बंगाल में आधे चुनाव के बाद कल राहुल गांधी की एंट्री, क्या काम करेगा BJP का गेम प्लान?

राहुल गांधी (ANI)

राहुल गांधी (ANI)

West Bengal Assembly Election: बंगाल में कांग्रेस जहां एक विरोधाभासी स्थिति का सामना कर रहे हैं. वहीं, राहुल गांधी अब तक बंगाल से दूर रहे हैं. चुनावी मौसम में राहुल ने ज्यादातर वक्त तमिलनाडु और केरल को दिया है. कांग्रेस बंगाल में वाम दलों के साथ गठबंधन कर रही है, लेकिन केरल में उसके खिलाफ लड़ रही है. केरल में 6 अप्रैल को एक चरण में मतदान हो चुका है. इसलिए, कांग्रेस और राहुल गांधी को लगता था कि 7 अप्रैल से पहले बंगाल में कदम नहीं रखा जाना चाहिए.

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  • Last Updated: April 13, 2021, 12:36 AM IST
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(अमन शर्मा)

'हम एक बड़ा मैदान बुक कर रहे हैं. रैली में 30 हजार से 40 हजार लोग होंगे.' पिछले दशक से सिलीगुड़ी की माटीगारा-नक्सलबाड़ी सीट से कांग्रेस (Congress) के विधायक रह चुके शंकर मालाकार (Sankar Malakar) की आवाज़ में जो उत्साह है, उसे भुलाया नहीं किया जा सकता है. पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष मालाकार पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की राज्य में इस चुनावी मौसम में पहली रैली की तैयारी कर रहे हैं.

राहुल गांधी 14 अप्रैल को इस निर्वाचन क्षेत्र में रैली करेंगे. बंगाल में लगभग आधे चुनाव (आठ चरणों में से चार) खत्म हो गए हैं और राज्य में चुनावी अभियान समाप्त होने में महज एक पखवाड़ा बचा है. ऐसे में कांग्रेस की बंगाल में पहली रैली होने जा रही है.

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मालाकार ने News18 से फोन पर इस बारे में बातें की. उन्होंने बताया, 'बंगाल में राहुल गांधी का प्रवेश हमारे लिए बहुत फायदेमंद होगा. हमारे मतदाता और कार्यकर्ता इससे प्रेरित होंगे. जो आखिरकार वाम दलों और आईएसएफ (भारतीय धर्मनिरपेक्ष मोर्चा) के साथ कांग्रेस के गठबंधन के लिए भी मददगार साबित होगी. हम बीजूमल के खिलाफ लड़ रहे हैं - जो बीजेपी प्लस तृणमूल (टीएमसी) हैं. क्योंकि बीजेपी ज्यादातर टीएमसी छोड़कर आए लोगों से ही बनी है. मुस्लिम हमारे गठबंधन के लिए बड़े पैमाने पर मतदान करेंगे.'

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बंगाल में कांग्रेस जहां एक विरोधाभासी स्थिति का सामना कर रहे हैं. वहीं, राहुल गांधी अब तक बंगाल से दूर रहे हैं. चुनावी मौसम में राहुल ने ज्यादातर वक्त तमिलनाडु और केरल को दिया है. कांग्रेस बंगाल में वाम दलों के साथ गठबंधन कर रही है, लेकिन केरल में उसके खिलाफ लड़ रही है. केरल में 6 अप्रैल को एक चरण में मतदान हो चुका है. इसलिए, कांग्रेस और राहुल गांधी को लगता था कि 7 अप्रैल से पहले बंगाल में कदम नहीं रखा जाना चाहिए.



कांग्रेस के सहयोगी आईएसएफ के नेता अब्बास सिद्दीकी ने पहले News18 को दिए गए एक इंटरव्यू में चुनाव प्रचार में 135 साल पुरानी पार्टी कांग्रेस की अनुपस्थिति पर निराशा व्यक्त की थी.

मालाकर ने कहा, 'हम जानते हैं कि राहुल गांधी असम और केरल में प्रचार करने में व्यस्त थे, लेकिन हमें खुशी है कि राहुल अब बंगाल आ रहे हैं.' 10 अप्रैल को कूच बिहार हिंसा के बाद चुनाव आयोग ने इस सीट पर मतदान से 72 घंटे पहले ही प्रचार खत्म करने का आदेश दिया है. सिलीगुड़ी की माटीगारा-नक्सलबाड़ी सीट पर 17 अप्रैल को चुनाव है.

