महाराष्ट्र में कांग्रेस को नहीं मिले नए साथी, पुराना गठबंधन ही देगा BJP-शिवसेना को चुनौती!

सूत्रों के मुताबिक प्रकाश अंबेडकर ने एक तिहाई सीटें अपने वंचित बहुजन मोर्चा के लिए दिए जाने की शर्त रखी जो कांग्रेस और एनसीपी को मंजूर नहीं. इसलिए अब ऐसे किसी गठबंधन की संभावना खत्म हो गई है.

Anurag Dhanda | News18Hindi
Updated: July 25, 2019, 3:21 PM IST
महाराष्ट्र में कांग्रेस को नहीं मिले नए साथी, पुराना गठबंधन ही देगा BJP-शिवसेना को चुनौती!
कांग्रेस और एनसीपी को नहीं मिला कोई साथी. (फाइल फोटो)
Anurag Dhanda | News18Hindi
Updated: July 25, 2019, 3:21 PM IST
लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद कांग्रेस और एनसीपी ने गठबंधन में शामिल करने के लिए नये साथियों की तलाश शुरू कर दी थी. इस सिलसिले में प्रकाश अंबेडकर के वंचित बहुजन मोर्चा को भी गठबंधन में शामिल करने की चर्चा जोरों पर थी, लेकिन बातचीत सिर नहीं चढ़ सकी.

सूत्रों के मुताबिक प्रकाश अंबेडकर ने एक तिहाई सीटें अपने वंचित बहुजन मोर्चा के लिए दिए जाने की शर्त रखी जो कांग्रेस और एनसीपी को मंजूर नहीं. इसलिए अब ऐसे किसी गठबंधन की संभावना खत्म हो गई है और कांग्रेस अपने पुराने सहयोगी दल एनसीपी के साथ ही विधानसभा चुनाव में बीजेपी और शिवसेना को चुनौती देने की कोशिश करेगी.

लोकसभा चुनाव में ऐसा रहा गठबंधन का प्रदर्शन
हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में गठबंधन के बावजूद कांग्रेस और एनसीपी को करारी हार का सामना करना पड़ा था. महाराष्ट्र में लोकसभा की 48 सीटें हैं, जिसमें से कांग्रेस को सिर्फ एक और एनसीपी को 4 सीटें मिल पायी हैं.

लोकसभा चुनाव कांग्रेस और एनसीपी ने एक साथ मिलकर लड़ा था.


ये बात बनी अड़चन
गठबंधन न हो पाने की एक बड़ी वजह ये बतायी जा रही है कि वंचित बहुजन मोर्चा के अध्यक्ष प्रकाश अम्बेडकर को हमेशा ये लगता रहा कि शरद पवार ने रामदास अठालवे को दलित होने के नाते ज़्यादा राजनीतिक प्रमोशन दिया, ताकि उनकी (प्रकाश अंबेडकर) को महाराष्ट्र की राजनीति मे रोका जा सके. सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस-एनसीपी का समझौता इसलिए भी नहीं हो पाया क्योंकि प्रकाश अम्बेडकर विदर्भ और मराठावाडा के नेता हैं, लेकिन वो सीटें पूरे प्रदेश में मांग रहे हैं.
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शरद पवार को अभी भी है उम्‍मीद
हालांकि एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार को अब भी उम्मीद है कि कांग्रेस किसी तरह प्रकाश अंबेडकर को मना लेगी और चुनाव से पहले गठबंधन की संभावना बन सकती है. हालांकि कुछ समय पहले राज्‍य के तेजतर्रार नेता राज ठाकरे की सोनिया गांधी से मुलाकात के भी कई मायने निकाले जा रहे थे, लेकिन ऐसा लगता है कि वो बात भी अब खत्‍म हो गई है.

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First published: July 25, 2019, 3:17 PM IST
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