कांग्रेस का UP सरकार पर 'प्रहार', कहा- कोरोना से हुई मौत के आंकड़ों को छिपाया जा रहा

(File pic)

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कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केंद्र और कुछ राज्य सरकारें मौत के आंकड़ों को छुपा रही हैं. पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कोरोना काल में लखनऊ में 2268 मौतें हुई हैं, लेकिन पहली अप्रैल से 15 मई तक के आंकड़े कुछ और कहानी बयां करते हैं.

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नई दिल्ली. कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश सरकार (Uttar Pradesh Government) पर राज्य भर में कोरोना से मौत (Corona Death) के आंकड़ों को छिपाने का आरोप लगाया है. मंगलवार को कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और कुछ राज्य सरकारें मौत के आंकड़ों को छिपा रही हैं. पार्टी की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कोरोना संक्रमण (Corona Virus) से लखनऊ में 2,268 लोगों की मौतें हुई हैं, लेकिन पिछले डेढ़ महीने यानी पहली अप्रैल से 15 मई तक के आंकड़े कुछ और सच्चाई बयां करते हैं. 15 फरवरी से 31 मार्च तक के आंकड़ों की तुलना की जाए तो 2,000 हजार अतिरिक्त मृत्यु प्रमाणपत्र (Death Certificate) जारी किए गए हैं.

कांग्रेस का आरोप है कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक एक अप्रैल से 15 मई तक 7,890 मृत्यु प्रमाणपत्र जारी हुए हैं, जबकि 15 फरवरी से 31 मार्च तक 5,970 मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किये गये थे. यानी एक अप्रैल से 15 मई तक दो हजार अतिरिक्त मृत्यु प्रमाणपत्र लखनऊ में जारी हुए, लेकिन सरकार इस 2000 अतिरिक्त मृत्यु प्रमाणपत्र को कोरोना से मृत्यु नहीं मान रही है. कांग्रेस ने यूपी सरकार से पूछा कि लखनऊ में मौत के आंकड़ों को क्यों छिपाया जा रहा है. केंद्र और राज्य सरकार आंकड़े को क्यों छिपा रही है. श्रीनेत ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कहते हैं कि सबकुछ काबू में हैं लेकिन गंगा नदी में बेजुबान आंकड़े तैर रहे हैं, और वास्तविक मौत के जो आंकड़े आ रहे हैं वो कुछ और कह रहे हैं.

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यूपी सरकार 3Ds पर काम कर रही है: कांग्रेस
वहीं, प्रदेश में कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा ने आरोप लगाया कि यूपी सरकार 3-डी पर काम कर रही है, जो हैं- Denial of facts, Destroying Evidence and Data Manipulation.  सरकार का पूरा ध्यान कोरोना के अलावा आंकड़े छिपाने पर है. कांग्रेस ने सरकार से सवाल किया कि अब तक लखनऊ नगर निगम को मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने का जो अधिकार था वो सीएमओ के संरक्षण में क्यों दिया गया. ऐसा सरकार ने क्यों किया? पार्टी ने इसे आंकड़ों को छिपाने के लिये लिया गया फैसला बताया.

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