नंदीग्राम में शुभेंदु से मिली हार को ममता ने कलकत्ता HC में दी चुनौती, आज ही होनी है सुनवाई

शुवेंदु अधिकारी और ममता बनर्जी . (फाइल फोटो)

पश्चिम बंगाल चुनाव में चुनाव आयोग ने नंदीग्राम निर्वाचन क्षेत्र से शुभेंदु अधिकारी को विजेता और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी को उपविजेता घोषित किया था.

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    कोलकाता. पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट में एक चुनावी याचिका दायर की है और मामले को शुक्रवार को एकल पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है. हाईकोर्ट द्वारा बृहस्पतिवार को वेबसाइट पर जारी वाद-सूची के अनुसार, इस मामले को न्यायमूर्ति कौशिक चंद की अदालत के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से ‘उल्लेखित किये जाने’ के तौर पर लिया जाना है.

    चुनाव आयोग ने नंदीग्राम निर्वाचन क्षेत्र से अधिकारी को विजेता और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष बनर्जी को उपविजेता घोषित किया था. बनर्जी ने ईवीएम मशीनों से छेड़छाड़ और चुनाव आयोग के संबंधित अधिकारी द्वारा दोबारा मतगणना की मांग को ठुकराने का आरोप लगाते हुए नतीजों की घोषणा के बाद कहा था कि इस मुद्दे को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा. भाजपा विधायक अधिकारी वर्तमान समय में पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं.

    ममता के लिए अहम क्यों है नंदीग्राम?
    नंदीग्राम पुरबा मेदिनीपुर में स्थित एक छोटा सा शहर है. साल 2007 में वामदल की सरकार द्वारा औद्योगिक उद्देश्यों के लिए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ इस क्षेत्र में हिंसक आंदोलन हुआ था. जिसेक बाद पुलिस फायरिंग में 14 लोगों की मौत हो गई और इसके परिणामस्वरूप मार्क्सवादी सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विद्रोह हुआ.

    इसके बाद बनर्जी ने नंदीग्राम को वामपंथियों  के खिलाफ अपनी तीन दशक पुरानी भयंकर लड़ाई के प्रतीक के रूप में बदल दिया. नतीजा यह हुआ कि 2011 में 34 साल पुरानी मार्क्सवादी सरकार को जनता ने नकार दिया और टीएमसी ने जीत दर्ज की.

    अधिकारी ने नंदीग्राम सीट 1,956 मतों से जीती थी, जिससे ममता को 32 वर्षों में पहली चुनावी हार का सामना करना पड़ा. अधिकारी पिछले साल भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे और अपनी जीत के बाद, बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता बने.



    बंगाल चुनाव में प्रचंड जीत के बाद ममता बनर्जी ने लगातार तीसरी बार जीत हासिल की. हालांकि नंदीग्राम में उन्हें खुद एक छोटे अंतर से हार का सामना करना पड़ा. मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने रहने के लिए, बनर्जी को छह महीने के भीतर उपचुनाव लड़ना होगा और राज्य विधानसभा का सदस्य बनना होगा.

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