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अमित शाह ने राज्यसभा में पेश किया नागरिकता संशोधन विधेयक, कहा- भारतीय मुस्लिमों को डरने की कोई जरूरत नहीं

भाषा
Updated: December 11, 2019, 2:42 PM IST

नागरिकता संशोधन विधेयक इस साल जनवरी में भी लाया गया था और लोकसभा में पारित हो गया था. किंतु 16वीं लोकसभा की अवधि समाप्त हो जाने के कारण यह राज्यसभा में पारित नहीं हो पाया था.

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नई दिल्ली. गृह मंत्री अमित शाह (Amit shah) ने बुधवार को नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizen amendment bill) चर्चा और पारित कराने के लिए राज्यसभा (Rajyasabha) में पेश किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि इस बिल से भारतीय मुसलमानों को डरने की जरूरत नहीं. भारत के मुसलमान भारतीय नागरिक थे, हैं और बने रहेंगे. पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के गैर मुस्लिम प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने के प्रावधान वाले इस विधेयक को पेश करते हुए उच्च सदन में गृह मंत्री ने कहा कि इन तीनों देशों में अल्पसंख्यकों के पास समान अधिकार नहीं हैं. उन्होंने कहा कि इन देशों में अल्पसंख्यकों की आबादी कम से कम 20 फीसदी कम हुई है. इसकी वजह उनका सफाया, भारत प्रवास तथा अन्य हैं. शाह ने कहा कि इन प्रवासियों के पास रोजगार और शिक्षा के अधिकार नहीं थे.

अमित शाह ने कहा कि विधेयक में उत्पीड़न का शिकार हुए अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है. इस विधेयक में अफगानिस्तान, बांग्लादेश एवं पाकिस्तान से आये हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी एवं ईसाई शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रावधान है. इस विधेयक को सोमवार को लोकसभा ने पारित किया.

विधेयक को प्रवर समिति में भेजने के लिए प्रस्ताव
उच्च सदन में कई विपक्षी सदस्यों ने इस विधेयक को प्रवर समिति में भेजने के लिए प्रस्ताव दिया है. विधेयक पर चर्चा होने के बाद इसे पारित करते समय इन प्रस्तावों के बारे में निर्णय किया जायेगा. शाह ने इस विधेयक के मकसदों को लेकर वोट बैंक की राजनीति के विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भाजपा ने 2019 के आम चुनाव के लिए अपने घोषणा पत्र में इसकी घोषणा की थी और पार्टी को इसी पर जीत मिली थी.

उन्होंने कहा कि मुस्लिमों को चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि वे भारत के नागरिक हैं और बने रहेंगे. शाह ने कहा कि भाजपा असम के लोगों के हितों की रक्षा करेगी. गृह मंत्री जब असमी लोगों के हितों की रक्षा की बात कर रहे थे तो राज्यसभा का टीवी प्रसारण कुछ समय के लिए रोक दिया गया क्योंकि विपक्षी सदस्यों ने बीच में टोकाटोकी शुरू कर दी.

इस विधेयक में पड़ोसी देशों के मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान नहीं है जिसके कारण देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध हो रहा है.

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First published: December 11, 2019, 1:40 PM IST
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