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ट्विटर और दलित कार्यकर्ताओं के बीच क्यों जारी है घमासान, जानिए पूरा मामला

Piyush Babele | News18Hindi
Updated: November 6, 2019, 4:46 PM IST
ट्विटर और दलित कार्यकर्ताओं के बीच क्यों जारी है घमासान, जानिए पूरा मामला
ट्विटर और दलित कार्यकर्ताओं के बीच घमासान

बहुजन समाज के हजारों ट्विटर एकांउट धारकों का कहना है कि ट्विटर वैरीफाई करने में उनके साथ भेदभाव करता है और जानबूझकर सोशल मीडिया पर जातिवाद को बढ़ावा दे रहा है. ट्विटर ने इन सारे आरोपों से इनकार किया है.

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  • Last Updated: November 6, 2019, 4:46 PM IST
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नई दिल्‍ली. यह खबर बुधवार 6 नवंबर 2019 को दोपहर 12 बजे लिखनी शुरू की गई. इस समय भारत में ट्विटर पर जो हैशटैग सबसे ऊपर ट्रेंड कर रहा है, वह है #cancelallBlueTicksinIndia इसका मबलब हुआ कि भारत में ट्विटर के ब्‍लू टिक यानी वैरीफाइ करने वाला नीला निशान बंद कर दिया जाए. इस हैशटैग पर 30,700 बार ट्वीट किया जा चुका है. एक दिन पहले मंगलवार को #TwitterHatesSCSTOBCMuslims ट्रेंड कर रहा था. इस हैशटैग का मतलब है कि ट्विटर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति, पिछड़े वर्ग और मुसलमानों से नफरत करता है. सोमवार को ट्विटर पर #JaiBheemJaiMandalJaiBirsa टॉप ट्रेंड में बना हुआ था. इसका अर्थ है जय भीम यानी डॉ भीमराव अंबेडकर की जय, जय बिरसा यानी बिरसा मुंडा की जय और जय मंडल यानी मंडल कमीशन वाले बी पी मंडल की जय. इसके अलावा पिछले शुक्रवार के बाद से #CasteistTwitter, #JaiBhimTwitter और #SackManishMaheswari जैसे हैशटेग ट्रेंड करते रहे हैं. जिन मनीष महेश्‍वरी को हैशटैग बनाया गया है वह ट्विटर इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्‍टर हैं.

आखिर इन सारे हैशटेग में क्‍या समानता है. तो समानता यह है कि ये सारे हैशटैग वरिष्‍ठ पत्रकार, बहुजन कार्यकता प्रो. दिलीप मंडल के नेतृत्‍व में ट्रेंड कराए जा रहे हैं. दरअसल दिलीप मंडल लंबे समय से यह मांग उठा रहे हैं कि उनका ट्विटर एकाउंट वैरीफाई किया जाए. वे लगातार ट्वीट कर आरोप लगाते रहे हैं कि ट्विटर जाति के पूर्वाग्रह और मनुवादी मानसिकता के कारण बहुजन समाज यानी दलित, आदिवासी, पिछड़ा वर्ग और मुसलमानों के साथ भेदभाव कर रहा है. उनके इन आरोपों को बड़े पैमाने पर समर्थन मिला.


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इसी बीच शुक्रवार को ट्विटर ने दलित कार्यकर्ता हंसराज मीणा और बाद में दिलीप मंडल का ट्विटर एकाउंट सस्‍पेंड कर दिया. इन दो निलंबन के बाद ट्विटर पर बहुजन कार्यकर्ताओं के ट्वीट की बाढ़ आ गई. इसका नतीजा यह हुआ कि दिलीप मंडल का ट्विटर एकाउंट न सिर्फ बहाल कर दिया गया बल्कि उसे ब्‍लू टिक देकर वेरीफाई कर दिया गया.

इस एकाउंट के वेरीफाई होने के बाद एक अन्‍य वर्ग ने इस अकांउट के वेरीफाई करने का विरोध किया और कहा कि ऐसे लोगों को बढ़ावा न दिया जाए जो जातियों में भेदभाव बढ़ाते हैं. यानी ट्विटर पर दलित समर्थक और कथित दलित तुष्‍टीकरण विरोधियों के बीच जंग छिड़ गई. दोनों तरह से अलग-अलग हैशटैग से ट्रेंड कराए जा रहे हैं. इस बीच बहुजन कार्यकर्ताओं और ट्विटर के अधिकारियों के बीच मुंबई में एक बैठक भी हुई. लेकिन इससे मामले का कोई समाधान नहीं निकला. और सोशल मीडिया पर वंचित समुदाय के कार्यकर्ताओं की अब तक की सबसे दिलचस्‍प जंग जारी है. अगर गौर से देखा जाए तो 2011 के अन्‍ना आंदोलन में जिस तरह से सोशल मीडिया को एक सामाजिक हथियार के तौर पर इस्‍तेमाल किया गया था, उसके बाद से यह दूसरा मौक है जब सोशल मीडिया को वंचित तबके के हथियार के तौर पर विकसित करने के लिए लड़ाई छिड़ी है. इस लड़ाई में और अन्‍ना आंदोलन की लड़ाई में फर्क यह है कि तब सोशल मीडिया लड़ाई का प्‍लेटफॉर्म था, जबकि इस बार वह प्‍लेटफॉर्म भी है और खुद ही टारगेट भी है.

