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कोरोना से मौत पर 4 लाख का मुआवजा, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, जानें क्या कहता है कानून

 दिल्ली सरकार ने हाल ही में ऑक्सीजन की कमी से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को पांच लाख रुपये के मुआवजे का ऐलान किया है. (सांकेतिक तस्वीर-AP)

दिल्ली सरकार ने हाल ही में ऑक्सीजन की कमी से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को पांच लाख रुपये के मुआवजे का ऐलान किया है. (सांकेतिक तस्वीर-AP)

Compensation for Covid Deaths: स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक कोरोना वायरस संक्रमण से देश में अब तक 3.89 लाख कोविड मौतें हुई हैं और इन लोगों को मुआवजा देने में 15,572 करोड़ का खर्च आएगा.

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    नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को कोरोना संक्रमण से मरे लोगों के परिजनों के लिए 4 लाख रुपये के मुआवजे की मांग वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. इस याचिका पर केंद्र सरकार ने शनिवार को कोर्ट में अपना हलफनामा दाखिल किया था और कहा था कि राज्य सरकारें मुआवजे का बोझ नहीं उठा सकतीं. केंद्र की दलील थी कि मुआवजे की रकम (Compensation for Covid Deaths) को स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने में खर्च किया जाना चाहिए.

    मृत्यु की स्थिति में क्या है मुआवजे का प्रावधान?
    केंद्र सरकार ने पिछले साल कोरोना वायरस संक्रमण को आपदा प्रबंधन कानून के तहत महामारी घोषित किया. इस कानून का सेक्शन 12(iii) कहता है कि राष्ट्रीय प्रशासन को आपदा से प्रभावित लोगों की मदद के लिए राहत प्रदान करने खातिर एक गाइडलाइन बनानी चाहिए, जिसमें आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के लिए मुआवजा और घर या संपत्तियों के नुकसान की भरपाई के लिए राहत राशि दी जाए.

    केंद्र सरकार इस राशि में समय-समय पर बदलाव करती रहती है. 8 अप्रैल 2015 को गृह मंत्रालय के आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी राज्यों सरकारों को पत्र लिखते हुए सहायता के नए नियमों की संशोधित लिस्ट जारी की थी. इसमें आपदा में जान गंवाने वालों के लिए 4 लाख रुपये के मुआवजे का प्रावधान रखा गया था. नई सूची में कहा गया है कि 4 लाख रुपये का मुआवजा उन लोगों को भी दिया जाएगा जो राहत कार्य या तैयारियों के दौरान अपनी जान गंवा बैठते हैं, हालांकि उनकी मौत की पुष्टि संबंधित विभाग से होनी चाहिए जिसका प्रमाण पत्र उपलब्ध हो.

    फिर, कोविड के लिए मुआवजा?
    14 मार्च 2020 को गृह मंत्रालय ने राज्य सरकारों को पत्र लिखकर कहा था कि केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस महामारी को नोटिफाइड आपदा घोषित करने का फैसला लिया है, ताकि एसडीआरएफ के तहत लोगों को मदद पहुंचाने का उद्देश्य पूरा हो सके. मंत्रालय ने इसके साथ संशोधित सामानों और सहायता प्रावधानों की लिस्ट भी प्रकाशित की थी, हालांकि इस सूची में आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के लिए मुआवजे की रकम का स्पष्ट तौर पर उल्लेख नहीं था.

    'मुआवजा देने में 15,572 करोड़ का खर्च'
    अगर कोरोना से मरने वाले लोगों के परिवार को सरकार मुआवजा देती है, तो मंगलवार तक स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 3.89 लाख कोविड मौतें हुई हैं और इन लोगों को मुआवजा देने में 15,572 करोड़ का खर्च आएगा. हालांकि कुछ राज्यों ने लोगों को मुआवजा देने का फैसला किया है, लेकिन हर तरह की मौत के लिए मुआवजा नहीं दिया जाएगा. दिल्ली सरकार ने हाल ही में ऑक्सीजन की कमी से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को पांच लाख रुपये के मुआवजे का ऐलान किया है. साथ ही कोरोना से मरे लोगों के परिवार को 50 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाएगा.

    मुआवजे की याचिका पर सरकार का जवाब
    बता दें कि इस मामले में कोर्ट में एडवोकेट गौरव कुमार बंसल और रीपक कंसल ने याचिका दायर की थी. कोर्ट को सौंपे हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा था कि 4 लाख रुपये का मुआवजा देना राज्य सरकारों के लिए संभव नहीं है. केंद्र की दलील थी कि अगर सभी मृतकों के परिजनों को मुआवजा दिया गया तो राज्य आपदा राहत फंड की पूरी राशि इसी में खर्च हो जाएगी. ऐसे में राज्य सरकारें महामारी से लड़ने के लिए इंतजाम नहीं कर पाएंगी और दूसरी आपदाओं से निपटने की तैयारी नहीं हो पाएगी.

    केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि केंद्र और राज्य सरकारों की आर्थिक स्थिति पर पहले से ही काफी बोझ है और ऐसा टैक्स रेवेन्यू में गिरावट और महामारी के चलते स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़े खर्च के चलते हुआ है. केंद्र सरकार ने कहा था कि 'ex gratia' टर्म का मतलब ही यही है कि यह कानून आधारित नहीं है.

    केंद्र सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए?
    2 जून को इंडियन एक्सप्रेस की ओर से दाखिल की गई आरटीआई के जवाब में गृह मंत्रालय ने बताया था कि "जहां तक गृह मंत्रालय की बात है, तो अभी तक कोरोना से जान गंवाने वाले लोगों को मुआवजा देने के लिए किसी भी तरह की स्कीम की घोषणा नहीं की गई है." मंत्रालय ने जवाब में कहा था कि केंद्र सरकार ने कोविड महामारी से नोटिफाइड डिजास्टर के रूप में निपटने का फैसला किया है, ताकि राज्य आपदा राहत कोष के जरिए राज्यों को मदद उपलब्ध कराई जा सके. जैसे, सैंपल कलेक्शन, स्क्रीनिंग, क्वारंटीन, जरूरी मेडिकल उपकरण/लैब, अस्थायी राहत शिविर, भोजन, कपड़ा और मेडिकल केयर शामिल है.

    कोविड-19 के चलते प्रवासी मजदूरों की समस्याओं से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने राज्य सरकारों को 999.4 करोड़ की सहायता राशि उपलब्ध कराई है. एनडीएमए को यह राशि पीएम केयर्स फंड की ओर से दी गई.

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