IGMC में पत्नी को नौकरी पर लगवाया, पूर्व प्रिंसिपल ने ताक पर रखे नियम, विजिलेंस से शिकायत

IGMC में पत्नी को नौकरी पर लगवाया, पूर्व प्रिंसिपल ने ताक पर रखे नियम, विजिलेंस से शिकायत
शिमला के आईजीएमसी अस्पताल में संदिग्ध भर्ती.

विजिलेंस में इसकी शिकायत की गई है. हरदीप वर्मा ने आरटीआई की सूचनाओं और अन्य दस्तावेजों के साथ यह शिकायत दी है. साथ ही मुख्यमंत्री, हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और मुख्य सचिव को भी शिकायत भेजी गई है.

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शिमला. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में फर्जी डिग्रियों के मामले के बाद अब फर्जी सर्टिफिकेट बनाकर सरकारी नौकरी हासिल करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. आरोप हिमाचल मेडिकल एजुकेशन (Himachal Medical Education Director) के निदेशक और IGMC के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. रवि चंद शर्मा पर लगे हैं. आरोप है कि उन्होंने अपनी पत्नी का फर्जी (Fake) एक्सपिरिऐंस सर्टिफिकेट तैयार कर अपने पद का दुरूपयोग किया. साथ ही हाईकोर्ट (High court) के आदेशों की उल्लंघना की और मेरिट को दरकिनार कर अपनी पत्नी किरन शर्मा को IGMC में मेडिकल सोशल वर्कर के पद पर तैनात किया.

इन्हें भेजी शिकायत
विजिलेंस में इसकी शिकायत की गई है. हरदीप वर्मा ने आरटीआई की सूचनाओं और अन्य दस्तावेजों के साथ यह शिकायत दी है. साथ ही मुख्यमंत्री, हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और मुख्य सचिव को भी शिकायत भेजी गई है. विजिलेंस ने 2 मार्च को चिठ्ठी लिखकर सरकार से जांच की अनुमति मांगी है.

यह है शिकायत
शिकायतकर्ता के मुताबिक, साल 2009 में आईजीएमसी में मेडिकल सोशल वर्कर के 3 पद विज्ञापित हुए थे. पहले वॉक-इन इंटरव्यू रखे गए थे, लेकिन आवेदनकर्ताओं की संख्या ज्यादा होने के चलते लिखित परीक्षा ली गई. IGMC के साइकेट्रिक डिपार्टमेंट में प्रश्न पत्र तैयार किए गए थे. उस विभाग के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष डॉ. रवि शर्मा थे. आरोप लगाया गया है कि डॉ. रवि शर्मा ने प्रश्न पत्र लीक किया और अपनी पत्नी को सारे प्रश्न बताए. इसके चलते पर 14 सितंबर 2009 को हुई लिखित परीक्षा में उनकी पत्नी किरन शर्मा ने 50 में से 36 अंक हासिल कर टॉप किया.



एक आवेदक को नहीं देने दिया एग्जाम
इस दौरान सारिका नाम की एक उम्मीदवार को परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया. सारिका ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. सारिका एचपीयू से साइकॉलोजी में पीएचडी कर रही थी. हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी कर कहा था कि एक पद, तब तक खाली रखा जाए, जब तक कि सारिका का केस डिसाइड नहीं होता. लेकिन इसी बीच कार्यकारी समिति ने परिणाम घोषित किया. उसके बाद 3 उम्मीदवारों की मेरिट लिस्ट जारी की गई.

कैंडिडेट को रातों-रात अपॉइंटमेंट
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार एक पद खाली रखना था. ऐसे में मेरिट में नंबर एक पर बबली जोशी थी, दूसरे पर अंजना ठाकुर थी और तीसरे नंबर पर किरन शर्मा थी. नियमों के अनुसार, तीसरे नंबर की कैंडिडेट बाहर होनी थी. शिकायतकर्ता का आरोप है कि सिलेक्शन कमेटी ने मेरिट में पहले स्थान पर आने वाली बबली जोशी को अपोइंटमेंट लैटर ही नहीं भेजा और मेरिट में दूसरे और 3 स्थान वाली कैंडिडेट को रातों-रात अपॉइंटमेंट दे दी. 24 सितंबर 2009 को रिजल्ट निकला और उसके अगले दिन यानि 25 सिंतबर को अपॉइंटमेंट दे दी गई.

