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सिन्हा की डायरी से खुला राज, कोलगेट के आरोपियों से मिलते थे पूर्व CBI चीफ!

सीबीआई के पूर्व निदेशक रंजीत सिन्हा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि प्रथम दृष्टया ये लगता है कि रंजीत सिन्हा बतौर सीबीआई निदेशक कोयला खदान घोटाले के कई आरोपियों से मिले।
सीबीआई के पूर्व निदेशक रंजीत सिन्हा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि प्रथम दृष्टया ये लगता है कि रंजीत सिन्हा बतौर सीबीआई निदेशक कोयला खदान घोटाले के कई आरोपियों से मिले।

सीबीआई के पूर्व निदेशक रंजीत सिन्हा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि प्रथम दृष्टया ये लगता है कि रंजीत सिन्हा बतौर सीबीआई निदेशक कोयला खदान घोटाले के कई आरोपियों से मिले।

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नई दिल्ली। सीबीआई के पूर्व निदेशक रंजीत सिन्हा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि प्रथम दृष्टया ये लगता है कि रंजीत सिन्हा बतौर सीबीआई निदेशक कोयला खदान घोटाले के कई आरोपियों से मिले। हो सकता है कि उन्होंने जांच को भी प्रभावित किया हो। अब सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि इस रिपोर्ट के आधार पर रंजीत सिन्हा के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज होगा या नहीं।

सीबीआई के पूर्व निदेशक रंजीत सिन्हा के कार्यकाल में सीबीआई के जिम्मे दो महत्वपूर्ण मामले आए। पहला टेलिकॉम घोटाला और दूसरा कोयला खदान आबंटन घोटाला। जांच की रफ्तार ऐसी थी कि सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को पिंजड़े का तोता कह डाला। दोनों ही मामलों की जांच पर अंगुलियां उठीं। आरोप लगा कि रंजीत सिन्हा जांच को प्रभावित कर रहे हैं। नाराज सुप्रीम कोर्ट ने रंजीत सिन्हा को टेलिकॉम घोटाले की जांच से अलग कर दिया था। अब पौने दो लाख करोड़ रुपये के कोयला खदान आबंटन घोटाले में भी उन पर शिकंजा कसता नज़र आ रहा है। तत्कालीन निदेशक रंजीत सिन्हा के घर पर एक डायरी थी, जिसमें हर आने जाने वाले की इंट्री की जाती थी।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एम.एल शर्मा कमेटी ने इस डायरी की जांच की और अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है। हालांकि इस रिपोर्ट को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन मंगलवार को एटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट को इस रिपोर्ट के बारे में अवगत कराया।



एटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कोर्ट को बताया कि रंजीत सिन्हा के घर पर रखी डायरी जिसकी जांच की गई, वो जेनविन है। इसमें रंजीत सिन्हा से मिलने वालों का नाम दर्ज है। रंजीत सिन्हा ने कोयला खदान आबंटन घोटाले के कई आरोपियों से मुलाकात की। ऐसा लगता है कि कुछ मामलों में रंजीत सिन्हा ने जांच को प्रभावित किया होगा। हालांकि एटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने रंजीत सिन्हा का बचाव भी किया। रोहतगी का कहना है कि इस रिपोर्ट में जो तथ्य मौजूद हैं वो नाकाफी हैं। सिर्फ शर्मा कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर रंजीत सिन्हा के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सकता।
रंजीत सिन्हा के वकील का कहना है कि उन्होंने जिन आरोपियों से मुलाकात की, वो उनके काम का हिस्सा था। लेकिन शिकायतकर्ता प्रशांत भूषण का कहना है कि कम से कम मुकदमा दर्ज कर इस बात की जांच होनी चाहिए कि तत्कालीन सीबीआई निदेशक ने घोटाले के आरोपियों की मदद की या नहीं। अब सुप्रीम कोर्ट आगे ये तय करेगा कि रंजीत सिन्हा पर कोई मुकदमा दर्ज होगा या नहीं। रंजीत सिन्हा 2014 में सीबीआई के निदेशक के पद से रिटायर हो चुके हैं।
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