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मैरिटल रेप पर सुप्रीम कोर्ट का सवाल- 'पति कितना भी क्रूर हो लेकिन क्या उसके साथ शारीरिक संबंधों को बलात्कार कहेंगे?'

सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार के आरोपी को आठ सप्ताह तक गिरफ्तारी से छूट प्रदान की (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार के आरोपी को आठ सप्ताह तक गिरफ्तारी से छूट प्रदान की (फाइल फोटो)

Supreme Court on Marital Rape: सुप्रीम कोर्ट ने 'वैवाहिक बलात्कार' जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सवाल किया कि क्या पति-पत्नी के रूप में एक साथ रहने वाले दंपति के बीच शारीरिक संबंध को बलात्कार कहा जा सकता है.

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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शादी का झांसा देकर एक महिला के साथ दुष्कर्म के आरोपी व्यक्ति को आठ हफ्ते के लिए गिरफ्तारी से छूट प्रदान कर दी. इसके साथ ही अदालत ने सवाल किया कि क्या पति-पत्नी के रूप में एक साथ रहने वाले दंपति के बीच शारीरिक संबंध को बलात्कार कहा जा सकता है. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एस ए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यम की पीठ ने कहा, 'अगर कोई दंपति पति और पत्नी के रूप में एक साथ रह रहे हैं, तो पति कितना भी क्रूर हो लेकिन क्या आप उनके बीच शारीरिक संबंधों को बलात्कार कह सकते हैं?'

इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी 
पीठ ने विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की. इन याचिकाओं में एक याचिका आरोपी की भी है, जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के अप्रैल 2019 के आदेश को चुनौती दी गई है. हाईकोर्ट ने आरोपी के खिलाफ उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर जिले में दर्ज प्राथमिकी को खारिज करने से इनकार कर दिया था.

वीडियो-कॉन्फ्रेंस के जरिये हुई सुनवाई के दौरान, शिकायतकर्ता महिला की ओर से पेश वकील ने कहा कि आरोपी ने धोखे से महिला से सहमति ली थी. वकील ने दावा किया कि आरोपी 2014 में महिला को हिमाचल प्रदेश के मनाली में एक मंदिर में ले गया, जहां उन्होंने 'शादी की रस्में' निभाईं.
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आरोपी ने महिला से की मारपीट- शिकायकर्ता की वकील
पीठ ने कहा, 'शादी का झूठा वादा करना गलत है. यहां तक कि किसी महिला को भी इस तरह का वादा नहीं करना चाहिए और फिर तोड़ देना चाहिए.' याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विभा दत्ता मखीजा ने कहा कि आरोपी और महिला दो साल तक ‘लिव-इन रिलेशन’ में थे और बाद में महिला ने शादी का झूठा वादा कर बलात्कार का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज करायी.

मखीजा ने कहा कि प्राथमिकी में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 (बलात्कार) के तहत आरोप दर्ज किया गया है ताकि व्यक्ति को परेशान किया जा सके. शिकायतकर्ता महिला की ओर से पेश वकील ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उसके पति होने का नाटक किया था, लेकिन बाद में उसने दूसरी महिला से शादी कर ली. उन्होंने दावा किया कि आरोपी ने महिला के साथ मारपीट की और उन्होंने इस संबंध में मेडिकल रिकॉर्ड का भी जिक्र दिया.
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