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कर्नाटक: कांग्रेस नेताओं की नाराज़गी के बीच विभागों का बंटवारा, कुमारस्वामी के पास 11 मंत्रालय

कर्नाटक: कांग्रेस नेताओं की नाराज़गी के बीच विभागों का बंटवारा, कुमारस्वामी के पास 11 मंत्रालय

(फाइल फोटो- कुमारस्वामी)

(फाइल फोटो- कुमारस्वामी)

कांग्रेस के डी के शिवकुमार को सिंचाई, मेडिकल शिक्षा और परिवार कल्याण विभाग दिया गया है. वहीं, मंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज़ चल रहे कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष एमबी पाटिल को दिल्ली तलब किया गया है.

    कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस नेताओं के आपसी मनमुटाव के बीच मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने विभागों का बंटवारा कर दिया है. सीएम ने अपने पास कुल 11 मंत्रालय रखे हैं. इनमें वित्त और सिंचाई विभाग भी शामिल है. वहीं, कांग्रेस नेता और डिप्टी सीएम जी. परमेश्वर से इंटेलिजेंस विंग लेकर गृह मंत्रालय दिया गया है.

    इसके अलावा कांग्रेस के रमेश जरकीहोली को नगर निगम विभाग, सी पुत्तरंगा शेट्टी को पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग और जयमाला को महिला व शिशु विकास और कन्नड कल्चर विभाग दिए गए हैं. जबकि, जेडीएस के वेंकटराव को पशुपालन विभाग और निर्दलीय आर शंकर को वन व पर्यावरण मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली है.

    सूत्रों के मुताबिक, कर्नाटक में जेडीएस के साथ मिलकर सरकार बनाने वाली कांग्रेस पार्टी पर टूट का खतरा मंडरा रहा है. मंत्रिमंडल में जगह नहीं पाने वाले करीब एक दर्जन वरिष्‍ठ नेताओं ने बगावत का झंडा बुलंद किया और दावा किया कि यह हवाई धमकियां नहीं हैं.

    कर्नाटक: कुमारस्‍वामी सरकार पर मंडराया खतरा, नाराज़ कांग्रेसी MLA हुए बागी

    कांग्रेस पार्टी ने गठबंधन सरकार में एमबी पाटिल, दिनेश गुंडु राव, रामलिंगा रेड्डी, आर रौशन बेग, एचके पाटिल, तनवीर सैत, शामानूर शिवशंकरप्पा और सतीश जारखिहोली समेत पिछली सिद्धरमैया मंत्रिमंडल के कई अहम सदस्यों को नयी गठबंधन सरकार में जगह नहीं दी है. ये नेता काफी खफा हैं और इनके बीच काफी बैठकें हो चुकी हैं.


    वहीं, मंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज चल रहे कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष एमबी पाटिल को दिल्ली तलब किया गया है. कांग्रेस हाईकमान द्वारा तलब किए जाने के बाद वो दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं. पाटिल के समर्थन में पार्टी के सात से आठ विधायक हैं. माना जा रहा है कि ये नाराज विधायक भी पाटिल के साथ दिल्ली को रवाना हो गए हैं.



    इधर, कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने मंत्रिमंडल विस्तार से नाखुश चल रहे कांग्रेस विधायकों को शुक्रवार को समझाने-बुझाने की पहल की. उन्‍होंने कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व से समाधान तलाशने के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की है. मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने राज्य के प्रमुख कांग्रेस नेता एमबी पाटिल से मुलाकात की, जिनके नेतृत्व में असंतुष्ट पार्टी विधायक बैठकें कर रहे हैं.

    कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस के 'दोस्ती' से एचडी कुमारस्वामी ने 23 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. इसके 8 दिन बाद आखिरकार कांग्रेस-जेडीएस के बीच विभागों के बंटवारे को लेकर सहमति बनी थी. दोनों दलों में सहमति बनी थी कि कर्नाटक कैबिनेट में जेडीएस-कांग्रेस बराबर-बराबर पोर्टफोलियों रखेंगे. वित्त मंत्रालय जेडीएस के पास रहेगा, जबकि कांग्रेस गृह मंत्रालय अपने पास रखेगी. दोनों पार्टियों ने ऐलान किया था कि जेडीएस-कांग्रेस मिलकर 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ेगी.

    कांग्रेस को मिले ये मंत्रालय और विभाग
    गृह, बेंगलुरु सिटी डेवलपमेंट, उद्योग और चीनी उद्योग, स्वास्थ्य, राजस्व, शहरी विकास, ग्रामीण विकास, कृषि, आवास, चिकित्सीय शिक्षा, सामाजिक कल्याण, वन और पर्यावरण, श्रम, खनन और भूगर्भ, महिला और बाल कल्याण, खाद्य और नागरिक आपूर्ति, हज/वक्फ और अल्पसंख्यक मामले, कानून और संसदीय मामले, विज्ञान और तकनीकी, खेल और युवा मामले, बंदरगाह और परिवहन विकास

    जेडीएस को मिले ये विभाग
    सूचना (जीएडी, इंटेलीजेंस, प्लानिंग), वित्त, पीडब्ल्यूडी, बिजली, को-ऑपरेशन, पर्यटन, शिक्षा, पशुपालन और मछलीपालन, बागवानी और रेशम के कीड़ों का पालन, लघु उद्योग, परिवहन, माइनर इरिगेशन.

    इससे पहले सीएम कुमारस्वामी ने कहा था, "कांग्रेस और जेडीएस नेता मंत्री पद बंटवारे के अलावा लगभग हर मुद्दे पर सहमत हो गए हैं. राहुल गांधी ने कुछ सलाह दी थी जिसे कांग्रेस के नेताओं ने मान ली है." कुमारस्वामी ने यह भी कहा कि प्रदेश में गठबंधन सरकार स्थिर होगी और पूरे पांच साल का अपना कार्यकाल पूरा करेगी.

    Tags: Karnataka Election 2018

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