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CJI रंजन गोगोई ने असम NRC का किया बचाव, कहा- ये भविष्‍य का दस्‍तावेज है

News18Hindi
Updated: November 3, 2019, 5:19 PM IST
CJI रंजन गोगोई ने असम NRC का किया बचाव, कहा- ये भविष्‍य का दस्‍तावेज है
सीजेआई रंजन गोगोई ने रविवार को एक समारोह में एनआरसी का बचाव किया.

'पोस्‍ट कोलोनियल असम' नामक पुस्‍तक के लॉन्चिंग समारोह में सीजेआई (CJI) रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) ने रविवार को कहा कि अवैध प्रवासियों या घुसपैठियों की संख्‍या का पता लगाना बेहद जरूरी था. असम एनआरसी (Assam NRC) ने यही किया.

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  • Last Updated: November 3, 2019, 5:19 PM IST
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नई दिल्‍ली. असम में नेशनल रजिस्‍टर ऑफ सिटिजनशिप (NRC) को लेकर चल रहे आलोचनाओं के दौर के बीच चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) रंजन गोगोई ने प्रतिक्रिया दी है. उन्‍होंने असम एनआरसी (Assam NRC) का बचाव करते हुए कहा है कि एनआरसी मौजूदा समय का दस्‍तावेज नहीं है. 19 लाख और 40 लाख मुद्दा नहीं है. एनआरसी भविष्‍य पर आधारित दस्‍तावेज है. उन्‍होंने कहा कि हम इस दस्‍तावेज के जरिये भविष्‍य में होने वाले दावों पर निर्णय ले सकते हैं.

'पोस्‍ट कोलोनियल असम' नामक पुस्‍तक के लॉन्चिंग समारोह में सीजेआई रंजन गोगोई ने रविवार को कहा कि अवैध प्रवासियों या घुसपैठियों की संख्‍या का पता लगाना बेहद जरूरी था. एनआरसी के जरिये कुछ ऐसा ही किया गया है. ना कुछ अधिक, ना कुछ कम. उन्‍होंने एनआरसी मुद्दे पर सोशल मीडिया पर कुछ लोगों की ओर से फैलाई जा रही गलत बातों पर भी बोला.

उन्‍होंने कहा कि कई लोगों की ओर से सोशल मीडिया का इस्‍तेमाल इस मुद्दे पर अस्‍पष्‍ट बातें फैलाने के लिए किया जा रहा है. इस पर निंदात्‍मक बातें की जा रही हैं. उनके द्वारा फैलाई जा रही बातें तथ्‍यों से दूर हैं.

31 अगस्‍त को जारी हुई थी अंतिम सूची

बता दें कि 31 अगस्‍त को जारी की गई असम एनआरसी की अंतिम सूची में 19,06,657 लोग बाहर किए गए हैं. जबकि 3,11,21,004 लोग एनआरसी में शामिल किए गए हैं. असम के एनआरसी में शामिल नहीं हुए लोग 31 अगस्‍त से 120 दिन तक अपनी नागरिकता साबित करने के लिए उपलब्‍ध उपायों का इस्‍तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए 200 नए फॉरनर्स ट्रिब्‍यूनल (foreigners Tribunal) बनाए गए हैं. वे इसमें आवेदन कर सकते हैं.

'अधिकारों पर कोई असर नहीं'
विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया था कि एनआरसी की अंतिम सूची में शामिल नहीं किए गए असम के नागरिकों के अधिकारों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. अंतिम सूची से बाहर हुए लोगों को हिरासत में नहीं लिया जाएगा. कानून के तहत उपलब्‍ध सभी उपायों का इस्‍तेमाल करने तक उनके अधिकार पहले की तरह बरकरार रहेंगे. एनआरसी 24 मार्च, 1971 या उससे पहले से असम में रहने वाले वास्‍तविक भारतीय नागरिकों (Indian Citizens) की पहचान करने के लिए बनाया जा रहा है.
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First published: November 3, 2019, 5:04 PM IST
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