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नेहरू-पटेल को लेकर एस. जयशंकर के बयान पर छिड़ी ट्विटर वॉर, रामचंद्र गुहा और जयराम रमेश ने किया पलटवार

News18Hindi
Updated: February 13, 2020, 5:38 PM IST
नेहरू-पटेल को लेकर एस. जयशंकर के बयान पर छिड़ी ट्विटर वॉर, रामचंद्र गुहा और जयराम रमेश ने किया पलटवार
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नेहरू-पटेल को लेकर टिप्‍पणी की तो इतिहासकार रामचंद्र गुहा और कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने उन पर पलटवार किया.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) ने इतिहासकार नारायणी बसु की किताब 'वीपी मेनन' का हवाला देते हुए ट्वीट किया कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू (Pt. Jawaharlal Nehru ) 1947 में सरदार वल्‍लभ भाई पटेल (Vallabhbhai Patel) को पहली कैबिनेट में शामिल नहीं करना चाहते थे. कांग्रेस (Congress) ने किताब में किए गए दावे को 1947 में लिखी गई कुछ चिट्ठियों के हवाले से झूठ करार दिया है.

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  • Last Updated: February 13, 2020, 5:38 PM IST
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नई दिल्‍ली. देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू (Pt. Jawaharlal Nehru ) और पहले गृह मंत्री सरदार वल्‍लभ भाई पटेल (Vallabhbhai Patel) को लेकर दिए विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) के एक बयान से ट्विटर पर जंग छिड़ गई है. उन्‍होंने एक किताब का हवाला देते हुए दावा किया नेहरू 1947 में अपनी कैबिनेट में पटेल को शामिल नहीं करना चाहते थे. नेहरू ने कैबिनेट की पहली लिस्ट से पटेल को बाहर भी कर दिया था. कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता जयराम रमेश के साथ ही इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने किताब में किए गए इस दावे को गलत बताते हुए नेहरू की ओर से माउंटबेटन को लिखी चिट्ठी शेयर की है, जिसमें पटेल का नाम कैबिनेट लिस्ट में सबसे ऊपर रखा गया था.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने लिखा- इस मुद्दे पर बहस की है जरूरत
एस. जयशंकर ने ट्वीट में लिखा कि निश्चित तौर पर इस मुद्दे पर बहस की जरूरत है. मैंने पाया कि लेखक इस खुलासे पर कायम थीं. बता दें कि भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले वीपी मेनन की जीवनी पर नारायणी बसु की लिखी किताब 'वीपी मेनन' का जयशंकर ने विमोचन किया था. जयशंकर ने एक ट्वीट में लिखा है कि राजनीति का इतिहास लिखने के लिए ईमानदार होना होता है. उन्होंने इसी ट्वीट में किताब में मेनन के शब्दों को ट्वीट करते हुए लिखा है, 'जब सरदार पटेल का निधन हुआ, तो उनकी स्मृतियों को मिटाने का बड़ा अभियान शुरू हुआ. मुझे यह पता था, क्योंकि मैंने यह देखा था और मैं उस समय खुद को पीड़ित महसूस करता था.'

दावा- महात्‍मा गांधी और माउंटबेटन की मुलाकात के बाद जोड़ा नाम वीपी मेनन: द अनसंग आर्किटेक्‍ट ऑफ मॉडर्न इंडिया की लेखक, इतिहासकार व विश्‍लेषक नारायणी बसु (Historian Narayani Basu) वीपी मेनन की प्रपौत्री हैं. किताब में दावा किया गया है कि नेहरू ने आजादी के बाद वायसराय लॉर्ड लुईस माउंटबेटन (Louis Mountbatten) को सौंपी पहली कैबिनेट की सूची में पटेल को शामिल नहीं किया था. इस पर वीपी मेनन माउंटबेटन के पास गए और कहा कि अगर आपने इस सूची को मंजूरी दी तो उत्‍तराधिकार की जंग छिड़ जाएगी. कांग्रेस दो हिस्‍सों में बंट जाएगी. फिर माउंटबेटन और महात्‍मा गांधी (Mahatma Gandhi) की मुलाकात के बाद सरदार पटेल का कैबिनेट में शामिल किया गया था. मेनन ब्रिटिश शासनकाल में सिविल सर्वेंट थे. वह कई वायसराय के राजनीतिक सुधार आयुक्‍त रहे थे. वह पटेल के काफी करीबी माने जाते थे.

