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Kisan Andolan: कृषि कानूनों पर कमेटी के सदस्य अनिल घनवत बोले- निजी राय बेमानी, कोर्ट के निर्देश पर करेंगे काम

अनिल घनवत (ANI)
अनिल घनवत (ANI)

Farmers Protest: सुप्रीम कोर्ट ने तीन नए कृषि कानूनों को लेकर केन्द्र सरकार और दिल्ली की सीमाओं पर धरना दे रहे किसानों के संगठनों के बीच व्याप्त गतिरोध खत्म करने के इरादे से कानूनों के अमल पर अगले आदेश तक रोक लगाने के साथ ही किसानों की समस्याओं पर विचार के लिये चार सदस्यीय समिति गठित कर दी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 13, 2021, 9:15 AM IST
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नई दिल्ली. केंद्र द्वारा पास किये गये कृषि कानूनों (Kisan Andolan) के खिलाफ आंदोलित किसानों की शंकाओं का समाधान करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी (Supreme Court Committee) गठित की है. इस कमेटी में भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष भूपिन्दर सिंह मान, शेतकारी संगठन के अध्यक्ष अनिल घनवत, दक्षिण एशिया के अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति एवं अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. प्रमोद जोशी और कृषि अर्थशास्त्री तथा कृषि लागत और मूल्य आयोग के पूर्व अध्यक्ष अशोक गुलाटी शामिल हैं.

हालांकि किसानों का कहना है कि वह इससे संतुष्ट नहीं हैं और वह अपना आंदोलन जारी रखेंगे. सिंघू बॉर्डर पर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि संगठनों ने कभी मांग नहीं की कि सुप्रीम कोर्ट कानून पर जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए समिति का गठन करे और आरोप लगाया कि इसके पीछे केंद्र सरकार का हाथ है.

हम अपना आंदोलन जारी रखेंगे- किसान संगठन
पंजाब के 32 किसान संगठनों की बैठक के बाद राजेवाल ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गठित समिति के सदस्य विश्वसनीय नहीं हैं क्योंकि वे लिखते रहे हैं कि कृषि कानून किसानों के हित में है. हम अपना आंदोलन जारी रखेंगे.’
दूसरी ओर किसानों की शंका पर कमेटी के सदस्य ने टिप्पणी की है. कमेटी के मेंबर अनिल घनवत ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी, अदालत के निर्देश पर काम करेगी. कमेटी के फैसले पर किसी के निजी राय का असर नहीं पड़ेगा.



यह आंदोलन कहीं रुकना चाहिए- अनिल
समाचार एजेंसी ANI के अनुसार महाराष्ट्र स्थित किसान  संगठन के अध्यक्ष अनिल घनवत ने कहा कि 'विरोध करने वाले किसानों को न्याय मिलेगा.' उन्होंने कहा, 'यह आंदोलन कहीं रुकना चाहिए और किसानों के हित में एक कानून बनाया जाना चाहिए. पहले हमें किसानों को सुनने की जरूरत है, अगर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और कृषि उपज बाजार समिति (एपीएमसी) के बारे में उनकी कोई गलत धारणा है, तो हम उस पर रुख साफ करेंगे.'



घनवत ने कहा 'कई किसान नेता और यूनियनें एपीएमसी के एकाधिकार से आजादी चाहती हैं. इसे रोकने की जरूरत है और किसानों को अपनी फसल बेचने की आजादी दी जानी चाहिए. यह पिछले 40 साल की मांग है. जो किसान चाहते हैं कि वह मंडी में एमएसपी पर फसल बेचेंगे और जा चाहते हैं एपीएमसी की मोनॉपली खत्म हो, उन्हें भी विकल्प दिया जाना चाहिए.'
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