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कोयला घोटाला: आरोपियों से मिलते थे सीबीआई के पूर्व निदेशक रंजीत सिन्‍हा!

अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा, ‘‘जब तक अदालत में इस बात के सबूत न पेश हों कि विजिटर रजिस्टर सही था, तब तक हम मामले में आगे नहीं बढ़ सकते.’’
अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा, ‘‘जब तक अदालत में इस बात के सबूत न पेश हों कि विजिटर रजिस्टर सही था, तब तक हम मामले में आगे नहीं बढ़ सकते.’’

अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा, ‘‘जब तक अदालत में इस बात के सबूत न पेश हों कि विजिटर रजिस्टर सही था, तब तक हम मामले में आगे नहीं बढ़ सकते.’’

  • Bhasha
  • Last Updated: July 12, 2016, 10:01 PM IST
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सीबीआई के निदेशक रहे रंजीत सिन्हा की ओर से कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले की जांच में अड़ंगे लगाने के आरोपों की छानबीन के लिए शीर्ष न्यायालय की ओर से गठित एम एल शर्मा समिति ने सिन्हा को दोषी ठहराया है और कहा है कि इस मामले में प्रथम दृष्टया जांच को प्रभावित करने की कोशिश की गई.

न्यायालय ने संप्रग सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए कोयला घोटाले की धीमी जांच के लिए सीबीआई की भी खिंचाई की और मामले की जांच जल्द से जल्द करने के निर्देश दिए. ‘कोलगेट’ के नाम से चर्चित हुए इस घोटाले की जांच की निगरानी कर रहे सुप्रीम कोर्ट को अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने बताया कि सीबीआई के पूर्व विशेष निदेशक एम एल शर्मा की अध्यक्षता वाली समिति ने कहा है कि घोटाले के कुछ हाई-प्रोफाइल आरोपियों से सिन्हा की मुलाकातें प्रथम दृष्टया इस बात की ओर इशारा करती हैं कि छानबीन को प्रभावित करने की कोशिश की गई.

गोपनीयता बनाए रखने की शर्त पर अध्ययन के लिए समिति की अंतिम रिपोर्ट हासिल करने वाले रोहतगी ने कहा कि उन्होंने रिपोर्ट का अध्ययन किया है, जिसमें पाया गया है कि सिन्हा के आवास की विजिटर डायरी सही थी. बहरहाल, उन्होंने कहा कि विजिटर डायरी की एंट्रियों की प्रामाणिकता सबूतों के जरिए अदालत में ही पता लगाई जा सकती है .



रोहतगी ने कहा, ‘‘जब तक अदालत में इस बात के सबूत न पेश हों कि विजिटर रजिस्टर सही था, तब तक हम मामले में आगे नहीं बढ़ सकते.’’ सिन्हा की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि रजिस्टर या डायरी की एंट्रियों के संदेहास्पद या काल्पनिक थीं, क्योंकि सीबीआई के पूर्व निदेशक उन दिनों कई दिन तक दिल्ली में नहीं थे.
सिंह ने कहा, ‘‘ऐसा एक भी मामला नहीं है जिसमें मैंने (सिन्हा ने) कोयला से जुड़े मामलों को बंद करने में जांच अधिकारियों के उलट कोई फैसला किया हो.’’ इन दलीलों पर गौर करते हुए न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति ए के सीकरी की पीठ ने निर्देश पारित करने के लिए अपना आदेश सुरक्षित रख लिया.

जांच में धीमी प्रगति के लिए सीबीआई की खिंचाई करते हुए न्यायालय ने कहा, ‘‘हम आपको (सीबीआई को) बार-बार कहते रहे हैं कि जांच पूरी करें. हर बार आप कहते हैं कि एक महीने के भीतर पूरी कर लेंगे. पिछली बार आपने कहा था कि आप 30 जून तक जांच पूरी कर लेंगे. लेकिन अब तक आपने ऐसा नहीं किया. कृपया इसे जल्द से जल्द पूरा करें.’’ सुनवाई के दौरान एनजीओ ‘कॉमन कॉज’ की तरफ से पेश हुए जानेमाने वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि समिति के मुताबिक रंजीत सिन्हा की विजिटर डायरी सही पाई गई है और यह साफ है कि उन्होंने कोयला घोटाले के कई आरोपियों से मुलाकात की, जिसने उनके फैसलों को प्रभावित किया .

भूषण ने कहा कि पूरे मामले की जांच होनी चाहिए. उन्होंने इसके लिए एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित करने की भी मांग की. उन्होंने कहा, ‘‘इस न्यायालय को एक तरह की एसआईटी गठित करनी चाहिए. शर्मा एसआईटी के प्रमुख हो सकते हैं और उन्हें दो-तीन अधिकारी मुहैया कराए जा सकते हैं. शर्मा समिति की रिपोर्ट मामले के सभी पक्षों को दी जानी चाहिए और वे अपनी आपत्तियां दाखिल कर सकते हैं.’’ कोयला ब्लॉकों के आवंटन से जुड़ी फाइलें गायब होने के बाबत केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने सीबीआई को क्लीन चिट दी और कहा है कि इस मुद्दे पर सीबीआई की तरफ से कोई आपराधिक हरकत नहीं हुई है.

सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त समिति सिन्हा द्वारा कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले की जांच में कथित तौर पर अड़ंगे लगाने के आरोपों की जांच कर रही है. आरोपियों से सिन्हा की मुलाकातों को ‘‘पूरी तरह अनुचित’’ करार दिया जा चुका है . इससे पहले, न्यायालय को शर्मा समिति की एक अंतरिम रिपोर्ट हासिल हुई थी और इसकी गोपनीयता बरकरार रखते हुए अटॉर्नी जनरल को अध्ययन करने के लिए सौंपी गई थी .

रिपोर्ट की प्रति अटॉर्नी जनरल को दी गई थी क्योंकि पीठ उस वक्त उनकी सहायता चाह रही थी जब शर्मा समिति ने कुछ मामलों की शुरूआती जांच से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए उच्चतम न्यायालय के निर्देश मांगे थे .
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