बारिश में खराब हुई अंडर वारंटी कार मुफ्त में दुरुस्त करने से इनकार नहीं कर सकती कंपनी

कोई भी कंपनी बारिश को एक्ट ऑफ गॉड बताकर अंडर वारंटी कार या बाइक की फ्री रिपेयरिंग से इनकार नहीं कर सकती. वहीं, वारंटी खत्म होने पर इंश्योरेंस कंपनी से क्लेम हासिल किया जा सकता है. उसके मना करने पर इरडा और फिर कंज्यूमर कोर्ट जाया जा सकता है.

News18Hindi
Updated: August 2, 2019, 8:03 PM IST
बारिश में खराब हुई अंडर वारंटी कार मुफ्त में दुरुस्त करने से इनकार नहीं कर सकती कंपनी
कोई भी कंपनी बारिश को एक्ट ऑफ गॉड बताकर अंडर वारंटी कार या बाइक की फ्री रिपेयरिंग से इनकार नहीं कर सकती. वहीं, वारंटी खत्म होने पर इंश्योरेंस कंपनी से क्लेम हासिल किया जा सकता है. उसके मना करने पर इरडा और फिर कंज्यूमर कोर्ट जाया जा सकता है.
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Updated: August 2, 2019, 8:03 PM IST
देश के ज्यादातर राज्यों में कहीं ज्यादा तो कहीं कम बारिश हो रही है. बेहतर जलनिकासी व्यवस्था नहीं होने के कारण मामूली बारिश से ही सड़कों पर जलभराव हो जाता है. इससे पैदल, बाइक, साइकिल और कार सवारों को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. यही नहीं जलभराव के कारण वाहनों को भी नुकसान पहुंच रहा है. कई बार तो सड़क पर चलते समय इंजन तक पानी पहुंच जाने के कारण कार रास्ते में ही बंद हो जाती है. वहीं, कई लोगों की कारें घर के बाहर खड़ी होने पर इंजन तक पानी पहुंचने से खराब हो जाती हैं. आपको बता दें कि कंपनी को बारिश में खराब हुई अंडर वारंटी कार मुफ्त में ठीक करनी होगी.

सिर्फ एक्ट ऑफ गॉड पर ही इनकार कर सकती है कंपनी
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता उपेंद्र मिश्रा का कहना है कि मैन्युफैक्चरिंग कंपनी बारिश को एक्ट ऑफ गॉड यानी प्राकृतिक आपदा बताकर अंडर वारंटी कार या बाइक की रिपेयरिंग करने से इनकार नहीं कर सकती है. आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, मिश्रा का कहना है कि बारिश हर साल होती है, यह कोई एक्ट ऑफ गॉड नहीं है. कंपनी सिर्फ एक्ट ऑफ गॉड पर ही अंडर वारंटी वाहन की रिपेयरिंग से इनकार कर सकती है.

उपभोक्ता अदालत में किया जा सकता है कंपनी पर केस

अगर कंपनी बारिश में खराब हुई अंडर वारंटी कार या बाइक को मुफ्त में ठीक करने से मना करती हैं, तो उसके खिलाफ उपभोक्ता अदालत में केस किया जा सकता है. साल 2017 में दिल्ली के एक कंज्यूमर कोर्ट ने ऐसे ही मामले में एक कंपनी पर 60 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था. इस मामले में कार के इंजन में बारिश का पानी चला गया था, जिसके चलते गड़बड़ी आ गई थी. उस समय कार वारंटी पीरियड में थी, लेकिन कंपनी ने कार को मुफ्त में रिपेयर करने से इनकार कर दिया था. कंपनी का कहना था कि कार मालिक वाहन को जलभराव वाले इलाके में लेकर गए और उनकी लापरवाही से गाड़ी में खराबी आई है. लिहाजा कंपनी इसके लिए जिम्मेदार नहीं है.

कंज्यूमर कोर्ट ने एक मामले में कहा था कि जलभराव वाले इलाके में कार चलाने को लापरवाही नहीं बताया जा सकता.


कंज्यूमर कोर्ट ने बारिश को नहीं माना था एक्ट ऑफ गॉड
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इसके बाद गाड़ी मालिक ने दिल्ली के कंज्यूमर कोर्ट में कंपनी के खिलाफ केस कर दिया. कंज्यूमर कोर्ट ने कहा कि हर साल बारिश होती है. इसको एक्ट ऑफ गॉड नहीं माना जा सकता है. साथ ही जलभराव वाले इलाके में कार को चलाने को लापरवाही नहीं बताया जा सकता. कोई व्यक्ति बारिश होने पर रास्ते में कार छोड़कर नहीं आ सकता है. इसके लिए कंपनी को व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि बारिश के मौसम में भी गाड़ी को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचे. अगर गाड़ी में बारिश के पानी से नुकसान पहुंचता है, तो मैन्युफैक्टरिंग कंपनी कार को रिपेयर करने से इनकार नहीं कर सकती है.

वारंटी खत्म होने पर इंश्योरेंस कंपनी से ले सकते हैं क्लेम

एडवोकेट मिश्रा ने बताया कि अगर किसी की कार या बाइक को बारिश के पानी से नुकसान पहुंचा है और वारंटी खत्म हो गई है, तो वह इंश्योरेंस कंपनी से क्लेम हासिल कर सकता है. इसके लिए जरूरी है कि उस कार या बाइक की सेफ्टी के लिए इंश्योरेंस कराया गया हो. अगर इंश्योरेंस कंपनियां पैसा देने से मना करती हैं, तो इरडा यानी इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया का रुख किया जा सकता है. इसके अलावा अगर पीड़ित पक्ष इरडा के फैसले से संतुष्ट नहीं है, तो कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है.

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First published: August 2, 2019, 7:11 PM IST
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