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कोयला स्कैम: दोषी अफसरों के खिलाफ फैसला सुरक्षित, 5 को होगा सजा का ऐलान

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

मामला पश्चिम बंगाल में मोइरा और मधुजोर (उत्तर और दक्षिण) कोयला ब्लॉकों का वीएमपीएल को किए आवंटन में कथित तौर पर अनियमितता पाए जाने से जुड़ा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 3, 2018, 2:10 PM IST
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कोयला घोटाला मामले में दोषी करार दिए गए पूर्व कोयला सचिव एच सी गुप्ता समेत दो अन्य को सजा की पर सोमवार को पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई हुई. स्पेशल सीबीआई जज भारत पराशर ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. अब इस मामले में 5 दिसंबर को कोर्ट फैसला सुनाएगा.

मामला पश्चिम बंगाल में मोइरा और मधुजोर (उत्तर और दक्षिण) कोयला ब्लॉकों का वीएमपीएल को किए आवंटन में कथित तौर पर अनियमितता पाए जाने से जुड़ा है. कोयला घोटाले के इस मामले में सीबीआई के जरिए सितंबर 2012 में एफआईआर दर्ज की गई थी.

कोयला मंत्रालय के पूर्व सचिव एच सी गुप्ता, कोयला मंत्रालय में उस समय के संयुक्त सचिव के एस क्रोफा, कोयला मंत्रालय के रिटायर्ड निदेशक के सी समरिया, निजी कंपनी विकाश मेटल्स एंड पावर लिमिटेड के प्रमोटर विकाश पटनी, विकाश मेटल्स एंड पावर लिमिटेड के प्रमोटर विकाश पटनी के सहयोगी आनंद मलिक की सजा पर फैसला सुरक्षित रखा गया है.




गुप्ता, 31 दिसंबर, 2005 से नवम्बर 2008 तक कोयला सचिव रहे थे. उन्हें दो अन्य ऐसे ही मामलों में भी दोषी ठहराया जा चुका है। इसमें उन्हें दो और तीन सालों की सजा सुनाई भी जा चुकी है. वह इस समय जमानत पर बाहर चल रहे है.
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कोयला घोटाले से जुड़े इस मामले में विशेष सीबीआई जज भरत पाराशर ने गुप्ता के साथ ही निजी कंपनी विकास मेटल्स एंड पावर लिमिटेड, एक सेवारत और एक सेवानिवृत्त नौकरशाह कोयला मंत्रालय में पूर्व संयुक्त सचिव के एस क्रोफा और कोयला मंत्रालय में तत्कालीन निदेशक (सीए-1) केसी सामरिया को दोषी करार दिया गया है. साथ ही कोर्ट के जरिए कंपनी के प्रबंध निदेशक विकास पटानी, उसके अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता आनंद मलिक को भी दोषी ठहराया गया है.

क्रोफा, उस समय कोयला मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर थे और वह मेघालय के मुख्य सचिव के पद से दिसम्बर 2017 में सेवानिवृत्त हो गये थे. उन्हें एक अन्य मामले में पहले ही दोषी करार देकर दो साल की सजा सुनाई जा चुकी है. क्रोफा भी इस समय जमानत पर बाहर चल रहे हैं.

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विशेष सीबीआई जज भरत पराशर द्वारा फैसला सुनाये जाने के बाद सभी दोषियों को हिरासत में ले लिया गया. दोषियों की सजा की अवधि पर अदालत में सोमवार को बहस होगी. इस मामले में दोषियों को अधिकतम सात साल कैद की सजा हो सकती है.
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