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CIC ने कहा, पनामा पेपर्स में दर्ज टैक्‍स चोरी करने वालों के नाम बताने को बाध्‍य नहीं ED

News18Hindi
Updated: October 8, 2019, 4:40 PM IST
CIC ने कहा, पनामा पेपर्स में दर्ज टैक्‍स चोरी करने वालों के नाम बताने को बाध्‍य नहीं ED
आरटीआई आवेदक दुर्गा प्रसाद चौधरी ने कहा कि ईडी ने मांगी गई जानकारी उपलब्‍ध नहीं कराई, जबकि ये उच्‍चस्‍तर पर फैले भ्रष्‍टाचार से जुड़ा गंभीर मामला है.

केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने दुर्गा प्रसाद चौधरी के आरटीआई (RTI) आवेदन पर सुनवाई करते हुए कहा, आरटीआई कानून की धारा-24 (1) प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नाम नहीं बताने का अधिकार देती है. आवेदक ने पनामा पेपर्स (Panama Papers) में दर्ज कर चोरी करने वाले भारतीयों के नाम सार्वजनिक करने के साथ ही अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी भी मांगी थी.

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  • Last Updated: October 8, 2019, 4:40 PM IST
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नई दिल्‍ली. केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने स्‍पष्‍ट किया है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) पनामा पेपर्स में दर्ज टैक्‍स चोरी (Tax Evasion) करने वाले भारतीयों के नाम बताने के लिए बाध्‍य नहीं है. आयोग ने दुर्गा प्रसाद चौधरी के आरटीआई आवेदन (RTI Application) पर सुनवाई करते हुए कहा कि कानून की धारा-24 (1) प्रवर्तन निदेशालय को कुछ जानकारियां सार्वजनिक नहीं करने की छूट (Exemption) देती है. दरअसल, आवेदक दुर्गा प्रसाद ने 2017 में ईडी से टैक्‍स चोरी करने वाले भारतीयों के नाम सार्वजनिक करने समेत तीन बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी, जिस पर उन्‍हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला. इसके बाद उन्‍होंने सीआईसी से इसकी शिकायत की थी.

इन तीन बिंदुओं पर आवेदक ने ईडी से मांगी थी जानकारी
चौधरी ने अपने आवेदन में पनामा पेपर्स (Panama Papers) में दर्ज लोगों के नाम, अब तक उनके खिलाफ की गई कार्रवाई और जांच में देरी के लिए जिम्‍मेदार अधिकारियों का ब्‍योरा मांगा था. ईडी ने मामला आयोग के समक्ष पहुंचने पर दावा किया आरटीआई कानून की धारा-24 (1) ऐसे मामलों में जानकारी सार्वजनिक नहीं करने की छूट देती है. सुनवाई के दौरान चौधरी ने कहा कि उन्‍हें मांगी गई जानकारी उपलब्‍ध नहीं कराई गई, जबकि ये उच्‍चस्‍तर पर फैले भ्रष्‍टाचार (Corruption) से जुड़ा गंभीर मामला है. इस दौरान उन्‍होंने आयोग को बताया कि देश-विदेश के समाचारपत्रों के जरिये पनामा पेपर्स में दर्ज लोगों के नाम सामने आ रहे हैं.

मामला कोर्ट के विचाराधीन होने का भी दिया हवाला

प्रवर्तन निदेशालय ने कानून के तहत मिली छूट का जिक्र करते हुए दलील दी कि मामला अदालत (Sub-Judice) के समक्ष विचाराधीन है. लिहाजा, इस मामले से जुड़ी जानकारियां साझा नहीं की जा सकती हैं. साथ ही कहा कि धारा-24 (1) कुछ इंटेलीजेंस और सिक्‍योरिटी ऑर्गेनाइजेशंस को पारदर्शिता कानून (Transparency Law) के दायरे से छूट देती है. हालांकि, यह छूट मानवाधिकार उल्‍लंघन (Human Rights Violations) के मामलों पर लागू नहीं होती है. पनामा पेपर्स के मामले में लीगल फर्म मॉसेक फॉन्‍सेका की ओर से मिले ढेरों रिकॉर्ड की जांच हो रही है. इसमें इंवेस्‍टीगेटिव जर्नलिस्‍ट के कंसोर्टियम ने विदेशी कंपनियों में अपनी पूंजी छुपाने वाले कुछ वैश्विक नेताओं (World Leaders) और सेलिब्रिटीज के नाम दर्ज किए हैं.

सूचना आयुक्‍त ने कहा - आयोग के हस्‍तक्षेप की जरूरत नहीं
सूचना आयुक्‍त (Information Commissioner) बिमल जुल्‍का ने कहा कि मामले से जुड़े तथ्‍यों के मद्देजनर, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद और विभिन्‍न अदालतों की ओर से एजेंसी को मिली जानकारी सार्वजनिक नहीं करने की छूट के बाद मामले में केंद्रीय सूचना आयोग के हस्‍तक्षेप की जरूरत नहीं है. आईटीआई कानून की धारा-24 (1) प्रवर्तन निदेशालय को सूचना साझा नहीं करने की छूट देती है. इसी आधार पर विभिन्‍न अदालतों ने एजेंसी को छूट दी है. स्‍पष्‍ट है कि ईडी मांगी गई जानकारी देने के लिए बाध्‍य नहीं है.ये भी पढ़ें:

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First published: October 8, 2019, 4:40 PM IST
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