केरल की यूनिवर्सिटी में छात्रों को नहीं मिली सरस्वती पूजा की इजाजत, VC ने परिसर को बताया धर्मनिरपेक्ष

केरल की यूनिवर्सिटी में छात्रों को नहीं मिली सरस्वती पूजा की इजाजत, VC ने परिसर को बताया धर्मनिरपेक्ष
केरल की यूनिवर्सिटी में छात्रों को नहीं मिली सरस्वती पूजा की इजाजत, VC ने परिसर को बताया धर्मनिरपेक्ष

बसंत पंचमी के दिन 'सरस्वती पूजा' का त्‍योहार मनाया जाता है. बसंत पंचमी 9 फरवरी को है जिस दिन मां सरस्वती की पूजा का विशेष महत्‍व होता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 7, 2019, 3:02 PM IST
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केरल में कोच्चि की एक यूनिवर्सिटी ने उत्तर भारतीय छात्रों को कैंपस में सरस्वती पूजा की अनुमति नहीं दी है. यूनिवर्सिटी का कहना है कि हमारा कैंपस धर्मनिरपेक्ष है और हम अपने परिसर में ऐसी किसी भी धार्मिक गतिविधियों की इजाजत नहीं दी जा सकती है. मामला कोच्चि यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ इंजिनियरिंग के कुट्टनड़ कैंपस का है, जहां कुछ छात्रों ने 25 जनवरी को वीसी को खत लिख बसंत पंचमी के मौके पर सरस्वती पूजा करने की इजाजत मांगी थी, जिसे सिरे से खारिज कर दिया गया.

बसंत पंचमी के दिन 'सरस्वती पूजा' का त्‍योहार मनाया जाता है. बसंत पंचमी 9 फरवरी को है जिस दिन मां सरस्वती की पूजा का विशेष महत्‍व होता है.


मां सरस्वती का दिन होने के कारण इस दिन पढ़ाई-लिखाई की शुरुआत की जाती है. छोटे बच्चों को इस दिन अक्षरों से परिचय कराया जाता है और माना जाता है कि इससे वे अकादमिक में अच्छे होते हैं. किसी दूसरे काम के लिए भी इस दिन शुरुआत करने को शुभ मानते हैं. इस त्योहार पर पीले रंग का महत्व बताया गया है क्योंकि बसंत का पीला रंग समृद्धि, ऊर्जा, प्रकाश और आशावाद का प्रतीक है. इसलिए इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनते और व्यंजन बनाते हैं.
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