मुस्लिम वोट पर फोकस

बंगाल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी के उम्मीदवार चाहते थे कि गांधी राज्य में कम से कम एक दर्जन रैलियां करें. विशेषकर मालदा और मुर्शिदाबाद जिलों में; जहां कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी का खासा प्रभाव है और मुस्लिम मतदाता पार्टी के प्रति वफादार हैं.

14 अप्रैल को माटीगारा-नक्सलबाड़ी में राहुल गांधी की पहली रैली है. दूसरी रैली उत्तर दिनाजपुर जिले के गोलपोखर में होगी; इस निर्वाचन क्षेत्र की लगभग 74% जनसंख्या मुस्लिम है. राज्य में सबसे अधिक मुस्लिम यहीं से हैं.

गोलपोखर से कांग्रेस उम्मीदवार मोहम्मद नसीम अहसान ने News18 के साथ फोन पर हुई बातचीत में कहा- 'टीएमसी (सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस) ने मुसलमानों के लिए कुछ नहीं किया है. मुस्लिम अब महसूस करते हैं कि केवल कांग्रेस-वाम-आईएसएफ गठबंधन ही राज्य में बीजेपी को सत्ता में आने से रोक सकता है. ऐसे में राहुल गांधी की रैली से हमें बड़ी उम्मीदें हैं.'

मोहम्मद नसीम अहसान आगे कहते हैं, 'कांग्रेस ने आखिरी बार 2006 में यह सीट जीती थी, जब दिवंगत कांग्रेस नेता प्रिय रंजन दासमुंशी की पत्नी दीपा दासमुंशी ने चुनाव लड़ा था. वह अब कांग्रेस का समर्थन हासिल करने के लिए निर्वाचन क्षेत्र में डेरा डाले हुई हैं.' अहसान आगे कहते हैं, 'मेरी सीट पर सभी पार्टियों टीएमसी, बीजेपी और कांग्रेस के उम्मीदवार मुस्लिम हैं. पिछले एक दशक से टीएमसी के मौजूदा विधायक मोहम्मद गुलाम रब्बानी ने मुस्लिमों को मायूस किया है. वह मुसलमानों से कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (एनआरसी) को लागू करने से रोक देंगी. इसलिए उन्हें वोट दें'... राहुल ने NRC को सिर्फ बंगाल में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में रोकने का संकल्प लिया है. उनकी रैली हमारे लिए फायदेमंद होगी. पूरे जिले में इसका लाभ मिलेगा.'

बीजेपी की करीबी नजर

इस बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) बंगाल में कांग्रेस के प्रचार अभियान और राहुल गांधी के प्रवेश के बारे में ज्यादा परेशान नहीं दिखती. कम से कम दो पार्टी नेताओं ने NEWS18 को फोन पर बताया कि इससे कुछ नुकसान नहीं होगा, बल्कि बीजेपी को मदद मिलेगी; क्योंकि कांग्रेस-वाम-आईएसएफ गठबंधन का वोट टीएमसी के वोट में खप जाएगा.

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उन्होंने कहा, 'हमने मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जिलों में कुछ मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है. हम उम्मीद कर रहे हैं कि मुस्लिम बहुल सीटों पर टीएमसी और (कांग्रेस) गठबंधन के बीच लड़ाई में आखिरकार बीजेपी को फायदा होगा. या तो सीट जीतकर या गठबंधन द्वारा टीएमसी को सीट देने से इनकार कर दिया जाएगा.'

वास्तव में बीजेपी के आंतरिक मूल्यांकन के अनुसार पार्टी माटीगारा-नक्सलबाड़ी और गोलपोखर दोनों सीटों पर एक करीबी लड़ाई में है. इन दोनों जगह ही राहुल गांधी 14 अप्रैल को प्रचार करेंगे. बीजेपी ने अब तक सार्वजनिक रूप से कांग्रेस-वाम दलों की आलोचना करने से परहेज किया है. अब तक बीजेपी नेताओं ने टीएमसी और ममता बनर्जी पर ही निशाने पर लिया है. एक बीजेपी नेता के मुताबिक, ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि राहुल गांधी अपनी रैलियों में किसकी आलोचना करते हैं- बीजेपी या टीएमसी की.'
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