विजय माल्या के एक बयान पर विपक्ष हमलावर, बचाव में उतरे मंत्री

ब्रिटेन की अदालत में चल रही सुनवाई के बाद माल्या ने कहा कि वह भारत छोड़ने से पहले वित्त मंत्री से मिलकर आए थे. शराब कारोबारी विजय माल्या ने कहा, 'मैं सेटलमेंट को लेकर वित्त मंत्री से मिला था, लेकिन बैंकों ने मेरे सेटलमेंट प्लान को लेकर सवाल खड़े किए.

News18Hindi
Updated: September 12, 2018, 11:05 PM IST
विजय माल्या के एक बयान पर विपक्ष हमलावर, बचाव में उतरे मंत्री
वित्त मंत्री अरुण जेटली (फाइल)
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Updated: September 12, 2018, 11:05 PM IST
देश से फरार शराब कारोबारी विजय माल्या के वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात के दावों को लेकर सियासत गर्म हो गई है. एक तरफ जहां माल्या के इस बयान को लेकर कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष मोदी सरकार के खिलाफ हमलावर हो गया है. वहीं, अरुण जेटली के बचाव में पूरी सरकार उतर आई है.

प्रत्यर्पण के मामले में ब्रिटेन की अदालत में चल रही सुनवाई के दौरान माल्या ने एक बयान देकर हंगामा मचा दिया. माल्या ने कहा कि वह भारत छोड़ने से पहले वित्त मंत्री से मिलकर आए थे. शराब कारोबारी विजय माल्या ने कहा, 'मैं सेटलमेंट को लेकर वित्त मंत्री से मिला था, लेकिन बैंकों ने मेरे सेटलमेंट प्लान को लेकर सवाल खड़े किए.

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कांग्रेस ने वित्त मंत्री को घेरा

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने माल्या के दावों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है. वहीं सीनियर लॉयर और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, 'कांग्रेस लंबे समय से यह कह रही है कि सिर्फ विजय माल्या ही नहीं, बल्कि नीरव मोदी और मेहुल चौकसी और कई अन्य को बिना कार्रवाई जाने दिया गया.' कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा, 'विजय माल्या, तो श्री अरुण जेटली से मिल, विदाई लेकर, देश का पैसा लेकर भाग गया है? चौकीदार नहीं, भागीदार है!'



आप भी हुई हमलावर
वहीं, कांग्रेस के साथ ही आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी मोदी सरकार के खिलाफ हमला बोला है. 'आप' प्रमुख दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने इस संबंध में एक के बाद एक कई ट्वीट किये. उन्होंने पूछा, ' वित्त मंत्री ने अब तक यह सूचना क्यों छुपा कर रखी थी.' वहीं आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने इस मामले में पीएम मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली से जवाब मांगा है.

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दिल्ली के मुख्यमंत्री ने ट्वीट में कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नीरव मोदी के देश छोड़कर जाने से पहले उससे मिलते हैं. विजय माल्या के देश से छोड़कर जाने से पहले वित्त मंत्री उससे मिलते हैं. इन बैठकों में क्या पकाया जा रहा था? जनता यह जानना चाहती है.'



विजय माल्या के इस बयान के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने बीजेपी पर निशाना साधा है. उन्होंने ट्वीट किया, 'सिर्फ वित्त मंत्री ही नहीं, बल्कि पूरी बीजेपी को विजय माल्या के साथ अपने संबंधों की बात को स्वीकार कर लेना चाहिए'.



जेटली ने ब्लॉग लिखकर दिया जवाब
माल्या के भारत छोड़ने से पहले वित्त मंत्री से मुलाकात की खबरों को अरुण जेटली ने ब्लॉग लिखकर खारिज किया है. जेटली ने लिखा, 'विजय माल्या ने कहा कि वह भारत छोड़ने से पहले सेटलमेंट ऑफर को लेकर मुझसे मिले थे. तथ्यात्मक रूप से यह बयान पूरी तरह झूठ है. 2014 से अब तक मैंने माल्या को मुलाकात के लिए कोई अपॉइंटमेंट नहीं दिया है, ऐसे में मुझसे मिलने का सवाल ही नहीं उठता.'

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अपने ब्लॉग में जेटली ने लिखा, 'हालांकि वह (माल्या) राज्यसभा सदस्य थे और कभी-कभी सदन में आते थे. सदन की कार्रवाई के बाद एक बार मैं अपने कमरे की तरफ जा रह था. वह दौड़ते हुए मेरी तरफ आए थे. इस दौरान उन्होंने कहा था, 'मैं सेटलमेंट के लिए एक ऑफर तैयार कर रहा हूं.'



माल्या ने कहा, 'मैंने उनके ऑफर को जानने की भी कोशिश नहीं की. मैंने माल्या से कहा कि मेरे सामने ऑफर रखने का कोई मतलब ही नहीं है, ये बात अपने बैंकों के सामने रखनी चाहिए. यहां तक कि वह उस दौरान अपने हाथ में जो पेपर लिए हुए थे, मैंने उन्हें भी नहीं लिया.'

जेटली के बचाव में उतरे मंत्री
माल्या के इस बयान के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं. इसलिए पूरी मोदी सरकार वित्त मंत्री के बचाव में उतर आई है. बीजेपी के कई नेताओं और मंत्रियों ने जेटली का पक्ष लिया है माल्या के आरोपों को बेबुनियाद बताया है.

सरकार की ओर कहा गया है कि देश छोड़ने से पहले विजय माल्या ने प्रधानके कॉरिडोर में एक बार माल्या ने जेटली से मुलाकात की कोशिश की थी.मंत्री से मिलने का वक्त मांगा था, लेकिन व्यस्त कार्यक्रम की वजह से समय नहीं दिया गया. साथ ही संसद

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स्वामी ने उठाए सवाल
तमाम बीजेपी नेताओं से इतर जाकर राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने इस मुलाकात को लेकर सवाल खड़े किए हैं. स्वामी ने ट्वीट किया, 'एक मजबूत लुकआउट नोटिस के बाद माल्या देश छोड़कर जा ही नहीं सकता था. इसके बाद वह दिल्ली आया और किसी से मुलाकात की, जो इतना ताकतवर था कि लुकआउट नोटिस को 'डिपार्चर ब्लॉक' की जगह 'डिपार्चर रिपोर्ट' किया गया. माल्या के लुकआउट नोटिस को कमजोर करने वाला कौन था?'



बता दें कि किंगफिशर एयरलाइन के प्रमुख विजय माल्या पिछले साल अप्रैल में जारी प्रत्यर्पण वारंट के बाद से जमानत पर हैं. उन पर भारत में 9,000 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी का आरोप है. इससे पहले जुलाई में वेस्टमिंस्टर की अदालत ने उनके ‘संदेहों को दूर करने के लिए’ भारतीय अधिकारियों से ऑर्थर रोड जेल की बैरक नंबर 12 का वीडियो जमा करने को कहा था. माल्या के केस पर ब्रिटेन की अदालत 10 दिसंबर को अपना फैसला सुनाएगी.
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