CJI ने SC के दो अधिकारी किए बर्खास्त, अनिल अंबानी से जुड़े मामले के आदेश से की थी छेड़छाड़

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर 7 जनवरी को जो आदेश अपलोड किया गया उसमें लिखा कि कथित आरोपी की व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य नहीं है.

Utkarsh Anand | News18Hindi
Updated: February 14, 2019, 11:52 AM IST
CJI ने SC के दो अधिकारी किए बर्खास्त, अनिल अंबानी से जुड़े मामले के आदेश से की थी छेड़छाड़
अनिल अंबानी बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए थे
Utkarsh Anand | News18Hindi
Updated: February 14, 2019, 11:52 AM IST
कोर्ट की अवमानना को लेकर रिलायंस कम्युनिकेशंस के चेयरमैन अनिल अंबानी पर सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश से छेड़छाड़ में शामिल दो अधिकारियों को सीजेआई रंजन गोगोई ने बर्खास्त कर दिया है.

जांच में सामने आया था सुप्रीम कोर्ट के दो असिस्टेंट रजिस्ट्रारों ने आदेश की कॉपी से छेड़छाड़ की थी. सीजेआई ने बुधवार को दोनों अधिकारियों को बर्खास्त करने का आदेश जारी किया.

इस मामले की शिकायत जस्टिस रोहिंगटन एफ नरीमन ने की थी. वह अनिल अंबानी के खिलाफ अवमानना मामले की सुनवाई कर रहे थे. जस्टिस नरीमन ने शिकायत की थी कि अधिकारियों ने उनके स्टेटमेंट को शामिल किए बिना आदेश को सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया. मामले की जांच में दोनों अधिकारी दोषी पाए गए.



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संविधान के अनुच्छेद 311 और सेक्शन 11(13) के तहत सीजेआई के पास विशेष अधिकार होता है कि विशिष्ट परिस्थितियों में वह किसी भी कर्मचारी को बिना किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई के बर्खास्त कर सकते हैं. इस अधिकार का इस्तेमाल करते हुए सीजेआई ने दोनों अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया.

सुप्रीम कोर्ट में अंडरटेकिंग देने के बाद भी अनिल अंबानी ने एरिक्सन इंडिया का उधार नहीं चुकाया था. इस मामले में कोर्ट ने उन्हें अवमानना का नोटिस भेजा था.

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर 7 जनवरी को जो आदेश अपलोड किया गया उसमें लिखा कि कथित आरोपी की व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य नहीं है.
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जबकि नियम यह है कि जिस भी व्यक्ति के खिलाफ कोर्ट अवमानना का नोटिस भेजता है उसे एक बार कोर्ट में प्रस्तुत होकर बाद की तारीखों में उपस्थित नहीं होने के लिए अनुमति लेनी होती है. जस्टिस नरीमन ने यह साफ किया था कि अंबानी की उपस्थिति अनिवार्य है.

जस्टिस नरीमन ने 10 जनवरी को अपने आदेश की सही कॉपी वेबसाइट पर अपलोड करवाई जिसमें लिखा था कि अंबानी का कोर्ट में पेश होना अनिवार्य है. इसके बाद जस्टिस नरीमन ने सीजेआई से इसकी शिकायत की और जांच के बाद सीजेआई ने मानव शर्मा और तपन कुमार चक्रवर्ती को सेवा से बर्खास्त कर दिया.
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