इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज को हटाने के लिए CJI ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र

भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश एसएन शुक्ला को पद से हटाने की कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया है.

News18Hindi
Updated: June 24, 2019, 5:15 AM IST
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज को हटाने के लिए CJI ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र
भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश एसएन शुक्ला को पद से हटाने की कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया है.
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Updated: June 24, 2019, 5:15 AM IST
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) रंजन गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश एसएन शुक्ला को पद से हटाने की कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया है. सीजेआई ने ये अनुरोध शुक्ला को एक आंतरिक जांच समिति द्वारा कदाचार का दोषी पाए जाने के बाद किया है.

तीन सदस्यीय आंतरिक समिति ने जनवरी 2018 में पाया था कि जस्टिस शुक्ला के खिलाफ शिकायत में पर्याप्त सबूत हैं और ये गंभीर हैं, जो उन्हें हटाने की कार्यवाही शुरू करने के लिए काफी हैं. समिति में मद्रास हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश इंदिरा बनर्जी, सिक्किम हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एसके अग्निहोत्री और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश पीके जायसवाल शामिल थे.

तत्कालीन सीजेआई ने दी थी इस्तीफा देने की सलाह
समिति की रिपोर्ट के बाद तत्कालीन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा ने प्रक्रिया के मुताबिक न्यायमूर्ति शुक्ला को सलाह दी थी कि या तो वह इस्तीफा दे दें या अपनी इच्छा से रिटायरमेंट ले लें. वहीं, उनके ऐसा करने से मना करने पर तत्कालीन सीजेआई ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से कहा कि तत्काल प्रभाव से उन्हें न्यायिक कार्य से हटा दिया जाए जिसके बाद वह कथित तौर पर लंबी छुट्टी पर चले गए.

शुक्ला ने मार्च में मांगी थी काम करने की इजाज़त
जस्टिस शुक्ला ने 23 मार्च को सीजेआई गोगोई को पत्र लिख कर हाईकोर्ट में उन्हें न्यायिक कार्य करने की अनुमति देने का आग्रह किया. इस पत्र को इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने न्यायमूर्ति गोगोई को फॉरवर्ड किया था.

सीजेआई ने अपने पत्र में लिखा ये
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न्यायमूर्ति गोगोई ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा है, 'जस्टिस शुक्ला के खिलाफ आंतरिक जांच समिति ने गंभीर आरोप पाए हैं जो उन्हें हटाने की कार्यवाही शुरू करने के लिए पर्याप्त हैं, उन्हें किसी भी हाईकोर्ट में न्यायिक कार्य करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है. इन परिस्थितियों में आपसे आग्रह है कि आगे की कार्रवाई पर विचार करें.'

सीजेआई की चिट्ठी के बाद क्या हो सकती है कार्यवाही
उल्लेखनीय है कि सीजेआई जब किसी हाईकोर्ट के न्यायाधीश को हटाने के लिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखते हैं, तब राज्यसभा के सभापति सीजेआई से विचार-विमर्श कर तीन सदस्यीय एक जांच समिति नियुक्त करते हैं.

राज्यसभा के सभापति द्वारा नियुक्त समिति साक्ष्यों और रिकॉर्ड की जांच करती है और इस बारे में राय देती है कि यह उन्हें हटाने के लिए ऊपरी सदन में बहस हो या नहीं, के लिए क्या कोई आधार प्रदान करती है.

शुक्ला के खिलाफ क्या था मामला
जस्टिस शुक्ला हाईकोर्ट में एक खंडपीठ की अध्यक्षता कर रहे थे, जब उन्होंने शीर्ष न्यायालय की सीजेआई नीत पीठ के आदेशों का कथित उल्लंघन करते हुए निजी कॉलेजों को 2017-18 के शैक्षणिक सत्र में छात्रों को नामांकन देने की अनुमति दी.

जांच समिति की रिपोर्ट के मुताबिक न्यायमूर्ति शुक्ला ने 'न्यायिक मूल्यों को खत्म किया, एक न्यायाधीश के मुताबिक आचरण नहीं किया', 'अपने पद की गरिमा, मर्यादा और विश्वसनीयता को' कमतर किया और पद की शपथ का उल्लंघन किया.

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First published: June 23, 2019, 9:01 PM IST
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