कोल स्कैम: पूर्व कोयला सचिव सहित तीन अधिकारियों को तीन-तीन साल की सजा

प्रतीकात्मक
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यह मामला पश्चिम बंगाल में मोइरा और मधुजोर कोयला खदानों को विकास मेटल्स एडं पावर लिमिटेड (वीएमपीएल) को देने में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 5, 2018, 3:16 PM IST
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कोयला घोटाले से संबंधित एक मामले में दिल्ली की अदालत ने पूर्व कोयला सचिव एससी गुप्ता को तीन साल की सजा सुनाई है. कोर्ट ने अन्य नौकरशाह ए क्रोफा और केसी समारिया को भी तीन-तीन साल की सजा सुनाई. हालांकि कोर्ट ने इसके साथ ही गुप्ता, क्रोफा और केसी समारिया की जमानत मंजूर कर ली है.

कोर्ट ने इसके अलावा विकास मेटल्स एंड पावर लिमिटेड (वीएमपीएल) के प्रबंध निदेशक विकास पाटनी और कंपनी के अधिकृत हस्ताक्षरी आनंद मलिक को चार-चार साल जेल की सजा सुनाई गई. अदालत ने कंपनी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है.

बता दें कि एससी गुप्ता, 31 दिसंबर, 2005 से नवंबर 2008 तक कोयला सचिव रहे थे. उन्हें दो अन्य ऐसे ही मामलों में भी दोषी ठहराया जा चुका है. इसमें उन्हें दो और तीन सालों की सजा सुनाई भी जा चुकी है. वह इस समय जमानत पर बाहर चल रहे है.



वहीं क्रोफा, उस समय कोयला मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर थे और वह मेघालय के मुख्य सचिव के पद से दिसंबर 2017 में रिटायर हो गए थे. उन्हें एक अन्य मामले में पहले ही दोषी करार देकर दो साल की सजा सुनाई जा चुकी है. क्रोफा भी इस समय जमानत पर बाहर चल रहे हैं.
पश्चिम बंगाल में मोइरा और मधुजोर (उत्तर और दक्षिण) कोयला खदानों को विकास मेटल्स एडं पावर लिमिटेड (वीएमपीएल) को देने में कथित अनियमितताओं से जुड़ा यह मामला केंद्र में यूपीए सरकार के दौरान का है. सीबीआई ने सितंबर 2012 में इस मामले में एक प्राथमिकी दर्ज की थी. वीएमपीएल के प्रबंध निदेशक विकास पाटनी और उनके अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता आनंद मलिक भी इसमें दोषी ठहराये गए हैं. सभी लोगों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत अपराधी माना गया. इनमें धारा 420 (धोखाधड़ी) और 102-बी (आराधिक षड्यंत्र) शामिल है. (भाषा इनपुट के साथ)
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