पहले से की सारी तैयारी
मेडिकल भी पहले से ही तैयार रखा गया था. कायदे से मेडिकल बनने में ही कम से कम 2 दिन लगते हैं. यह सबकुछ संभव इसलिए हुआ कि डॉ. रवि शर्मा खासा प्रभाव रखते हैं.

सारिका की उम्मीदवारी सही
इस बीच कुछ महीनों बाद सारिका का दावा अदालत में सही साबित हुआ. उसकी उम्मीदवारी सही पाई गई. अदालत ने आदेश दिया कि अब सारिका का रिटन टेस्ट नहीं होगा, उसका इंटरव्यू लिया जाए. जब इंटरव्यू हुआ तो सारिका नंबर एक पर पहुंच गई. दोबारा जो मेरिट लिस्ट बनी थी, उसके अनुसार सारिका बबली जोशी से भी आगे निकल गई. बबली जोशी दूसरे स्थान पर तो अंजना ठाकुर तीसरे स्थान पर खिसक गई. किरन शर्मा बाहर हो गई थी, लेकिन फिर भी बबली जोशी को अनदेखा किया गया और किरन शर्मा को बरकार रखा गया.

किरन को इतने नंबर मिले
शिकायतकर्ता के अनुसार, किरन शर्मा को इंटरव्यू में एक्सपिरिऐंस सर्टिफिकेट के 2.5 अंक दिए गए हैं. 50 नंबर के इंटरव्यू में किरन शर्मा के कुल 26.06 अंक हैं. इस सर्टिफिकेट को हटा दें तो 6-7 उम्मीदवार किरन शर्मा से आगे हो जाते. RTI के तहत मिली जानकारी के मुताबिक साईकेट्रिक सोशल वर्कर का एक्सपिरियेंस सर्टिफिकेट डॉ. रवि शर्मा ने 09 सितंबर 2009 को जारी किया था.

यह है नियम
आरएंडपी रूल के तहत इसके लिए साइकॉलोजी में पोस्ट ग्रेजुएट होना जरूरी है, लेकिन किरन शर्मा ने सोशोलॉजी में पोस्ट ग्रेएजुएशन किया है. किरन शर्मा ओनरेरी बेसिस पर कार्य नहीं कर सकती थी, लेकिन एक्सपिरियेंस सर्टिफिकेट दे दिया गया. शिकायतकर्ता का कहना है कि आरटीआई के तहत मिली जानकारी के मुताबिक किरन शर्मा ने 7 जुलाई 2009 को होनरेरी वर्क ऑफ साइकेट्रिक सोशल वर्कर से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन दिखाया गया कि 15 सितंबर 2009 को इस्तीफा सौंपा गया. हैरानी की बात यह है कि अटेंडेंस रजिस्टर में उसकी हाजिरी 7 सितंबर 2009 तक लगती रही, जो एक बड़े फर्जीवाड़े को दर्शाता है.

फिल्ड कोई और, तैनाती कहीं और
सर्विस रूल की भी उल्लंघना की गई. डॉ. रवि शर्मा ने अपने पद और शक्तियों का दुरुपयोग किया. अपनी पत्नी के लिए स्पेशल कमरा दिया. किरन शर्मा IGMC के शिशु विभाग में बच्चों की कॉउंसलिंग कर रही है. मेडिटेशन करती रही, लेकिन यह सब किरन शर्मा की फील्ड ही नहीं है. इतना ही नहीं, विभागाध्यक्ष मरीजों को भी किरन शर्मा के पास भेजते थे, जबकि किरन शर्मा इसके लिए अधिकृत नहीं हैं. इसके लिए चाइल्ड साइकॉलोजिस्ट अधिकृत हैं. किरन शर्मा की आरकेएस के तहत भर्ती हुई थी और 2017 में वह सरकारी अनुबंध के तहत आ गई और अब रेगुलर होने वाली है. 30 नवंबर 2019 को दिए गए इस शिकायत पत्र में दोनों पति-पत्नी पर FIR दर्ज करने और पूरे मामले की जांच की मांग की गई है.

यह बोले रवि शर्मा
इस मामले पर डॉ. रवि शर्मा से फोन पर संपर्क किया तो वो पहले भड़क गए, फिर डॉ. रवि शर्मा ने कहा कि मुझे बदनाम करने और कीचड़ उछालने की साजिश है. उन्होंने कहा कि वे इसके खिलाफ कोर्ट जाएंगे.

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