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इतनी सर्दी में कैसे टूटा ग्लेशियर? DRDO जुटा रहा है जानकारी, इसरो से भी मांगी गई मदद

उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्‍लेशियर फटने से भारी तबाही मची है. 150 से ज्‍यादा लोग लापता हैं.
उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्‍लेशियर फटने से भारी तबाही मची है. 150 से ज्‍यादा लोग लापता हैं.

Uttarakhand Glacier Burst: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि हिमखंड के टूटने के कारण शायद चमोली की त्रासदी हुई, अधिक जानकारी के लिए डीआरडीओ, इसरो तथा अन्य एजेंसियों के विशेषज्ञों को काम में लगाया जा रहा.

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नई दिल्ली/देहरादून. आखिर इतनी ठंड में उत्तराखंड में ग्लेशियर कैसे टूटा इसे लेकर कई विशेषज्ञ भी हैरान हैं. इस हाड़ कंपा देने वाली ठंड में ग्लेशियर का टूटने को लेकर रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) जानकारी जुटाने में लगा हुआ है. इसरो (ISRO) से भी इसे लेकर जानकारी मांगी गई है. दरअसल, उत्तराखंड के चमोली में आए इस भीषण आपदा में अबतक 19 लोगों की जान जा चुकी है जबकि एक टनल में कई लोग फंसे हुए हैं.

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राज्य के बाढ़ प्रभावित चमोली और आसपास के इलाकों में जारी राहत अभियानों के बीच सोमवार को कहा कि पूरी घटना की व्यापक जांच की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों से बचा जा सके.

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समय सबसे पहली प्राथमिकता प्रभावित लोगों को भोजन और अन्य सहायता मुहैया कराना है. रावत ने 'पीटीआई-भाषा' को दिये साक्षात्कार में कहा, 'ऐसा प्रतीत होता है कि घटना ग्लेशियर के टूटने से हुई. मुख्य सचिव को वास्तविक कारणों का पता लगाने का निर्देश दिया गया है.' सीएम रावत  ने कहा, "डीआरडीओ की एक टीम इस त्रासदी का कारण पता लगाने में जुटी है. हमने इसके लिए इसरो के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों से भी मदद मांगी है."




रावत ने कहा कि इस घटना के कारणों का पता लगाने के लिए चल रहे व्यापक विश्लेषण के बाद, ’’हम भविष्य में ऐसी किसी भी संभावित त्रासदी से बचने के लिए एक योजना बनाएंगे.’’ राहत कार्यों के बारे में पूछे जाने पर रावत ने कहा कि वे पूरी शिद्दत से चल रहे हैं. उन्होंने कहा, "हमने बचाव और राहत अभियान के लिए सभी आवश्यक प्रबंध किये हैं. साथ ही साथ प्रभावित लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं भी प्रदान की जा रही हैं. सबसे महत्वपूर्ण, हम प्रभावित गांवों के बीच दोबारा संपर्क स्थापित करने का काम कर रहे हैं."

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जल्द ही किया जाएगा आर्थिक नुकसान का आकलन
रावत ने कहा कि जल्द ही आर्थिक नुकसान का आकलन किया जाएगा. फिलहाल शीर्ष प्राथमिकता, जहां तक संभव हो लोगों की जान बचाना और अपने घरों से विस्थापित हुए लोगों का पुनर्वास करना है. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने कहा कि वह खुद राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं, इसके अलावा केंद्र, कई राज्यों ने भी मदद की पेशकश की है.

रावत ने बताया कि त्रासदी के बाद से प्रधानमंत्री मोदी लगातार हमारे संपर्क में हैं और उन्होंने उत्तराखंड को हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया है.



उत्तराखंड के चमोली जिले के जोशीमठ में रविवार को नंदा देवी ग्लेशियर का एक भाग टूट गया था जिससे अलकनंदा नदी में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई थी. घटना के एक दिन बाद सोमवार को कई एजेंसियां संयुक्त रूप से पीड़ितों की तलाश में जुटी हैं.
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