कार्य प्रगति पर है! कांग्रेस का सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को लेकर सरकार पर हमला

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में नए संसद भवन का निर्माण किया जाना है, जिस पर 20 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. फाइल फोटो

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में नए संसद भवन का निर्माण किया जाना है, जिस पर 20 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. फाइल फोटो

Central Vista redevelopment Project: राहुल गांधी के अलावा भारतीय युवा कांग्रेस के नेता बीवी श्रीनिवास ने ट्वीट करते हुए प्रोजेक्ट पर सवाल खड़ा किया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 27, 2021, 11:33 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना संक्रमण (Coro) के शिकार लोगों की चिताओं से उठे चिरांध ने दिल्ली की रंगत को धूसर कर दिया है. राजधानी की सड़कों पर सन्नाटा है, तो घरों में मातम... लोग अपनों की जान बचाने के लिए ऑक्सीजन और मेडिकल सेवाओं के लिए छटपटा रहे हैं. दूसरी ओर दिल्ली के हृदयस्थल लुटियंस में 20 हजार करोड़ के सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में कार्य प्रगति पर है. बुत की तरह खड़े इंडिया गेट के पास तेजी से काम जारी है, मजदूर जमीन खोद रहे हैं और नए संसद भवन की नींव डाल रहे हैं.

दिल्ली में दस दिनों के लिए लॉकडाउन है, संक्रमण के चलते हालात बेहद खराब है, पिछले एक सप्ताह में दिल्ली में कोरोना से 2,267 लोगों की मौत हो गई है, और ये आंकड़ा सरकारी है. हर दिन लोग अपनों के लिए अस्पतालों में बेड ढूंढ़ते हैं और सरकार से मेडिकल सुविधाओं की गुहार लगाते हैं, लेकिन ऑक्सीजन की कमी पूरी नहीं हो पा रही है. कोर्ट में दलील पर दलील दी जा रही है. इस कोलाहल के बीच सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का काम बदस्तूर जारी है, इस प्रोजेक्ट को सरकार ने आवश्यक सेवाओं की सूची में डाल रखा है.

कांग्रेस ने खड़ा किया सवाल

इस बीच कांग्रेस ने केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर सवाल खड़ा किया. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 23 अप्रैल को इस पर ट्वीट करते हुए सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा किया था. उन्होंने लिखा था, टेस्ट नहीं, वैक्सीन नहीं, ऑक्सीजन नहीं, आईसीयू नहीं... प्राथमिकताएं! राहुल गांधी ने अपनी खबर में एक मीडिया रिपोर्ट भी संलग्न की थी.
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राहुल गांधी के अलावा भारतीय युवा कांग्रेस के नेता बीवी श्रीनिवास ने ट्वीट करते हुए प्रोजेक्ट पर सवाल खड़ा किया और लिखा कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में खर्च हो रहे 20 हजार करोड़ से अगर वेंटिलेटर और आईसीयू बेड खरीदे जाते तो लाखों हिंदुस्तानी जिंदा होते. अफसोस नीति बनाने वालों के लिए जान नहीं, आराम जरूरी है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 16 अप्रैल को जब दिल्ली में वीकेंड लॉकडाउन का ऐलान हुआ तो सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट ने दिल्ली पुलिस को पत्र लिखकर कहा कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत एवेंन्यू रिडेवलपमेंट कार्य की समय सीमा निर्धारित है और इसे 30 नवंबर 2021 से पहले पूरा किया जाना है, लिहाजा कंपनी को सभी तीन शिफ्टों में काम करने का निर्देश दिया गया है.



दिल्ली पुलिस को लिखे पत्र में गुजारिश की गई कि कंपनी को मजदूरों को लेबर कैंप से लाने ले जाने की अनुमति कंपनी को दी जाए और इसके लिए कंपनी कर्फ्यू के दौरान अपनी बसों का इस्तेमाल करेगी. जवाब में 19 अप्रैल को नई दिल्ली जिले के डिप्टी कमिश्नर पुलिस ने 180 गाड़ियों के आवागमन के लिए पास जारी किया. साथ ही यह भी कहा कि ये मूवमेंट पास आवश्यक सेवाओं की कैटेगिरी के तहत जारी किए गए हैं.

प्रोजेक्ट के तहत काम जारी रखने के मामले में सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट के प्रवक्ता ने कहा कि सिर्फ अति आवश्यक कार्य ही किया जा रहा है, इसके लिए साइट पर मौजूद कामगारों को ही अनुमति दी गई है, बाहर से कामगारों को लाने की अनुमति नहीं है.

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को जानिए

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का ये बेहद ही महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है. इसके तहत लुटियंस दिल्ली में अंग्रेजों के बनाए 3.2 किलोमीटर की पट्टीनुमा इलाके को पुनः विकसित किया जाना है. प्रोजेक्ट के विकास में कई सरकारी इमारतों को ध्वस्त कर, नई सरकारी इमारतें और ऑइकॉनिक लैंडमार्क्स को दोबारा से विकसित करने के साथ नए संसद भवन का निर्माण किया जाना है, जिस पर 20 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.

सितंबर 2019 में जब केंद्र सरकार ने इसके लिए टेंडर जारी किया तो उसे काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा. विपक्ष ने इसे फिजूलखर्ची बताया. बाद में कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के बाद देश की चरमराती स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था को देखते हुए आलोचनाओं के स्वर मुखर होते गए.
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