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    वाणिज्य मंत्रालय की मांग- चीन से आ रहे जहाजों के लिए क्वारंटाइन का समय 14 दिन से कम कर 7 दिन करें

    पृथकवास की अवधि को 14 से घटाकर सात दिन करने से ढुलाई की लागत घटेगी और साथ ही कंटेनरों की उपलब्धता भी बढ़ेगी (File Photo)
    पृथकवास की अवधि को 14 से घटाकर सात दिन करने से ढुलाई की लागत घटेगी और साथ ही कंटेनरों की उपलब्धता भी बढ़ेगी (File Photo)

    मार्च में पोत परिवहन महानिदेशालय (Directorate General of Shipping) ने बंदरगाहों को निर्देश जारी किया था कि चीन के बंदरगाओं से आने वाले जहाजों को भारतीय बंदरगाह पर आने से पहले 14 दिन का पृथकवास पूरा करना होगा.

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    नई दिल्ली. वाणिज्य मंत्रालय (Commerce Ministry) ने पोत परिवहन (Shipping) और स्वास्थ्य मंत्रालयों (Health Ministry) से चीन के बंदरगाहों (Chinese Ports) से आने वाले जहाजों के लिए अनिवार्य 14 दिन के पृथकवास (Quarantine) की अवधि को घटाने का अनुरोध किया है. सूत्रों ने कहा कि इससे जहाजों का माल चढ़ाने और उतारने का काम तेजी से हो सकेगा और कंटेनरों (Containers) की उपलब्धता भी बढ़ेगी. सूत्रों ने बताया कि वाणिज्य मंत्रालय ने पृथकवास की अवधि को 14 दिन से घटाकर सात दिन करने का आग्रह किया है. एक अन्य सूत्र ने बताया कि वाणिज्य मंत्रालय ने इस बारे में 22 अक्टूबर को पत्र भेजा है.

    मार्च में पोत परिवहन महानिदेशालय (Directorate General of Shipping) ने बंदरगाहों को निर्देश जारी किया था कि चीन के बंदरगाओं से आने वाले जहाजों को भारतीय बंदरगाह पर आने से पहले 14 दिन का पृथकवास पूरा करना होगा. कोरोना वायरस महामारी की वजह से ये दिशानिर्देश जारी किए गए थे. निर्यातकों के संगठन फियो ने कहा है कि पृथकवास की अवधि को 14 से घटाकर सात दिन करने से ढुलाई की लागत घटेगी और साथ ही कंटेनरों की उपलब्धता भी बढ़ेगी.

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    फियो के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा, ‘‘यह एक तर्कसंगत कदम है. इससे ढुलाई की लागत को घटेगी ही, साथ ही कंटेनरों की उपलब्धता भी बढ़ेगी. कई मालवाहक जहाज कंपनियां 14 दिन के पृथकवास की वजह से भारतीय बंदरगाहों पर नहीं आ रही हैं. पृथकवास का समय घटने से उनके लिए सकारात्मक संकेत जाएगा.’’
    प्रमुख बंदरगाहों पर घटी माल ढुलाई
    कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus) के बीच देश के प्रमुख बंदरगाहों की माल ढुलाई (माल चढ़ाना व उतारना) चालू वित्त वर्ष की अप्रैल से अक्टूबर की अवधि के दौरान 12.43 प्रतिशत घटकर 35.48 करोड़ टन रह गई. भारतीय बंदरगाह संघ (आईपीए) के आंकड़ों से इसकी जानकारी मिली है.

    देश में केंद्र के नियंत्रण वाले 12 प्रमुख बंदरगाहों में दीनदयाल (पूर्ववर्ती कांडला), मुंबई, जेएनपीटी, मोर्मुगाव, न्यू मंगलूर, कामराजार (पूर्व में एन्नोर) कोचीन, चेन्नई, वी ओ चिदंबरनार, विशाखापत्त्नम, पारादीप और कोलकाता (हल्दिया सहित) शामिल हैं. कुल माल ढुलाई में इन 12 प्रमुख बंदरगाहों का हिस्सा करीब 61 प्रतिशत है.

    पिछले वित्त वर्ष में इन बंदरगाहों ने 70.5 करोड़ टन माल की ढुलाई की.

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    अक्टूबर में लगातार सातवें महीने इन बंदरगाहों पर माल ढुलाई घटी है. बीते वित्त वर्ष में अप्रैल-अक्टूबर की अवधि में इन 12 प्रमुख बंदरगाहों की माल ढुलाई 40.52 करोड़ टन रही थी.

    मोर्मुगाव बंदरगाह पर बढ़ी ढुलाई
    आईपीए ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-अक्टूबर की अवधि में इन बंदरगाहों की माल ढुलाई 12.43 प्रतिशत घटकर 35.48 करोड़ टन रही है. हालांकि, चालू वित्त वर्ष के पहले सात माह में मोर्मुगाव बंदरगाह की ढुलाई 16.47 प्रतिशत बढ़कर 1.01 करोड़ टन पर पहुंच गई.

    अप्रैल-अक्टूबर के दौरान कामराजार बंदरगाह की ढुलाई 30.56 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1.25 करोड़ टन रह गई. वहीं चेन्नई, कोचिन और मुंबई बंदरगाहों की ढुलाई में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट आयी. जेएनपीटी और कोलकाता बंदरगाहों की ढुलाई में क्रमश: 18 और 14 प्रतिशत की गिरावट आई.
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