनभावनाओं की अनदेखी नहीं कर सकती सरकारः सूचना आयुक्त
सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्यलु ने कहा कि ये चीजें भारत की हैं और अतीत, वर्तमान और भविष्य के लागों को उन्हें फिर हासिल किये जाने में रुचि है. सरकार इन भावनाओं की अनदेखी नहीं कर सकती. उन्होंने कहा कि संस्कृति मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया था कि वह प्रयास जारी रखेगा , ऐसे में किये गये प्रयासों या यदि कोई प्रगति हुई है तो उसकी जानकारी देना उसका काम था.
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लेकिन यह पता होने के बाद भी कि एएसआई को आजादी पूर्व कलाकृतियों को ब्रिटिश से हासिल करने का कानूनी हक नहीं है तो ऐसे में कैसे पीएमओ और संस्कृति मंत्रालय इस निष्कर्ष पर पहुंच गये कि आरटीआई आवेदन एएसआई के कामों से संबद्ध है.

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First published: June 3, 2018, 6:14 PM IST
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