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बंगाल में 2021 के चुनाव में नागरिकता विधेयक तय कर सकता है हवा का रुख

भाषा
Updated: December 12, 2019, 11:48 PM IST
बंगाल में 2021 के चुनाव में नागरिकता विधेयक तय कर सकता है हवा का रुख
पश्चिम बंगाल की राजनीति में नागरिकता संशोधन विधेयक अपना प्रभाव छोड़ सकता है (फाइल फोटो, News18)

नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Bill) के कानून का रूप लेने के बाद 294 सदस्यीय राज्य विधानसभा (State Assembly) के लिए अगले चुनाव में बहुसंख्यक समुदाय के वोटों को रिझाने के लिए तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भाजपा (BJP) के बीच ‘‘हिंदू तुष्टिकरण’’ की नयी लहर शुरू होने की भी संभावना है.

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कोलकाता. विवादों का सामना कर रहा नागरिकता (संशोधन) विधेयक (Citizenship Amendment Bill) आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल (West Bengal) में राजनीतिक हवा का रुख निर्धारित करने वाला है और 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले इससे राज्य में सांप्रदायिक आधार पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भाजपा (BJP) के बीच ध्रुवीकरण और अधिक तूल पकड़ सकता है.

विधेयक के कानून का रूप लेने के बाद 294 सदस्यीय राज्य विधानसभा (State Assembly) के लिए अगले चुनाव में बहुसंख्यक समुदाय के वोटों को रिझाने के लिए तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भाजपा के बीच ‘‘हिंदू तुष्टिकरण’’ की नयी लहर शुरू होने की भी संभावना है.

BJP के पक्ष में हिंदू वोटों और TMC के पक्ष में मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण की संभावना
राज्यसभा ने बुधवार को नागरिकता (संशोधन) विधेयक को पारित कर दिया. लोकसभा में यह सोमवार को पारित हो चुका है. प्रदेश भाजपा सूत्रों के मुताबिक संसद में इस विधेयक के पारित होने से भगवा पार्टी के पक्ष में हिंदू वोटों के और तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण (Polarisation) बढ़ने की संभावना है.

एक ओर जहां बंगाल भाजपा राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) की हिमायत करने के बाद उसका फायदा नहीं मिलने में नाकाम रहने के बाद नागरिकता विधेयक का लाभ मिलने की काफी आस लगाए बैठी है, वहीं दूसरी ओर तृणमूल को लगता है कि यह एनआरसी की तरह ही भगवा पार्टी को नुकसान पहुंचाएगा क्योंकि ये दोनों चीजें बंगालियों और बंगाली गौरव पर हमला हैं.

नागरिकता BJP दे रही इसलिए उसे ही होगा फायदा: घोष
करीब 80 विधानसभा क्षेत्रों (नदिया, कूचबिहार, उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिलों) के चुनाव में हिंदू शरणार्थी अहम भूमिका निभाते हैं जबकि लगभग 90 सीटों पर मुसलमान मतदाताओं की अच्छी खासी आबादी है. इसके अलावा हिंदू शरणार्थी करीब 40--50 अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी फैले हुए हैं जहां निर्वाचक मंडल में उनकी हिस्सेदारी 10 से 15 फीसदी है.प्रदेश भाजपा प्रमुख दिलीप घोष ने कहा, ‘‘ ना ही टीएमसी ना ही वाम मोर्चा (Left Front) ने कई दशकों में शरणार्थियों के लिए कुछ किया. यह भाजपा है जो उन्हें नागरिकता दे रही है. इसलिए भाजपा को इसका फायदा मिलेगा.’’

पश्चिम बंगाल की राजनीति अब होगी द्विध्रुवीय: बीजेपी नेता
भाजपा सूत्रों के मुताबिक नागरिकता विधेयक से बंगाल में 72 लाख से अधिक लोगों सहित देश भर में 1.5 करोड़ लोगों को लाभ मिलेगा. भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, ‘‘नागरिकता विधेयक के संसद में पारित होने से तृणमूल कांग्रेस बेनकाब हो गई है. मुस्लिम तुष्टिकरण की टीएमसी की राजनीति की पोल खुल गई है.’’

विधेयक के राजनीतिक परिणामों के बारे में प्रदेश भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि यह पार्टी के दोहरे उद्देश्य को पूरा करेगा क्योंकि यह उसके पक्ष में हिंदुओं को और अधिक एकजुट करेगा और टीएमसी के इस सिद्धांत को कमजोर करेगा कि भाजपा बंगाली विरोधी पार्टी है. उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल की राजनीति अब से द्विध्रुवीय होगी....’’

बंगालियों के अपमान का बीजेपी को मिलेगा मुंहतोड़ जवाब
पश्चिम बंगाल की 2000 किमी सीमा बांग्लादेश से लगी हुई है. हालांकि, राज्य की मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने एनआरसी के साथ -साथ नागरिकता विधेयक का भी विरोध किया है और इसे बंगाली विरोधी करार दिया है. उन्होंने राज्य में भाजपा को दरकिनार करने के लिए बंगाली गौरव का मुद्दा छेड़ा है. उन्होंने कहा है कि वह राज्य में नागरिकता विधेयक को कभी लागू नहीं होने देंगी.

तृणमूल महासचिव पार्था चटर्जी ने कहा, ‘‘चाहे हिंदू हों या मुसलमान, हम बंगाली पहले हैं. इस देश में कई दशकों से रहते आने के बाद हमें अपनी नागरिकता साबित करने या सरकार से इसे मांगने की जरूरत नहीं है. हमने देखा कि असम एनआरसी से 14 लाख बंगालियों के नाम हटा दिए गए. बंगालियों का अपमान करने के लिए उन्हें (BJP को) मुंहतोड़ जवाब मिलेगा.’’

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First published: December 12, 2019, 11:43 PM IST
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