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नाराज सीजेआई गोगोई ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री के वर्किंग स्टाइल पर उठाए सवाल, कहा- 'बुनियादी रूप से कुछ गड़बड़ी है'

नाराज सीजेआई गोगोई ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री के वर्किंग स्टाइल पर उठाए सवाल, कहा- 'बुनियादी रूप से कुछ गड़बड़ी है'

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने सवाल किया, 'मुझे बतायें, कौन निरोग है.'

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने सवाल किया, 'मुझे बतायें, कौन निरोग है.'

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने सवाल किया, 'मुझे बतायें, कौन निरोग है.'

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई ने अविलंब सुनवाई के मुकदमों के सूचीबद्ध नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री की कार्यशैली पर नाराजगी व्यक्त करते हुये गुरुवार को कहा कि शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री में ‘बुनियादी रूप से कुछ गड़बड़ी है.'

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता औरजस्टिस अनिरूद्ध बोस की तीन सदस्यीय बेंच ने कहा कि रोजाना ऐसे वकीलों की लंबी कतार लगी होती है जो चाहते हैं कि उनका मामला सुनवाई के लिये शीघ्र सूचीबद्ध किया जाये क्योंकि अदालत के आदेश के बावजूद उसे कार्यसूची से हटा दिया गया है.

    जस्टिस गोगोई तीन अकटूबर, 2018 को देश के 46वें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया का कार्यभार ग्रहण करने के दिन से ऐसी व्यवस्था करने का प्रयास कर रहे हैं जिससे कि वकीलों को शीघ्र सुनवाई के लिये अपने मामले का उल्लेख नहीं करना पड़े और उनके मुकदमे एक निश्चित अवधि के भीतर स्वत: ही सूचीबद्ध हो जायें.

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    CJI ने जाहिर की नाराजगी

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुये कहा, 'रोजाना मामले सूचीबद्ध कराने के लिये वकीलों की लंबी कतार लगी रहती है. निश्चित ही इसमें (सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री) कुछ बुनियादी गड़बड़ी है. सर्वश्रेष्ठ प्रयासों के बावजूद, मैं इससे (मामले सूचीबद्ध कराने) निबटने में असमर्थ हूं.'

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने यह टिप्पणी उस वक्त की जब एक वकील ने अपने एक मामले को शीघ्र सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया और आरोप लगाया कि अदालत के आदेश के बावजूद इसे कार्यसूची से निकाल दिया गया है.

    बेंच ने इसके बाद इस तथ्य का उल्लेख किया कि हाईकोर्ट में एक सप्ताह में करीब छह हजार नये मामले दायरे होते हैं जबकि सुप्रीम कोर्ट में इस अवधि में करीब एक हजार मामले दायर होते हैं लेकिन इसके बाद भी शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री प्रभावी तरीके से इनका निबटारा करने में असमर्थ है.

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    बेंच ने कहा कि हाईकोर्टों की तुलना में सुप्रीम कोर्ट में मुकदमों के सूचीबद्ध होने में ज्यादा वक्त लगता है. बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट के न्यायाधीश को शीर्ष अदालत के न्यायाधीश की तुलना में कहीं अधिक मुकदमों पर विचार करना होगा.

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा...

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा, 'हाईकोर्ट में हर सप्ताह 6,000 मुकदमे दायर होते हैं और अगले दिन ये सूचीबद्ध हो जाते हैं. शीर्ष अदालत मे सिर्फ एक हजार मुकदमे दायर होते हैं और ये सूचीबद्ध नहीं हो पाते. हम निर्देश देते हैं कि किसी भी मामले को सूची से हटाया नहीं जाये लेकिन इसके बाद भी इन्हें हटा दिया जाता है.'

    इसी बीच, वकीलों से खचाखच भरे अदालत कक्ष में उस समय लोगों की हंसी छूट गयी जब एक अन्य वकील ने अपने मामले के शीघ्र सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया और कहा कि यह 2014 में दायर किया गया था. इस वकील का कहना था कि उसका मुवक्किल 72 साल का है जिसकी कभी भी मृत्यु हो सकती है.

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    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने उसी शैली में कहा, 'आपका अनुरोध स्पष्ट वजहों से अस्वीकार किया जाता है. उनकी दीर्घायु हो. यह हमारी कामना है. ' इस पर वकील ने कहा कि उनका मुवक्किल कई बीामारियों से ग्रस्त है. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने सवाल किया, 'मुझे बतायें, कौन निरोग है.'

    Tags: Judiciary, Justice Ranjan Gogoi, Supreme Court

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