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OPINION: नागरिकता संशोधन बिल के जरिए मोदी सरकार ने एक तीर से लगाए कई निशाने

Anil Rai | News18Hindi
Updated: December 10, 2019, 4:35 PM IST
OPINION: नागरिकता संशोधन बिल के जरिए मोदी सरकार ने एक तीर से लगाए कई निशाने
नागरिकता संशोधन बिल लोकसभा में भारी मत से पास हुआ

नागरिकता संशोधन बिल (Citizen Amendment Bill) लोकसभा में भारी मत से पास हो गया. जिस तरह का राजनीतिक समीकरण देखने को मिल रहा है उससे साफ है कि इस बिल का राज्यसभा (Rajya Sabha) में पास होना सिर्फ औपचारकिता मात्र है.

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  • Last Updated: December 10, 2019, 4:35 PM IST
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नागरिकता संशोधन बिल (Citizen Amendment Bill) लोकसभा में भारी मत से पास हो गया. सरकार का लोकसभा (Lok Sabha) में जिस तरह से राजनीतिक समीकरण देखने को मिला उससे साफ है कि इस बिल का राज्यसभा (Rajya Sabha) में पास होना सिर्फ औपचारकिता मात्र है. नागरिकता संशोधन बिल जिस तरह से कैबिनेट में आया और आनन-फानन में लोकसभा में पास पेश किया गया उससे एक बात साफ है कि सरकार (Government) इस बिल को पास कराने की जल्दी में थी.

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सरकार इस बिल को पास कराने की इतनी जल्दी में क्यों थी. इसकी पड़ताल करेगें तो साफ हो जाएगा कि नागरिकता संशोधन बिल के बहाने सरकार ने एक तीर से कई निशाने साध लिए. पहले सरकार ने अपने परंपरागत हिन्दू वोट बैंक को एक साथ रखने के साथ-साथ अपना 50 लाख से ज्यादा का वोट बैंक बढ़ा लिया. दरअसल एक आंकड़े के मुताबिक करीब 1 लाख गैर मुस्लिम शरणार्थी भारत की नागरिकता (Citizenship of india) की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ऐसे में अगर इन शरणार्थियों में आधे भी मतदाता होंगे तो इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिलेगा. साथ ही बीजेपी की पुरानी कट्टर हिन्दू समर्थ छवि एक बार और मजबूत होगी.

सरकार के खिलाफ विपक्ष का महागठबंधन हुआ धाराशाई
जिस तरह लोकसभा नागरिकता संशोधन बिल के पक्ष में मतदान के दौरान शिवसेना (Shiv Sena) ने अपने नए बने गठबंधन से बाहर जाकर सरकार के पक्ष में मतदान किया, उससे उस दावे की हवा निकल गई जिसमें आने वाले समय में देशभर में बीजेपी (bjp) के खिलाफ राष्ट्रव्यापी गठबंधन बनाने की बात की जा रही थी. साथ ही बीजेपी ने अपने इस वार से अपने नए राजनीतिक दुश्मन शिवसेना को संकट में डाल दिया. सरकार के इस कदम के बात शिवसेना की समझ में आ गया होगा कि पार्टी अब दो नावों की सवारी कर रही है. एक तरफ शिवसेना को जहां कांग्रेस-एनसीपी के साथ सरकार चलानी है तो वहीं अपनी हिन्दू समर्थक छवि को बचाये रखना है, क्योंकि मोदी सरकार ने जिस तरह धारा-370, राम मंदिर और नागरिकता संशोधन बिल पर आक्रमक रुख अपनाया है. ऐसे समय में शिवसेना का एनसीपी और कांग्रेस के साथ सरकार बनाना उसके लिए घातक हो सकता है. शिवसेना से अलग होने के बाद बीजेपी के नेताओं को कोशिश भी यहीं है कि महाराष्ट्र में गठबंधन की सरकार के बहाने शिवसेना का हिन्दू विरोधी घोषित कर दिया जाए.

नागरिकता संशोधन बिल के बहाने सरकार ने एक तीर से कई निशाने साधे
नागरिकता संशोधन बिल के बहाने सरकार ने एक तीर से कई निशाने साधे


विपक्ष के हीरो बने प्रशांत किशोर को राजनीतिक हाशिए पर धकेला
पश्चिम बंगाल हो या महाराष्ट्र या बिहार मे नीतीश और लालू का एक पास आना, पिछले 5 सालों में बीजेपी के खिलाफ जो भी बड़े राजनीतिक समझौते होते हैं मीडिया का एक बड़ा हिस्सा उसका श्रेय प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) को देने से नहीं चूकता, ऐसे बीजेपी के नागरिकता संशोधन बिल के बाद प्रशांत किशोर हाशिए पर पहुंच गए हैं, जहां एक ओर उनको अपनी पार्टी के खिलाफ बोलना पड़ रहा है. वहीं महाराष्ट्र में करीब एक सप्ताह पहले बने गठबंधन में पहली दरार पड़ गई है. प्रशांत किशोर के बयान से एक बात तो साफ है कि उनके ये दावा इस बार पूरी तरह फेल हो गया, जिसमें वो विपक्ष की हर राजनीतिक बिसात का श्रेय लेते थे. साफ है सरकार के इस कदम के बाद एकतरफ जहां मीडिया के नए हीरो शरद पवार (Sharad Pawar) के एंटी बीजेपी फ्रंट का भ्रम टूटा वहीं प्रशांत किशोर भी हाशिए पर पहुंच गए.यह भी पढ़ें- नागरिकता बिल पर बोली उद्धव ठाकरे- जब तक कुछ बातें स्पष्ट नहीं होतीं, हम नहीं करेंगे समर्थन

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First published: December 10, 2019, 3:39 PM IST
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