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जानें क्या है नागरिकता संशोधन बिल, जिसे लेकर मचा है इतना बवाल

News18Hindi
Updated: December 4, 2019, 1:34 PM IST
जानें क्या है नागरिकता संशोधन बिल, जिसे लेकर मचा है इतना बवाल
पूर्वोत्तर राज्यों समेत विपक्ष के नागरिकता संशोधन बिल का विरोध कर रहे हैं.

नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Bill) के कानून बन जाने पर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए गैर-मुस्लिम धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता मिलने में आसानी हो जाएगी.

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  • Last Updated: December 4, 2019, 1:34 PM IST
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नई दिल्ली. मोदी सरकार 9 दिसंबर को संसद में नागरिकता संशोधन बिल (CAB) पेश करने जा रही है. मोदी कैबिनेट ने बुधवार को इस बिल को मंजूरी दी. इस बिल के पास हो जाने के बाद देश में शरणार्थियों को मिलने वाली नागरिकता के कई नियम बदल जाएंगे. ऐसे में पूर्वोत्तर राज्यों समेत विपक्ष के दल इसका विरोध कर रहे हैं. आइए जानते हैं क्या है नागरिकता संशोधन बिल और इसके लागू होने से क्या होगा असर...

क्या है नागरिकता संशोधन बिल?
>>नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 के तहत नागरिकता कानून 1955 में संशोधन किया जाएगा.

>>इसके तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए गैर-मुस्लिम धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता दिए जाने की बात कही गई है.

>>इस बिल के कानून बनने के बाद अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के मानने वाले अल्पसंख्यक समुदायों को 11 साल के बजाय महज छह साल ही भारत में रहने पर और बिना उचित दस्तावेजों के भी भारतीय नागरिकता मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा.

>>इतना ही नहीं इन समुदाय के लोगों को पासपोर्ट एक्ट 120 और विदेशी अधिनियम 1946 के तहत जेल की सज़ा भी नहीं होगी. इस बिल के माध्यम से 31 दिसंबर 2014 से पहले आए सभी लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान है, जबकि असम समझौते के अनुसार 1971 से पहले आए लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान था.

>>सरकार ने स्पष्ट किया था कि यह विधेयक असम तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरे देश में प्रभावी होगा.
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इससे भारत की नागरिकता पर क्या असर होगा?
>>इस बिल के कानून में तब्दील होने के बाद अफगानिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, पाकिस्तान जैसे देशों से जो गैर-मुस्लिम शरणार्थी भारत आएंगे, उन्हें यहां की नागरिकता आसानी से मिल सकती है.

>>नागरिकता लेने के लिए शरणार्थी को भारत में कम से कम 6 साल बिताने होंगे. पहले नागरिकता देने का पैमाना 11 साल से अधिक था.

modi cabinet
मोदी कैबिनेट ने नागरिकता संशोधन बिल को मंजूरी दे दी है.


क्यों हो रहा है विरोध?
>>नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 बिल का अल्पसंख्यकों की तरफ से भारी विरोध हो रहा है. NRC धर्म के आधार पर अवैध प्रवासियों को अलग नहीं करता है, जबकि ये बिल मुसलमानों को शामिल नहीं करता.

>>साल 2016 में इस बिल को लाने के बाद से ही नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों में भारी विरोध-प्रदर्शन हो रहा है. असम, मणिपुर, नगालैंड और मेघालय हर तरफ लोगों ने इस बिल का भारी विरोध किया था.

>>इस साल अक्टूबर में जब गृहमंत्री अमित शाह मिज़ोरम के दौरे पर गए थे तब वहां कई संगठनों ने विरोध किया था. असम में ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन के प्रमुख सलाहकार समुजल भट्टाचार्या ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि वो किसी भी शर्त पर इस बिल को नहीं मानेंगे.

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First published: December 4, 2019, 1:32 PM IST
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