भारतीय तट रक्षकों ने कपड़े की अवैध खेप वाली बांग्लादेशी नाव सुंदरबन पुलिस को सौंपी

भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय नौवहन सीमा रेखा के निकट भारतीय तट रक्षकों ने बांग्‍लादेशी नाव को पकड़ा है. ( सांकेतिक चित्र )

भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय नौवहन सीमा रेखा के निकट भारतीय तट रक्षकों ने बांग्‍लादेशी नाव को पकड़ा है. ( सांकेतिक चित्र )

भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय नौवहन सीमा रेखा के निकट भारतीय तट रक्षकों ने बांग्‍लादेशी नाव को पकड़ा है. इसमें कपड़ों की अवैध खेप रखी हुई थी. खुफिया सूचना के आधार पर चलाई गई समुद्री-हवाई समन्वित अभियान में यह सफलता मिली है. सुंदरबन की पुलिस मामले की जांच में जुट गई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 19, 2021, 5:40 PM IST
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नई दिल्‍ली. भारतीय तट रक्षक (आईसीजी) ने शुक्रवार को मछली पकड़ने वाली एक ऐसी बांग्लादेशी नाव को पकड़ा. जिसमें कपड़ों की कुछ अवैध खेप रखी थीं. आईसीजी ने संयुक्त जांच के लिए नाव को सुंदरबन पुलिस के सुपुर्द कर दिया. जबकि नाव के सवार सदस्‍य भाग निकलने में कामयाब रहे.

इस संबंध में आईसीजी ने गुरुवार को ट्वीट कर बताया कि खुफिया सूचना के आधार पर समुद्री-हवाई समन्वित अभियान चलाया गया और मंगलवार को ‘नूरानी’ नामक एक नाव को भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय नौवहन सीमा रेखा के निकट रोका गया.

ट्वीट में आईसीजी ने बताया, 'नौका उथले पानी में रोकी गई और इसके चालक दल के सदस्य भाग निकले.' उन्होंने बताया कि नौका में कपड़ों की अवैध खेप रखी थीं. शुक्रवार को आईसीजी ने ट्विटर पर कहा कि अवैध कपड़ों की खेप के साथ ही नाव को संयुक्त जांच के लिए सुंदरबन की पुलिस को सौंप दिया गया है.

सीमा रेखा के निकट कफ सीरप और नशे की होती है तस्‍करी
भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय नौवहन सीमा रेखा के निकट पानी के रास्‍ते नशे की तस्‍करी भी होती है. इसके जरिए कफ सीरप भी सीमा पार पहुंचाया जाता है. अधिकारियों की मानें तो तस्करों का एक ग्रुप भारत में बैठा होता है तो दूसरा बांग्लादेश में. भारत में बैठा ग्रुप थर्माकोल या फिर बांस की मदद से शीशियों से भरे बैग को नदी में बहाता है. किसी को दिखाई न दे, इसलिए यह काम सूरज छिपने के बाद होता है. दोनों ग्रुप अपनी टाइमिंग सेट करने के बाद नदी किनारे आ जाते हैं. भारत में बैठा ग्रुप सामान के ऊपर सस्ता वाला एक मोबाइल बांध देते हैं. इस मोबाइल का काम यह होता है कि जैसे ही सामान भारतीय इलाके से बांग्लादेश में एंट्री करता है तो भारत में बैठा ग्रुप सामान पर बंधे मोबाइल पर घंटी देना शुरू कर देता है.

इससे होता यह है कि मोबाइल की लाइट जलने लगती है और आवाज भी होने लगती है. लाइट जलने से अंधेरे में भी बांग्लाादेश वाले ग्रुप को नदी में सामान दिखाई दे जाता है. वो फौरन नदी में नाव डालकर सामान तक पहुंच जाते हैं.

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