जयशंकर और रामचंद्र गुहा ने ट्विटर पर किया वार-पलटवार
जयशंकर के इस ट्वीट पर प्रसिद्ध इतिहासकार रामचंद्र गुहा (Historian Ramchandra Guha) ने निशाना साधा. उन्‍होंने जयशंकर को इसकी चिंता छोड़ने की सलाह दे डाली. उन्होंने ट्वीट किया, 'यह एक मिथक है. प्रोफेसर श्रीनाथ राघवन अपने लेख के जरिये इस दावे को गलत ठहरा चुके हैं. इस बारे में झूठा प्रचार करना विदेश मंत्री का काम नहीं है. उन्हें यह काम बीजेपी (BJP) के आईटी सेल के लिए छोड़ देना चाहिए.' गुहा के इस ट्वीट पर जयशंकर ने पलटवार किया, 'कुछ विदेश मंत्री किताबें भी पढ़ते हैं. यह कुछ प्रोफेसर के लिए भी अच्छी बात हो सकती है. इस मामले में मैं आपको कल रिलीज की गई किताब पढ़ने की सलाह देता हूं.'

रामचंद्र गुहा ने जयशंकर को किताबें फिर पलटने को कहा
विदेश मंत्री के जवाब पर फिर पलटवार करते हुए गुहा ने लिखा, 'सर, आपने जेएनयू से पीएचडी की है. निश्चित तौर पर आपने मुझसे ज्‍यादा ही किताबें पढ़ी होंगी. उनमें निश्चित तौर पर नेहरू और पटेल की एकदूसरे को लिखी गई चिट्ठियों को प्रकाशित किया गया होगा. उन चिट्ठियों से स्‍पष्‍ट हो जाएगा कि किस तरह नेहरू पटेल को अपनी पहली कैबिनेट में सबसे मजबूत स्‍तंभ के तौर पर शामिल करना चाहते थे. आपने जिन किताबों को पढ़ा है, उन्‍हें फिर से पलट लीजिए.' किताब वीपी मेनन में किए गए दावों पर कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता जयराम रमेश ने भी पलटवार किया है.

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने शेयर की चिट्ठियों की पूरी सीरीज
जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने कई ट्वीट कर वीपी मेनन (VP Menon) की जीवनी में किए गए दावे को झूठा करार दिया है. रमेश ने 14 अगस्त 1947 का एक लेटर ट्वीट करते हुए लिखा है कि पटेल नेहरू के बाद कैबिनेट में नंबर दो थे. रमेश ने ट्वीट किया कि नहेरू के पटेल को कैबिनेट में शामिल नहीं किए जाने की झूठी खबरों के बीच मैं कई लेटर और दस्‍तावेज सबूत के तौर पर पेश कर रहा हूं. यही सच है. रमेश ने 19 जुलाई 1947 से 14 अगस्‍त 1947 के बीच लिखी गई चिट्ठियों की सीरीज शेयर की है्.

बीजेपी पटेल की विरासत की अनेदखी का लगाती रही है आरोप
बीजेपी के कई नेता पहले भी दावा करते रहते हैं कि अगर नेहरू की जगह पटेल पहले प्रधानमंत्री होते तो देश अलग ही दिशा में आगे बढ़ता. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी, 2018 में लोकसभा में कहा था कि अगर पटेल देश के पहले प्रधानमंत्री होते तो कश्‍मीर पर पाकिस्‍तान का कब्‍जा नहीं होता. नेहरू और उनकी अगली पीढ़ी की आलोचना करने वाले अकसर आरोप लगाते हैं कि कांग्रेस की सरकारों ने सरदार पटेल की विरासत की अनेदखी की.

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First published: February 13, 2020, 5:34 PM IST
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