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राष्ट्रपति से मिला विपक्ष, सोनिया गांधी बोलीं- जनता की आवाज दबा रही सरकार

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Updated: December 17, 2019, 6:01 PM IST
राष्ट्रपति से मिला विपक्ष, सोनिया गांधी बोलीं- जनता की आवाज दबा रही सरकार
विपक्ष के नेताओं ने आज राष्‍ट्रपति से मुलाकात की.

संशोधित नागरिकता कानून ( Citizenship Act) पर राष्‍ट्रपति से मुलाकात के बाद कांग्रेस की अंतरिम अध्‍यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने कहा कि प्रदर्शन करना सबका लोकतांत्रिक हक है. यह सरकार लोगों की आवाज को दबा रही है.

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  • Last Updated: December 17, 2019, 6:01 PM IST
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नई दिल्‍ली. संशोधित नागरिकता कानून (Citizenship Act) पर देश भर में मचे बवाल को लेकर मंगलवार को प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ramnath Kovind) से मुलाकात की. विपक्षी नेताओं में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल, एके एंटनी, पी चिदंबरम, टीआर बालू, सपा नेता रामगोपाल यादव मौजूद रहे. मुलाकात के बाद सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने कहा कि यह सरकार जनता की आवाज दबा रही है. पुलिस का यूनिवर्सिटी हॉस्‍टल में घुसकर छात्रों पर कार्रवाई करना गलत था. सरकार संविधान का उल्‍लंघन कर रही है.

सोनिया गांधी ने कहा कि दिल्‍ली और नॉर्थ ईस्‍ट के राज्‍यों में हालात तनावपूर्ण हैं. इसलिए हमने राष्‍ट्रपति से मामले में दखल देने को कहा है. उन्‍होंने कहा कि प्रदर्शन करना सबका लोकतांत्रिक हक है.



डेरेक ओ ब्रायन - हमने राष्ट्रपति से इस कानून को वापस लेने की अपील की है. ये कानून इस तरह से लागू नहीं किया जा सकता इसका सीधा असर सिर्फ गरीब लोगों पर ही होगा. हमारी पार्टी जामिया के छात्रों के साथ खड़ी है.सीताराम येचुरी- राष्ट्रपति से हमने इस काले कानून को वापस लेने की अपील की है. राष्ट्रपति संविधान के प्रथम रक्षक हैं और उन्हें संविधान विरोधी कानून को रद्द करना चाहिए.

विपक्ष ने राष्‍ट्रपति को ज्ञापन सौंपा.


रामगोपाल यादव- समाजवादी पार्टी की तरफ से रामगोपाल ने कहा कि हम पहले ही संसद में इस कानून को लेकर आशंका जाहिर कर चुके थे और अब देश के हर कोने में जो हो रहा है वो हमारी आशंका को सच साबित कर रहा है.

विपक्ष ने राष्‍ट्रपति को ज्ञापन सौंपा.


नॉर्थ-ईस्ट जल रहा है और पाकिस्तान समेत कई पड़ोसी देश यही चाहते हैं कि भारत में आग लगी रहे, सरकार को इस स्थिति को समझना होगा और इस कानून को वापस लेना होगा.

विपक्ष ने राष्‍ट्रपति को ज्ञापन सौंपा.


गुलाम नबी आज़ाद- आज देश की कोई ऐसी यूनिवर्सिटी, आईआईटी-आईआईएम नहीं है जहां इस कानून का विरोध न हो रहा हो. सरकार ने एडवाइजरी जारी कर इन प्रदर्शनों को कवर न करने की नसीहत दी है हालांकि फिर भी दुनिया भर की मीडिया में इन प्रदर्शनों की खबर छप रही हैं. करीब 15 राजनीतिक पार्टियां इस कानून के विरोध में हैं और सरकार को इसे वापस लेना ही होगा.

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First published: December 17, 2019, 5:20 PM IST
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