जम्मू-कश्मीर बीजेपी ने रखी शर्त, 'भारतीय संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ लें अलगाववादी, तब होगी बातचीत'

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Updated: June 24, 2019, 10:53 PM IST
जम्मू-कश्मीर बीजेपी ने रखी शर्त, 'भारतीय संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ लें अलगाववादी, तब होगी बातचीत'
बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने भी कश्मीर में मौजूद अलगाववादियों से बातचीत पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है.

यह बयान हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन मीरवाइज उमर फारुख के कश्मीरी नेताओं, भारत और पाकिस्तान के बीच त्रिपक्षीय बैठक बुलाने की बात कहने के बाद आया है. मीरवाइज ने इसमें कश्मीर का मुद्दा शामिल करने की बात भी कही थी.

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जम्मू-कश्मीर बीजेपी ने शर्त रखी है कि हुर्रियत के नेता भारतीय संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ लें, तब उनके साथ बातचीत की जाएगी. यह बयान हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन मीरवाइज उमर फारुख के कश्मीरी नेताओं, भारत और पाकिस्तान के बीच त्रिपक्षीय बैठक बुलाने की बात कहने के बाद आया है. मीरवाइज ने इसमें कश्मीर का मुद्दा शामिल करने की बात भी कही थी.

भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के साथ बातचीत का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि अलगाववादियों के साथ कोई भी बातचीत बिना किसी फायदे का और पीछे हटने वाला कदम होगा.

बीजेपी ने कहा ऐसा कोई भी कदम पीछे हटने वाला होगा
बीजेपी प्रवक्ता अनिल गुप्ता ने एक बयान में कहा, "ज्वाइंट रेसिस्टेंस लीडरशिप ( जो कि अलगाववादियों का एक समूह है) को सार्वजनिक तौर पर जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा निर्विदाद तौर पर मानना चाहिए. उन्हें भारत के संविधान के प्रति भी निष्ठा जतानी चाहिए और इसकी सीमा के अंदर ही बातचीत करनी चाहिए."

गुप्ता ने कहा है कि JRL या हुर्रियत के साथ कोई भी बातचीत बिना उनके इन पूर्व निर्धारित परिस्थितियों को स्वीकारे बिना एक बिना किसी फायदे वाला और पीछे हटने वाला कदम होगा.

बीजेपी नहीं मानती, बदला है हुर्रियत का नजरिया
इससे पहले जम्मू-कश्मीर के गवर्नर सत्यपाल मलिक ने शनिवार को कहा था कि हुर्रियत ने अपना रुख नरम किया है और उनके पिछले अगस्त में राज्यपाल बनने के बाद से वह बातचीत के लिए भी तैयार है.
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गुप्ता ने कहा है कि किसी भी हुर्रियत नेताओं ने अपने नजरिए में किसी भी बदलाव के संकेत नहीं दिए हैं और मात्र केंद्र से बातचीत की अपील करना उनके रुख में किसी बदलाव का संकेत नहीं देता है. इसके साथ ही गुप्ता ने यह भी कहा कि वे (अलगाववादी) कश्मीर की बहुसंख्यक जनता का नेतृत्व नहीं करते हैं.

हुर्रियत पर लगाया षड्यंत्र के लिए बातचीत की पेशकश का आरोप
उन्होंने हुर्रियत नेताओं पर कथित तौर पर अलगाववाद फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा, हुर्रियत, कश्मीर की ज्यादातर समस्याओं को पैदा करने वाला है. और हवाला कारोबार के जरिए आने वाले पैसों पर रोक लगने के बाद, उनके पास बिल्कुल कैश नहीं रह गया है, जिसके चलते वे बातचीत की मांग कर रहे हैं.

हुर्रियत को सबसे बड़ा दोषी बताते हुए बीजेपी नेता ने यह दावा किया कि अभी बातचीत की शुरुआत करना अभी आतंक के खिलाफ चल रहे ऑपरेशनों और टेरर-सपोर्ट नेटवर्क के तोड़े जाने के लिए बड़ा झटका होगा.

हुर्रियत पहले भी कर चुका है भारत-पाक बातचीत की पेशकश
गुप्ता ने कहा, "2016 में इन्हीं नेताओं ने संविधान के अंतर्गत बातचीत की पेशकश ठुकरा दी थी क्योंकि तब उन्हें पाकिस्तान का समर्थन और संरक्षण मिला हुआ था." इस वक्त बातचीत की पेशकश सिर्फ इन नेताओं की फिर से संगठन को तैयार करने के लिए कुछ समय पाने की चाल है.

इस महीने की शुरुआत में ईद-उल-फितर के पवित्र त्यौहार के दौरान मीरवाइज ने भारत और पाकिस्तान के बीच फिर से विश्वास पैदा करने की बात कही थी ताकि दोनों देशों के बीच फिर से बातचीत शुरू कराई जा सके.

आरक्षण विधेयक भी पेश किया गया
लोकसभा में सोमवार को जम्मू कश्मीर आरक्षण संशोधन विधेयक 2019 भी पेश किया गया जिसके कानून बनने पर अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को वास्तविक नियंत्रण रेखा से लगे क्षेत्रों में निवास कर रहे व्यक्तियों के समान आरक्षण का लाभ मिल सकेगा. गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने लोकसभा में यह विधेयक पेश किया. इस दौरान गृह मंत्री अमित शाह भी सदन में मौजूद रहे. विपक्ष के कुछ सदस्य इस विधेयक को पेश करने का विरोध कर रहे थे लेकिन लोकसभाध्यक्ष ओम बिरला ने उनकी मांग को अस्वीकार कर दिया.

इस विधेयक के माध्यम से जम्मू कश्मीर आरक्षण अधिनियम 2004 में और संशोधन करने का प्रस्ताव किया गया है. विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि जम्मू कश्मीर आरक्षण अधिनियम 2004 और उसके अधीन बनाए गए नियम के तहत आरक्षण का फायदा अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे हुए क्षेत्रों में निवास कर रहे व्यक्तियों को उपलब्ध नहीं था.

इसमें कहा गया है कि सीमापार से लगातार तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे हुए क्षेत्रों में निवास कर रहे व्यक्ति सामाजिक आर्थिक और शैक्षिक पिछड़ेपन से पीड़ित होते हैं. यह स्थिति इन निवासियों को अन्य सुरक्षित स्थान पर प्रस्थान करने के लिये प्राय: विवश करती है जिसके कारण उनकी आर्थिक स्थिति और शैक्षिक स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. ऐसे में अधिनियम में संशोधन आवश्यक हो गया था. इसके माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे हुए क्षेत्रों में निवास कर रहे लोगों को वास्तविक नियंत्रण रेखा से लगे हुए क्षेत्रों में निवास कर रहे व्यक्तियों को उपलब्ध आरक्षण का लाभ उठाने में समर्थ बनाया जा सकेगा.

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First published: June 24, 2019, 10:12 PM IST
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