Dilip Mandal
दिलीप मंडल ने ट्विटर के खिलाफ मुहिम छेड़ रखी है.


बहुजन तबके को ऐसा क्‍यों लगता है कि ट्विटर उसके साथ भेदभाव कर रहा है, दिलीप मंडल ने बताया, ''ट्विटर के पास हैशटैग वेरीफाई करने की कोई नीति नहीं है. जबकि यह सबको पता है कि ट्विटर हैंडल वेरीफाई होने के बाद उसकी प्रमाणिकता और पहुंच कई गुना बढ़ जाती है.'' यह आंदोलन शुरू होने के समय तक खुद दिलीप मंडल के 30,000 के करीब फॉलोअर थे, जबकि दो दिन पहले उनका ट्विटर हैंडल वैरीफाई होने के बाद उनके फॉलोअर की संख्‍या 50 हजार को पार कर गई. मंडल अपने हैंडल को इस बात का साक्ष्‍य बताते हैं कि कैसे नीला निशान लगने से फॉलोअर बढ़ जाते हैं.


इस आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि ट्विटर जान बूझकर वंचित तबके को वेरीफाई नहीं करता ताकि उनकी बात ज्‍यादा फैल न सके. उनका आरोप है कि इसलिए ट्विटर यह नहीं बताता कि कौन वेरीफाई करने का आधार क्‍या है. इन हैशटैग्‍स से आरोप लगे हैं कि बहुत से ऐसे लोगों को वेरीफाई कर दिया जाता है जिनके बहुत सीमित फॉलोअर हैं वही लाखों की संख्‍या में फॉलोअर वाले वंचित तबके के लोगों को वेरीफाई नहीं किया जाता. उदाहरण के तौर पर फिल्‍म निर्देशक पी ए रंजीत का उदाहरण लिया जा सकता है जो आठ लाख फॉलोअर होने के बावजूद वेरीफाई नही हैं. यही हाल वंचित बहुजन अगाड़ी नेता प्रकाश अंबेडकर और भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर आजाद का भी है.

इन हैश टैग से जुड़े एक कार्यकर्ता सैयद मुहम्‍मद अर्शी ने ट्वीट किया, ''ट्विटर को अपने वेरीफिकेशन प्रणाली में सुधार करने की आवश्यकता है नहीं तो ऐसे ट्रेंड रोज चलते रहंगे!''







यही नहीं ट्रेंड कराने वालों ने एक नया काम यह शुरू किया है कि बहुजन समाज के लोग सेलिब्रिटीज को फॉलो करने के बजाय आपस में एक दूसरे को फॉलो करें और इससे सोशल मीडिया पर अपनी ताकत बढ़ाएं. उनका कहना है कि ऐसा करने से कथित अगड़ी जातियों का सोशल मीडिया पर कब्‍जा कम हो जाएगा.

इस पूरी बहस के बीच ट्विटर के प्रवक्‍ता ने द हिंदू अखबार को दिए बयान में कहा कि ट्विटर की नीति इस बारे में पूरी तरह पक्षपात रहित है. इसमें धर्म, जाति, समुदाय के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता. हालांकि फिलहाल ट्विटर ने एकाउंटों को वेरीफाई करने की प्रक्रिया स्‍थगित कर दी है.

इसके जवाब में दिलीप मंडल कहते हैं- वेरीफाई करने का खेल खत्‍म कर देना चाहिए. किसी को ब्‍लूटिक मत दीजिए. ट्विटर को सबके लिए समान कर दीजिए. बहुजन कार्यकर्ताओं को जोश देखते हुए लग रहा है कि यह सोशल आंदोलन कुछ दिन और चल सकता है और बहुत संभव है कि सोशल मीडिया की नीतियों पर इसका दूरगामी असर भी पड़े. आंदोलन का नतीजा जो भी निकले लेकिन यह समझना चाहिए कि ट्विटर के बिजनेस पर व्‍यक्तियों का प्रभाव पड़ता है. अमेरिकी अखबार न्‍यूयॉर्क में प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया कि किस तरह राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने 11000 ट्वीट के जरिए अपना कार्यकाल चलाया है. सबसे दिलचस्‍प बात यह है कि ट्रंप के राष्‍ट्रपति के तौर पर ट्विटर पर सक्रिय होने के बाद से घांटे में चल रहे ट्विटर की माली हालत सुधरी है. क्‍या पता बहुजन तबके के हजारों ट्वीट भी सोशल मीडिया के व्‍यवहार के साथ ट्विटर के बिजनेस पर असर डालें.

हां एक बात और खबर की अंतिम लाइन लिखने तक #cancelallBlueTicksinIndia हैशटेग के ट्वीट की संख्‍या 38.8 हजार हो चुकी है.

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First published: November 6, 2019, 2:05 PM IST
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