फर्ज़ी एनकाउंटर मामले में CIC ने दी गृह मंत्रालय को सख्त चेतावनी

केंद्रीय सूचना आयोग ने गृह मंत्रालय को चेतावनी दी है कि असम में फर्ज़ी मुठभेड़ का आरोप लगाने वाली सीआरपीएफ महानिरीक्षक की रिपोर्ट के संबंध में सूचनाओं के खुलासे की मांग पर अगर उसका अधिकारी अगली सुनवाई के दिन मौजूद नहीं रहता है तो वो एकतरफा निर्णय लेगा.

भाषा
Updated: August 12, 2018, 7:58 PM IST
फर्ज़ी एनकाउंटर मामले में CIC ने दी गृह मंत्रालय को सख्त चेतावनी
फर्ज़ी एनकाउंटर मामले में CIC ने दी गृह मंत्रालय को सख्त चेतावनी
भाषा
Updated: August 12, 2018, 7:58 PM IST
केंद्रीय सूचना आयोग ने गृह मंत्रालय को चेतावनी दी है कि असम में फर्ज़ी मुठभेड़ का आरोप लगाने वाली सीआरपीएफ महानिरीक्षक की रिपोर्ट के संबंध में सूचनाओं के खुलासे की मांग पर अगर उसका अधिकारी अगली सुनवाई के दिन मौजूद नहीं रहता है तो वो एकतरफा निर्णय लेगा.

सूचना आयुक्त यशोवर्धन आज़ाद ने अपने आदेश में कहा है कि जो तीन जानकारियां मांगी गयी हैं उनका संबंध केंद्रीय गृह मंत्रालय से है. वो है- सीआरपीएफ महानिरीक्षक रजनीश राय की रिपोर्ट पर की गयी कार्रवाई, इस रिपोर्ट की प्रतिलिपि और क्या राय के विरुद्ध जांच चल रही है.

गुजरात संवर्ग के 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी रजनीश राय ने पिछले साल सीआरपीएफ के शीर्ष अधिकारियों को एक रिपोर्ट दी थी और बताया था कि कैसे सेना, अर्धसैनिक बल और असम पुलिस ने 29-30 मार्च 2017 को चिरांग जिले के सिमालगुड़ी इलाके में फर्जी मुठभेड़ की थी और दो व्यक्तियों को एनडीएफबी (एस) के सदस्य बताकर उन्हें मार दिया था.

सीआरपीएफ ने एक पत्रकार को इस रिपोर्ट और उससे जुड़े मुद्दों के बारे में कोई भी जानकारी देने से ये कहते हुए इनकार कर दिया था कि इसे पारदर्शी कानून से छूट प्राप्त है.

केंद्रीय सूचना आयोग ने सीआरपीएफ को सूचना देने का निर्देश दिया है. सूचना आयुक्त ने कहा कि अपीलकर्ता ने प्रथम दृष्टया सूचना के प्रकट करने का मामला स्थापित करने में कामयाब रहा है क्योंकि फर्ज़ी मुठभेड़ मानवाधिकार का उल्लंघन है और ये सीआरपीएफ को प्राप्त छूट के अंतर्गत नहीं आता.

आज़ाद ने कहा कि राय ने रिपोर्ट भेजी या नहीं और कब ये रिपोर्ट मिली, इन दो सूचनाओं का सीआरपीएफ को खुलासा करना चाहिए क्योंकि ये उसे प्राप्त छूट या आरटीआई के छूट उपबंध के अंतर्गत नहीं आता है.

उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय के पास मौजूद बाकी तीन सूचनाओं का राष्ट्रीय सुरक्षा कोण हो सकता है क्योंकि जिस क्षेत्र में कथित मुठभेड़ हुई थी वो सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून के तहत आता है और उस पर गृहमंत्रालय के पास मौजूद सूचना के संदर्भ में आरटीआई कानून की धारा 8(1)(a) लग सकती है.
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इस संबंध में गृह मंत्रालय के सीपीआईओ को आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखने को कहा गया है और उनसे पूछा गया कि कैसे यहां सूचना रोकने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा उपबंध लगेगा. लेकिन वो 23 मार्च 2018 और 28 मई 2018 को नहीं पेश हुए.
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